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ऑलिव रिडले बच्चों की पहली यात्रा ने मोह लिया सबका दिल

लाखों साल पुरानी प्रवृत्ति… और समुद्र की ओर दौड़ते नन्हे कछुए


गंजम।
  TODAY छत्तीसगढ़  /  ओडिशा के गंजम जिले में ऋषिकुल्या नदी के मुहाने पर इन दिनों प्रकृति का अद्भुत और भावुक कर देने वाला दृश्य देखने को मिल रहा है। हजारों ऑलिव रिडले समुद्री कछुओं के नन्हे बच्चे अंडों से बाहर निकलकर समुद्र की ओर अपनी पहली यात्रा पर निकल पड़े हैं।

करीब 45 दिनों तक रेत में सुरक्षित रहने के बाद अब ये छोटे कछुए तेजी से बंगाल की खाड़ी की ओर बढ़ रहे हैं। समुद्र तट पर यह नजारा लोगों को रोमांचित कर रहा है। इस मौसम में लाखों अंडे तट पर दिए गए थे, जिससे यह इलाका ऑलिव रिडले कछुओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण नर्सरी बन गया है।

विशेषज्ञों के अनुसार, इस सामूहिक अंडे देने की प्रक्रिया को ‘अरिबाडा’ कहा जाता है। यह एक दुर्लभ प्राकृतिक घटना है, जिसमें हजारों मादा कछुए एक साथ समुद्र तट पर पहुंचकर अंडे देती हैं। ‘अरिबाडा’ शब्द स्पेनिश भाषा से लिया गया है, जिसका अर्थ है “समुद्र के रास्ते आगमन।” 

बताया जाता है कि मादा कछुए अक्सर उसी तट पर लौटती हैं जहां उनका जन्म हुआ था। वे रेत में घोंसले बनाकर लगभग 80 से 120 अंडे देती हैं। अंडों से बाहर निकलने के बाद नन्हे कछुओं को समुद्र तक पहुंचने के लिए लंबी और खतरनाक यात्रा तय करनी पड़ती है। इस दौरान उन्हें समुद्री लहरों, पक्षियों और अन्य शिकारियों के अलावा इंसानी दखल जैसी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। बावजूद इसके, उनकी सहज प्रवृत्ति उन्हें समुद्र की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित करती है। 

वन विभाग और पर्यावरण प्रेमियों ने लोगों से अपील की है कि इस संवेदनशील समय में समुद्र तट पर अनावश्यक भीड़ और रोशनी से बचें, ताकि कछुओं की यह प्राकृतिक यात्रा सुरक्षित रह सके।

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