रायगढ़ । TODAY छत्तीसगढ़ / जिले में साइबर ठगी के एक बड़े मामले का खुलासा करते हुए रायगढ़ पुलिस ने अंतरराज्यीय ठग गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने राजस्थान के भीलवाड़ा से महिला सहित पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर ट्रांजिट रिमांड पर रायगढ़ लाया है। आरोपियों ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर जिले के एक सेवानिवृत्त विद्युत विभाग के पर्यवेक्षक से करीब 36 लाख 97 हजार रुपये की ठगी की थी।
प्रेस वार्ता में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह ने बताया कि यह गिरोह बेहद सुनियोजित तरीके से लोगों को कानून और जांच एजेंसियों का भय दिखाकर ठगी करता था। तकनीकी साक्ष्यों और बैंक खातों की जांच के आधार पर आरोपियों तक पहुंच बनाई गई।
ऐसे रचा गया पूरा षड्यंत्र
पुलिस के अनुसार, पीड़ित नरेन्द्र ठाकुर, जो विद्युत विभाग से सेवानिवृत्त हैं, को जनवरी 2026 में एक अज्ञात महिला का फोन आया। कॉल करने वाली ने खुद को दूरसंचार नियामक संस्था (TRAI) से जुड़ा बताते हुए कहा कि उनके आधार कार्ड का उपयोग कर अवैध गतिविधियां की जा रही हैं।
इसके बाद कॉल को तथाकथित पुलिस अधिकारी और फिर एक व्यक्ति से जोड़ा गया, जिसने खुद को दिल्ली पुलिस का अधिकारी बताया। इसके बाद एक अन्य व्यक्ति ने वीडियो कॉल कर स्वयं को आईपीएस अधिकारी बताते हुए पीड़ित को “डिजिटल अरेस्ट” का भय दिखाया। आरोपियों ने पीड़ित को मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने और गिरफ्तारी की धमकी देकर उसके बैंक खातों, संपत्ति और निजी जानकारी हासिल की। इसके बाद जांच के नाम पर अलग-अलग खातों में रकम ट्रांसफर करवाई गई। डर के कारण पीड़ित ने 30 जनवरी से 11 फरवरी के बीच कुल 36,97,117 रुपये ट्रांसफर कर दिए। बाद में परिजनों को जानकारी होने पर ठगी का खुलासा हुआ और साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई गई।
तकनीकी जांच से खुला राज
साइबर पुलिस ने बैंक खातों और डिजिटल ट्रेल की जांच करते हुए पाया कि रकम राजस्थान के भीलवाड़ा स्थित खातों में जमा की गई है। इसके बाद विशेष टीम गठित कर वहां दबिश दी गई। जांच में सामने आया कि मुख्य आरोपी राहुल व्यास, जो बंधन बैंक में कर्मचारी है, अपने साथियों के साथ मिलकर गिरोह संचालित कर रहा था। आरोपी महिला आरती राजपूत ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और तकनीकी कार्य संभालती थी, जबकि अन्य आरोपी रकम के लेनदेन और नेटवर्क विस्तार में सहयोग करते थे। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि उन्होंने इंटरनेट और सोशल मीडिया के माध्यम से साइबर ठगी के तरीके सीखे और फिर खुद इस अवैध कारोबार में शामिल हो गए।
देशभर में फैला था नेटवर्क
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि यह गिरोह देशभर में सक्रिय था और अब तक करीब 1 करोड़ 40 लाख रुपये से अधिक की ठगी कर चुका है। आरोपियों के बैंक खातों में लाखों रुपये के संदिग्ध लेनदेन मिले हैं। एक आरोपी के खाते में ही करीब 60 लाख रुपये का ट्रांजेक्शन पाया गया। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 7 मोबाइल फोन, 1 लैपटॉप, बैंक खातों से संबंधित दस्तावेज ट्रांजेक्शन रिकॉर्ड जब्त किए हैं। सभी आरोपियों के बैंक खाते सीज कर दिए गए हैं और आगे की जांच जारी है।
रायगढ़ पुलिस ने इस मामले में जिन आरोपियों की गिरफ्तारी बताई है उनमें राहुल व्यास (भीलवाड़ा), रविराज सिंह, संजय मीणा, आरती राजपूत और गौरव व्यास का नाम है। सभी आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 308(6), 318(4) तथा आईटी एक्ट की धारा 66(D) के तहत मामला दर्ज कर न्यायिक कार्रवाई की जा रही है।
एसएसपी शशि मोहन सिंह ने आमजन से अपील करते हुए कहा कि -
डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं होती। कोई भी सरकारी एजेंसी फोन या वीडियो कॉल पर पैसे ट्रांसफर नहीं कराती। ऐसे कॉल आने पर घबराएं नहीं और तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करें।
