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दावों की खुलती पोल: 60 साल पुराने जर्जर भवन में भविष्य गढ़ रहे छत्तीसगढ़ के नौनिहाल

क्या सिर्फ़ काग़ज़ों पर बदल रही है शिक्षा व्यवस्था? हरदीकला स्कूल की ज़मीनी हक़ीक़त

TODAY छत्तीसगढ़  /  छत्तीसगढ़ के बिलासपुर ज़िले में एक सरकारी स्कूल की बदहाल स्थिति ने ग्रामीण इलाक़ों में शिक्षा के बुनियादी ढांचे पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

बिल्हा विकासखंड के हरदीकला गांव में स्थित शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला के बच्चे एक ऐसे जर्जर और खपरैल वाले भवन में पढ़ने को मजबूर हैं, जिसका निर्माण क़रीब छह दशक पहले (साल 1966 में) हुआ था. बरसात के मौसम में इस भवन की जर्जरता बच्चों और शिक्षकों की सुरक्षा के लिए एक बड़ा ख़तरा बन जाती है. 

"कहते हैं कि बच्चे देश का भविष्य हैं, लेकिन लगता है यह भविष्य आज भी 1966 की दीवारों के सहारे खड़ा है। हरदीकला गांव का सरकारी स्कूल मानो शिक्षा नहीं, सरकारी उदासीनता का जीवित स्मारक बन गया है।"

क्या है स्कूल की ज़मीनी हक़ीक़त?

हाल ही में 'स्वयं सिद्धा फाउंडेशन' नाम की एक संस्था ने इस स्कूल का दौरा किया और वहां की बदहाली पर चिंता ज़ाहिर की. जानकारी के मुताबिक़, इस स्कूल में छठी, सातवीं और आठवीं कक्षा के कुल 286 छात्र-छात्राएं पढ़ते हैं. स्कूल में कमरों की इतनी कमी है कि सातवीं कक्षा की छात्राओं को एक कच्चे भवन में दो पालियों (शिफ़्ट) में बैठाकर पढ़ाया जा रहा है. 

विडंबना देखिए, भाषणों में "विश्वस्तरीय शिक्षा" और "नए भारत" के सपने गढ़े जाते हैं, जबकि हक़ीक़त में कई स्कूल खुद अपनी आख़िरी सांसें गिन रहे हैं। 

जो कक्षाएं पक्के भवन में लग रही हैं, उनकी स्थिति भी संतोषजनक नहीं बताई गई है. कमरों की खिड़कियां टूटी हुई हैं और फ़र्श उखड़ा हुआ है. फाउंडेशन के अनुसार, स्कूल में साफ़-सफ़ाई और शौचालय जैसी सबसे बुनियादी सुविधाओं की भी भारी कमी है, जिससे बच्चों और शिक्षकों को रोज़ाना परेशानियों का सामना करना पड़ता है.

किसने क्या कहा?

एनजीओ की मांग: स्वयं सिद्धा फाउंडेशन की अध्यक्ष चंचल सलूजा ने कहा कि शिक्षा हासिल करने के लिए बच्चों को बेहद कठिन परिस्थितियों से गुज़रना पड़ रहा है. उन्होंने ज़िला प्रशासन से अपील की है कि बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए नए भवन के निर्माण और मरम्मत को प्राथमिकता दी जाए.

स्कूल प्रशासन का पक्ष: स्कूल के प्रधान पाठक ज्ञानेंद्र राय ने बताया कि उन्होंने भवन की इस ख़राब स्थिति की जानकारी उच्च अधिकारियों को पहले ही दे दी है. फ़िलहाल, स्कूल प्रबंधन नए भवन के निर्माण के लिए विभागीय मंज़ूरी और फंड आने का इंतज़ार कर रहा है.

अब समय केवल घोषणाओं और शिलान्यास का नहीं, बल्कि उन स्कूलों को सम्मानजनक और सुरक्षित बनाने का है, जहाँ से देश का भविष्य आकार लेता है। 

शिक्षा विभाग का आश्वासन: इस पूरे मामले पर ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (BEO) भूपेंद्र कौशिक का कहना है कि उन्हें स्थिति की जानकारी मिली है. उन्होंने आश्वासन दिया है कि जल्द ही एक आधिकारिक टीम भेजकर स्कूल का मुआयना कराया जाएगा. निरीक्षण की रिपोर्ट ज़िला कार्यालय को भेजी जाएगी और फंड मिलते ही मरम्मत का काम शुरू कर दिया जाएगा.

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