CCTV फुटेज वायरल: होटल के बाहर देखते रहे लोग, युवती को पीटता रहा आरोपी


बिलासपुर।
  TODAY छत्तीसगढ़  /  छत्तीसगढ़ की न्यायधानी बिलासपुर में एक युवती के साथ सरेआम मारपीट की घटना सामने आने से शहर में सनसनी फैल गई है। सरकंडा थाना क्षेत्र स्थित एक होटल के बाहर उसके ही पूर्व परिचित युवक ने लात-घूंसों से बेरहमी से पिटाई कर दी। पूरी वारदात वहां लगे CCTV कैमरे में कैद हो गई, जिसके सामने आने के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है।

मिली जानकारी के अनुसार, कोरबा निवासी युवती बिलासपुर में हॉस्टल में रहकर एलएलबी फाइनल ईयर की पढ़ाई कर रही है। 31 मार्च को वह अपने एक परिचित युवक के साथ सरकंडा इलाके के एक होटल में ठहरी हुई थी। इसी दौरान सुबह उसका पूर्व परिचित विवेक खटिक होटल पहुंच गया।

बताया जा रहा है कि जैसे ही युवती कमरे से बाहर निकली, आरोपी ने उससे गाली-गलौज शुरू कर दी। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि उसने युवती पर लात-घूंसों से हमला कर दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, घटना के दौरान आसपास मौजूद लोग मूकदर्शक बने रहे और किसी ने बीच-बचाव करने की कोशिश नहीं की।

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि होटल में रुकने को लेकर हुए विवाद के चलते आरोपी ने इस वारदात को अंजाम दिया। मारपीट की पूरी घटना CCTV में रिकॉर्ड हो गई है, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और उसकी तलाश शुरू कर दी है। मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस टीम लगातार दबिश दे रही है।

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पंकज पटेल ने बताया कि CCTV फुटेज के आधार पर आरोपी की पहचान कर ली गई है और जल्द ही उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा। इस घटना के बाद शहर में महिलाओं की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। 


महिला फुटबॉल में छत्तीसगढ़ का शानदार प्रदर्शन, झारखंड को हराकर जीता स्वर्ण पदक


रायपुर। 
 TODAY छत्तीसगढ़  /  खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स के अंतर्गत स्वामी विवेकानंद एथलेटिक स्टेडियम कोटा में खेले गए महिला फुटबॉल के फाइनल मुकाबले में छत्तीसगढ़ और झारखंड के बीच रोमांचक और कांटे की टक्कर देखने को मिली। मैच की शुरुआत से ही दोनों टीमों ने मजबूत खेल का प्रदर्शन किया। पहले हाफ की समाप्ति तक दोनों टीमें 0-0 की बराबरी पर रहीं। दोनों पक्षों के खिलाड़ियों ने शानदार रक्षा और आक्रमण का प्रदर्शन करते हुए मुकाबले को बेहद रोमांचक बनाए रखा।

दूसरे हाफ में छत्तीसगढ़ की टीम ने आक्रामक खेल दिखाते हुए छत्तीसगढ़ की कप्तान किरण पिस्दा ने एक महत्वपूर्ण गोल किया और 1-0 की बढ़त दिलाई। इसके बाद टीम ने अपनी इस बढ़त को अंत तक बनाए रखा। अंततः छत्तीसगढ़ ने झारखंड को 1-0 से हराकर महिला फुटबॉल प्रतियोगिता का स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया। इस जीत के साथ ही छत्तीसगढ़ की टीम ने शानदार खेल कौशल और टीमवर्क का परिचय दिया। यह मुकाबला पूरे समय दर्शकों के लिए रोमांच से भरपूर रहा और खिलाड़ियों के उत्कृष्ट प्रदर्शन ने सभी का मन मोह लिया।  इस अवसर पर खेल विभाग के सचिव श्री यशवंत कुमार, संचालक खेल एवं युवा कल्याण श्रीमती तनुजा सलाम, खेल विभाग के अधिकारी, आयोजन समिति के सदस्य, बड़ी संख्या में खिलाड़ी तथा खेल प्रेमी उपस्थित रहे।

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जंगल के मैदानों से राष्ट्रीय मंच तक : भारत की हॉकी विरासत को जीवित रखे हुए हैं जनजातीय समुदाय


रायपुर।
  TODAY छत्तीसगढ़  /  ओडिशा ने खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स-2026 में पुरुष और महिला दोनों वर्गों में हॉकी का स्वर्ण पदक जीतकर अपने दबदबे को साबित किया। रायपुर के सरदार वल्लभ भाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हॉकी स्टेडियम में खेले गए फाइनल में पुरुष टीम ने झारखंड को 4-1 से हराया, जबकि महिला टीम ने रोमांचक मुकाबले में मिजोरम को 1-0 से मात दी। पुरुष वर्ग में झारखंड को रजत और छत्तीसगढ़ को कांस्य मिला, जबकि महिला वर्ग में झारखंड ने कांस्य पदक हासिल कर पोडियम पूरा किया।

रायपुर में खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स-2026 में ओडिशा की यह दोहरी स्वर्णिम सफलता केवल एक खेल उपलब्धि नहीं, बल्कि यह इस बात का सशक्त उदाहरण है कि कैसे हॉकी ओडिशा, झारखंड और छत्तीसगढ़ के जनजातीय क्षेत्रों में जीवन को नई दिशा दे रही है। खेल प्रतिभा के भंडार माने जाने वाले पूर्वोत्तर राज्यों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, जहां मिजोरम की टीम ने फाइनल तक जगह बनाई।

ओडिशा की पुरुष टीम ने फाइनल में झारखंड को 4-1 से हराया, जबकि महिला टीम ने कड़े मुकाबले में मिजोरम को 1-0  से पराजित किया। झारखंड और छत्तीसगढ़ की टीमें भी पोडियम तक पहुंचीं, जो इन क्षेत्रों से उभरती प्रतिभा की गहराई को दर्शाता है। लेकिन पदकों से आगे बढ़कर असली कहानी उन गांवों, जंगलों और समुदायों में छिपी है, जहां हॉकी पहचान और अवसर दोनों बन चुकी है। दशकों से हॉकी जनजातीय संस्कृति का हिस्सा रही है। बच्चे पेड़ की टहनियों से स्टिक बनाकर ऊबड़-खाबड़ मैदानों पर नंगे पांव खेलते हैं। प्रतिभा हमेशा मौजूद थी, लेकिन उसे आगे बढ़ाने का रास्ता नहीं था—जो अब बदल रहा है।

केंद्रीय खेल मंत्रालय और राज्यों द्वारा संचालित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, बेहतर बुनियादी ढांचे और संगठित जमीनी कार्यक्रमों के चलते अब एक मजबूत खेल पारिस्थितिकी तंत्र विकसित हो रहा है। 1992 बार्सिलोना ओलंपिक में भारतीय टीम का हिस्सा रहे पूर्व ओलंपियन अजीत लकड़ा, जो वर्तमान में बिलासपुर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के मुख्य कोच हैं, इस बदलाव को करीब से देख रहे हैं। उन्होंने कहा, “ग्रासरूट से लेकर जूनियर और फिर सीनियर स्तर तक पूरी प्रणाली धीरे-धीरे मजबूत हो रही है। खासकर जनजातीय क्षेत्रों के खिलाड़ी इससे काफी लाभान्वित हो रहे हैं। उनकी प्राकृतिक प्रतिभा को अब सही मार्गदर्शन और प्रशिक्षण के जरिए निखारा जा रहा है।”

लकड़ा का मानना है कि यह संरचित सहयोग एक सकारात्मक श्रृंखला बना रहा है। उन्होंने कहा, “जब बच्चे यहां आकर सीखते हैं और अच्छा प्रदर्शन करते हैं, तो वे दूसरों को प्रेरित करते हैं। इससे लगातार नए खिलाड़ी सामने आ रहे हैं।” जो क्षेत्र कभी सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों और नक्सलवाद से प्रभावित थे, वहां अब खेल के माध्यम से एक शांत बदलाव देखने को मिल रहा है। हॉकी एक सेतु बनकर इन समुदायों को मुख्यधारा से जोड़ रही है। खेल मंत्रालय का ‘अस्मिता’ कार्यक्रम अधिक से अधिक महिला खिलाड़ियों को जोड़कर उन्हें मुख्यधारा में ला रहा है।

1984 लॉस एंजेलिस ओलंपिक में भारतीय टीम का हिस्सा रहे पूर्व ओलंपियन मनोहर टोपनो, जिन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की पुरुष टीमों को कोचिंग दी है, ने खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स जैसी पहल के जमीनी प्रभाव को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, “मैं इस ग्रासरूट टूर्नामेंट के आयोजन के लिए साई का धन्यवाद करना चाहता हूं। हमारे समुदायों के लड़के और लड़कियां आगे बढ़ रहे हैं और खुद को नई पहचान दे रहे हैं। अगर हम ऐसे ही आगे बढ़ते रहे, तो एक दिन ये खिलाड़ी भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे।”

टोपनो ने प्रतिभा के पीछे की एक अहम सच्चाई पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा, “हमारे जनजातीय समुदायों में हॉकी स्वाभाविक रूप से खेली जाती है। अगर हम इन क्षेत्रों पर ध्यान दें, तो हमारे खिलाड़ी आगे बढ़ेंगे और देश का नाम रोशन करेंगे।” एक और महत्वपूर्ण बदलाव खेल विज्ञान, फिजियोथेरेपी और वीडियो विश्लेषण जैसी सुविधाओं का पहुंचना है, जो पहले केवल शीर्ष स्तर तक सीमित थीं। अब दूरदराज के क्षेत्रों के खिलाड़ी भी पेशेवर प्रशिक्षण वातावरण का लाभ उठा रहे हैं। पारंपरिक स्वाभाविक खेल और आधुनिक कोचिंग का यह मेल प्रदर्शन के नए स्तर खोल रहा है।

झारखंड की पूर्व खिलाड़ी और हॉकी इंडिया की सदस्य असृता लकड़ा ने कहा, “इन क्षेत्रों के बच्चों के खून में हॉकी बसती है, इसलिए वे स्वाभाविक रूप से इस खेल की ओर आकर्षित होते हैं। खेलो इंडिया जैसे प्लेटफॉर्म ने उन्हें दिशा दी है।”उन्होंने आगे कहा, “बेहतर सुविधाओं, प्रशिक्षण और एक्सपोजर के कारण अब खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच रहे हैं। उनका मनोबल बढ़ा है और प्रदर्शन में स्पष्ट सुधार दिख रहा है।”

अब इसका प्रभाव केवल कहानियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि नतीजों, प्रतिनिधित्व और बढ़ती महत्वाकांक्षा में साफ दिखाई दे रहा है। जनजातीय खिलाड़ी अब सिर्फ भाग लेने वाले नहीं, बल्कि दावेदार, चैंपियन और भविष्य के अंतरराष्ट्रीय सितारे बन रहे हैं।

रायपुर में ओडिशा का यह स्वर्णिम प्रदर्शन एक बड़े आंदोलन का प्रतीक है—जहां गांव उत्कृष्टता के केंद्र बन रहे हैं और हॉकी एक पूरी पीढ़ी के सपनों को नई दिशा दे रही है। बस्तर के धूल भरे मैदानों से लेकर रायपुर के भरे स्टेडियम तक, इन खिलाड़ियों की यात्रा न केवल भारतीय हॉकी, बल्कि जनजातीय भारत के सामाजिक ताने-बाने को भी बदल रही है।

जग्गी हत्याकांड: सरेंडर आदेश पर अमित जोगी का बड़ा बयान—“मेरे साथ गंभीर अन्याय हुआ है”


बिलासपुर। 
TODAY छत्तीसगढ़  /  बहुचर्चित जग्गी हत्याकांड में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट द्वारा दिए गए सरेंडर के आदेश के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। गुरुवार 2 अप्रैल को चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की डिवीजन बेंच ने अमित जोगी को तीन सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है।

हाई कोर्ट के इस फैसले के तुरंत बाद जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जेसीसीजे) के अध्यक्ष अमित जोगी ने सोशल मीडिया के जरिए अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने उच्च न्यायालय के आदेश को अपने साथ “गंभीर अन्याय” बताया है। न्यायालय के आदेश के तुरंत बाद सोशल मीडिया X पर अमित जोगी ने लिखा- 

प्रिय मित्रों और शुभचिंतकों 🙏

आज माननीय उच्च न्यायालय ने मेरे विरुद्ध CBI की अपील को मात्र 40 मिनट में स्वीकार कर लिया- बिना सुनवाई का अवसर दिए। 

मुझे खेद है कि जिस व्यक्ति को अदालत ने दोषमुक्त किया था, उसे बिना सुनवाई का एक भी अवसर दिए दोषी करार दिया गया। यह अप्रत्याशित है। अदालत ने मुझे 3 सप्ताह के अंदर सरेंडर करने का समय दिया है।

मुझे लगता है कि मेरे साथ गंभीर अन्याय हुआ है। मुझे पूरा विश्वास है कि सर्वोच्च न्यायालय से मुझे न्याय अवश्य मिलेगा। 

मैं न्याय व्यवस्था पर पूरा विश्वास रखता हूँ। मैं पूर्ण शांति, आस्था और धैर्य के साथ आगे बढ़ रहा हूँ। सत्य की जीत अवश्य होगी।

आप सभी से आग्रह है कि मेरे लिए प्रार्थना करें और अपना आशीर्वाद बनाए रखें।

जय छत्तीसगढ़ 🙏  

इसे भी पढ़ें - हाई कोर्ट:  जग्गी हत्याकांड में 23 साल बाद पलटा फैसला, अमित जोगी को सरेंडर का आदेश

गौरतलब है कि हाई कोर्ट ने हाल ही में सीबीआई की अपील स्वीकार करते हुए पूर्व के आदेश को पलट दिया और अमित जोगी को तीन सप्ताह के भीतर सरेंडर करने का निर्देश दिया है। इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक गलियारों में भी हलचल बढ़ गई है। जहां एक ओर विपक्ष इस मामले को लेकर सवाल उठा सकता है, वहीं जोगी समर्थक इसे राजनीतिक और कानूनी लड़ाई का हिस्सा बता रहे हैं। फिलहाल सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि अमित जोगी आगे क्या कानूनी कदम उठाते हैं और इस मामले में अगला घटनाक्रम क्या होता है।

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