रायपुर। TODAY छत्तीसगढ़ / छत्तीसगढ़ विधानसभा के पावस सत्र में सोमवार को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने पद्म विभूषण और विश्वविख्यात पंडवानी गायिका डॉ. तीजन बाई के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके निधन से छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति को अपूरणीय क्षति पहुंची है।
मुख्यमंत्री ने सदन में कहा कि डॉ. तीजन बाई ने पंडवानी गायन की कापालिक शैली को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया और अपनी असाधारण प्रतिभा के बल पर छत्तीसगढ़ की लोककला को राष्ट्रीय ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय पहचान भी दिलाई। उन्होंने कहा कि तीजन बाई की प्रस्तुतियों में गायन और अभिनय का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता था, जो श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर देता था।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि डॉ. तीजन बाई का जीवन संघर्ष, साधना और समर्पण का प्रेरक उदाहरण है। जिस समय महिलाओं की पंडवानी गायन में भागीदारी बेहद सीमित थी, उस दौर में उन्होंने सामाजिक रूढ़ियों को चुनौती देकर अपनी अलग पहचान बनाई और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनीं।
उन्होंने कहा कि तीजन बाई ने एशिया, यूरोप सहित दुनिया के कई देशों में अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक मंच तक पहुंचाया। उनके योगदान के लिए उन्हें पद्मश्री, पद्मभूषण, संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार सहित अनेक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से सम्मानित किया गया। वर्ष 2019 में उन्हें देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया, यह सम्मान पाने वाली वे छत्तीसगढ़ की पहली और एकमात्र विभूति थीं।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा केंद्रीय मंत्रियों ने भी उनके कला योगदान को याद करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की है। उन्होंने उल्लेख किया कि राज्योत्सव के दौरान रायपुर प्रवास पर आए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डॉ. तीजन बाई के परिजनों से दूरभाष पर बातचीत कर उनका हालचाल भी जाना था।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कई विश्वविद्यालयों ने डॉ. तीजन बाई को डी.लिट. की मानद उपाधि से सम्मानित किया था। भारतीय लोकसंगीत और लोकसंस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन में उनका योगदान सदैव याद रखा जाएगा। सदन की ओर से श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए मुख्यमंत्री ने दिवंगत आत्मा की शांति तथा शोक संतप्त परिजनों को संबल प्रदान करने की प्रार्थना की।

