रायपुर। TODAY छत्तीसगढ़ / छत्तीसगढ़ सरकार ने 'द्वीप्ति (DWEEPTI)' योजना के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को सौर ऊर्जा क्षेत्र से जोड़ने की पहल शुरू की है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अनुसार, इस योजना के तहत महिला स्व-सहायता समूहों को लाभार्थी के बजाय सौर ऊर्जा क्षेत्र में विक्रेता, तकनीशियन, उद्यमी और सेवा प्रदाता के रूप में विकसित किया जा रहा है।
विभाग का दावा है कि छत्तीसगढ़ महिला नेतृत्व वाली विकेंद्रीकृत अक्षय ऊर्जा नीति अपनाने वाला देश का पहला राज्य है। योजना के तहत अगले पांच वर्षों में 5,000 महिला ऊर्जा उद्यम, 50,000 हरित रोजगार तथा पांच लाख परिवारों और 10 हजार संस्थानों तक स्वच्छ ऊर्जा पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
विभाग के अनुसार, छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (सीएसपीडीसीएल) और जिला प्रशासन के सहयोग से 12 जिलों के 13 क्लस्टर स्तरीय महासंघों को प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के अधिकृत सोलर विक्रेता के रूप में पंजीकृत किया गया है। महिलाओं को सौर संयंत्रों की स्थापना, संचालन और रखरखाव का प्रशिक्षण देकर 'सोलर दीदी' के रूप में तैयार किया जा रहा है।
प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, स्व-सहायता समूहों से जुड़े परिवारों को आसान किस्तों पर ऋण सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे महिलाओं को स्वरोजगार और टिकाऊ व्यवसाय विकसित करने का अवसर मिल सके।
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव भीम सिंह ने कहा कि यह योजना महिलाओं को अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में तकनीशियन, प्रबंधक और उद्यमी के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।
विभाग के अनुसार, कबीरधाम जिले में योजना का क्रियान्वयन शुरू हो चुका है। यहां लगभग 35 महिलाओं को 'सोलर दीदी' के रूप में प्रशिक्षित किया गया है और रूफटॉप सोलर सिस्टम के 40 से अधिक ऑर्डर प्राप्त हुए हैं। पहला रूफटॉप सोलर संयंत्र समनापुर गांव में स्थापित किया गया है।
राज्य सरकार का कहना है कि आने वाले समय में इस मॉडल का विस्तार अन्य जिलों में भी किया जाएगा, ताकि महिला नेतृत्व वाले सौर ऊर्जा उद्यमों को बढ़ावा मिल सके।
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