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अनुपयोगी भूमि पर उगी समृद्धि, राष्ट्रीय पहचान बना धमतरी मॉडल

औषधीय खेती से आत्मनिर्भर बन रहीं महिलाएं, 500 एकड़ विस्तार की तैयारी

रायपुर।  TODAY छत्तीसगढ़  / छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में औषधीय एवं सुगंधीय पौधों की खेती का मॉडल महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण आजीविका का सफल उदाहरण बनकर उभरा है। राज्य औषधीय पादप बोर्ड, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) और जिला प्रशासन के संयुक्त प्रयास से शुरू की गई इस पहल ने अनुपयोगी भूमि को आय के स्रोत में बदल दिया है। अब सरकार इस मॉडल का विस्तार 150 एकड़ से बढ़ाकर 500 एकड़ तक करने की तैयारी में है।

राज्य सरकार के अनुसार, महिलाओं को सिंदूरी, सतावर, अश्वगंधा, खस, ब्राह्मी, बच, लेमनग्रास, पामारोजा और पचौली जैसे औषधीय पौधों की निःशुल्क पौध सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। इसके साथ ही प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और उत्पाद की शत-प्रतिशत खरीद (बाय-बैक) की व्यवस्था भी की गई है, जिससे किसानों और महिला स्व-सहायता समूहों को विपणन की चिंता नहीं रहती।

वर्ष 2025 में कलेक्टर अबिनाश मिश्रा के मार्गदर्शन में शुरू हुई इस पहल के पहले चरण में करीब 150 एकड़ क्षेत्र में 200 महिला स्व-सहायता समूह की सदस्याओं को जोड़ा गया। सरकार का दावा है कि कई क्षेत्रों में औषधीय खेती से प्रति एकड़ करीब एक लाख रुपये तक की आय प्राप्त होने लगी है, जिससे महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है।

महिला समूहों से जुड़ी सदस्याओं का कहना है कि इस योजना ने उनकी आय बढ़ाने के साथ-साथ उन्हें बैंकिंग, समूह प्रबंधन और उद्यमिता से भी जोड़ा है। वहीं कई किसान अब पारंपरिक धान की खेती के साथ औषधीय फसलों को भी अपनाने लगे हैं।

सरकार का कहना है कि यह पहल केवल खेती तक सीमित नहीं है, बल्कि औषधीय पौधों की नर्सरी, प्रसंस्करण (प्रोसेसिंग), आवश्यक तेल निष्कर्षण, पैकेजिंग और मूल्य संवर्धन की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस मॉडल को महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया है। उनके अनुसार, औषधीय खेती का विस्तार राज्य में 'लखपति दीदी' अभियान को गति देने के साथ स्थानीय संसाधनों पर आधारित आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था विकसित करने में भी मददगार होगा।

धमतरी के इस मॉडल को वर्ष 2025 में नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में औषधीय एवं सुगंधीय पौधों के कृषिकरण के लिए राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित भी किया गया था। अब राज्य सरकार का लक्ष्य इस मॉडल का विस्तार कर 500 से अधिक महिलाओं को इससे जोड़ना और औषधीय खेती को प्रदेश में बड़े स्तर पर बढ़ावा देना है।


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