बिलासपुर। TODAY छत्तीसगढ़ / छत्तीसगढ़ राज्य प्रशासनिक सेवा संघ की जिला इकाई, बिलासपुर ने संभागायुक्त सुनील जैन को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर सर्पदंश जनित मृत्यु के राहत प्रकरणों में राजस्व न्यायालयों के पीठासीन अधिकारियों को आपराधिक जांच में शामिल किए जाने पर चिंता व्यक्त की है।
संघ की ओर से अपर कलेक्टर शिवकुमार बनर्जी के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया है कि यदि किसी प्रकरण में मिथ्या शपथपत्र, जाली हस्ताक्षर, फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट, कूटरचित दस्तावेज अथवा अन्य असत्य अभिलेखों के आधार पर न्यायालय से आदेश प्राप्त किए गए हैं, तो कार्रवाई उन व्यक्तियों के विरुद्ध होनी चाहिए जिन्होंने ऐसे दस्तावेज तैयार किए, प्रमाणित किए या न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए, न कि उन राजस्व अधिकारियों के विरुद्ध जिन्होंने उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर वैधानिक आदेश पारित किए।
ज्ञापन में कहा गया है कि प्राकृतिक आपदा राहत संबंधी मामलों में राजस्व न्यायालय पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और अन्य सक्षम प्राधिकारियों द्वारा जारी प्रमाणित दस्तावेजों के आधार पर निर्णय लेते हैं। ऐसे में यदि बाद में दस्तावेज फर्जी पाए जाते हैं तो उनकी जवाबदेही संबंधित दस्तावेज तैयार करने या प्रस्तुत करने वाले व्यक्तियों की होनी चाहिए।
संघ ने मांग की है कि सर्पदंश राहत प्रकरणों में न्यायालय को कथित रूप से गुमराह करने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता, 2023 की संबंधित धाराओं के तहत प्रभावी जांच और अभियोजन सुनिश्चित किया जाए तथा ऐसे मामलों को केवल सामान्य धोखाधड़ी नहीं, बल्कि "Fraud upon the Court" (न्यायालय से छल) के रूप में देखा जाए।
ज्ञापन में यह भी आग्रह किया गया है कि न्यायाधीश (संरक्षण) अधिनियम, 1985 तथा राज्य शासन के 14 अक्टूबर 2024 के दिशा-निर्देशों का पालन सुनिश्चित किया जाए, जिनके तहत राजस्व न्यायालयों के पीठासीन अधिकारियों को विधिक संरक्षण प्राप्त है। संघ का कहना है कि केवल न्यायिक आदेश पारित करने के आधार पर, बिना प्रत्यक्ष और ठोस साक्ष्य के, अधिकारियों पर आपराधिक उत्तरदायित्व निर्धारित नहीं किया जाना चाहिए।
संघ ने राज्य शासन से यह भी मांग की है कि प्राकृतिक आपदा राहत प्रकरणों की जांच के दौरान पुलिस अधिकारियों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं तथा पुलिस, स्वास्थ्य और राजस्व विभाग के बीच समन्वित स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) तैयार कर लागू किया जाए, ताकि राहत योजनाओं के दुरुपयोग पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।
ज्ञापन सौंपने के दौरान अपर कलेक्टर डॉ. ज्योति पटेल, एसडीएम मनीष साहू, प्रवेश पैकरा, शिवकुमार कंवर, नितिन तिवारी, डिप्टी कलेक्टर गबेल सहित प्रशासनिक सेवा संघ के पदाधिकारी और सदस्य उपस्थित रहे।

