TODAY छत्तीसगढ़ / छत्तीसगढ़ के रायगढ़ ज़िले की पुलिस ने मादक पदार्थों की तस्करी के ख़िलाफ़ चलाए जा रहे 'ऑपरेशन आघात' के तहत एक बड़ी कार्रवाई की है. पुलिस ने 52 किलो गांजा तस्करी के एक मामले में 'एंड-टू-एंड' (शुरुआत से अंत तक) जांच करते हुए मुख्य महिला सप्लायर को ओडिशा से गिरफ़्तार किया है.
अधिकारियों के मुताबिक़, पकड़ी गई 41 वर्षीय महिला का नाम सुभद्रा उर्फ़ मामी मलिक है, जो ओडिशा के कंधमाल ज़िले की रहने वाली है. उसे अदालत में पेश करने के बाद न्यायिक हिरासत (रिमांड) में भेज दिया गया है.
क्या है पूरा मामला?
यह गिरफ़्तारी इस साल अप्रैल में पकड़े गए एक बड़े गांजा तस्करी मामले की जांच का नतीजा है. ग़ौरतलब है कि 22 अप्रैल को खरसिया थाना पुलिस ने रेलवे कॉलोनी इलाक़े से तीन संदिग्ध युवकों को गिरफ़्तार किया था. पुलिस जांच से बचने के लिए वे ट्रेन से उतरकर भागने की कोशिश कर रहे थे. उस वक़्त तलाशी के दौरान उनके बैग से 52 किलोग्राम गांजा बरामद हुआ था, जिसकी क़ीमत क़रीब 25.62 लाख रुपये आंकी गई थी. पकड़े गए तीनों युवक भी ओडिशा के ही रहने वाले थे.
पूछताछ में खुला 'सप्लायर' का राज़
पुलिस का कहना है कि जब उन तीनों तस्करों से सख़्ती से पूछताछ की गई, तो उन्होंने बताया कि यह गांजा उन्हें संबलपुर रेलवे स्टेशन के पास एक महिला (मामी मलिक) ने दिया था. इस खेप को मध्य प्रदेश के बीना तक पहुंचाया जाना था.
युवकों द्वारा दिए गए मोबाइल नंबर और तकनीकी साक्ष्यों (टेक्निकल सर्विलांस) की जांच से पुलिस ने मुख्य महिला सप्लायर की पहचान की. इसके बाद खरसिया पुलिस की एक विशेष टीम ने ओडिशा के गोच्छापाड़ा इलाक़े में स्थानीय पुलिस की मदद से दबिश दी और आरोपी महिला को हिरासत में ले लिया. पूछताछ में महिला ने गांजा सप्लाई करने की बात कथित तौर पर स्वीकार कर ली है.
'ऑपरेशन आघात': पूरे नेटवर्क पर प्रहार
रायगढ़ पुलिस इन दिनों नशे के कारोबार को जड़ से ख़त्म करने के लिए 'ऑपरेशन आघात' चला रही है. वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) शशि मोहन सिंह ने इस कार्रवाई पर कहा कि पुलिस अब सिर्फ़ माल ढोने वाले तस्करों तक सीमित नहीं है, बल्कि 'एंड-टू-एंड' जांच के ज़रिए सप्लायर, ट्रांसपोर्टर और पैसे का लेन-देन करने वाले पूरे नेटवर्क को खंगाल रही है. उन्होंने साफ़ किया कि नशे के कारोबारियों के लिए रायगढ़ को सुरक्षित ठिकाना नहीं बनने दिया जाएगा और पूरे गिरोह पर कठोर कार्रवाई की जाएगी.
