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"मुफ़्त बिजली पोल" के लिए मांग रहे थे ₹10,000 घूस... बिजली दफ़्तर के बाबू का खेल ख़त्म

अफ़सरशाही पर एसीबी का प्रहार: एक ही दिन में दो अलग-अलग विभागों के कर्मचारी रंगे हाथों धराए


TODAY छत्तीसगढ़  /  छत्तीसगढ़ के बिलासपुर ज़िले में भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ कार्रवाई करते हुए 'एंटी करप्शन ब्यूरो' (ACB) की टीम ने गुरुवार (25 जून) को दो अलग-अलग मामलों में राजस्व और विद्युत विभाग के कर्मचारियों को कथित तौर पर रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ़्तार किया है.

एसीबी की टीमों ने रतनपुर तहसील में एक पटवारी को 25,000 रुपये और मस्तूरी में बिजली विभाग के एक क्लर्क (बाबू) को 10,000 रुपये की घूस लेते पकड़ा.

पहली कार्रवाई: नक्शा बटांकन के लिए मांगे थे पैसे

एसीबी कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, पहली कार्रवाई रतनपुर तहसील के लालपुर हल्का में की गई.

  • शिकायतकर्ता: लालपुर निवासी अशोक अग्रवाल ने एसीबी में शिकायत दर्ज कराई थी कि उन्होंने अपनी ज़मीन के नक्शा बटांकन (ज़मीन के विभाजन के दस्तावेज़) के लिए लगभग एक साल पहले तहसीलदार रतनपुर के समक्ष आवेदन दिया था.

  • आरोप: तहसीलदार के निर्देश पर यह फ़ाइल संबंधित पटवारी भानु चंद्राकर के पास पहुंची. आरोप है कि पटवारी ने इस काम को आगे बढ़ाने के एवज में 40,000 रुपये रिश्वत की मांग की.

तहसील कार्यालय में ट्रैप शिकायत के सत्यापन (वेरिफिकेशन) के दौरान दोनों पक्षों में बातचीत हुई और पटवारी अंततः 25,000 रुपये लेने पर सहमत हो गया. गुरुवार को आरोपी ने शिकायतकर्ता को पैसे लेकर तहसील कार्यालय रतनपुर बुलाया था. जैसे ही पटवारी भानु चंद्राकर ने रिश्वत की रकम हाथ में ली, वहाँ पहले से तैयार एसीबी की टीम ने उसे हिरासत में ले लिया. केमिकल टेस्ट के बाद आरोपी के पास से घूस की पूरी रकम बरामद कर ली गई.

दूसरी कार्रवाई: मुफ़्त बिजली पोल योजना के नाम पर वसूली

एसीबी की दूसरी कार्रवाई मस्तूरी स्थित 'छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रिब्यूशन कंपनी लिमिटेड' (CSPDCL) के कार्यालय में हुई.

  • शिकायतकर्ता: ग्राम पाराघाट निवासी त्रिलोकी साहू ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उन्होंने अपनी एक एकड़ कृषि भूमि में सरकारी योजना के तहत 'निःशुल्क विद्युत पोल' लगाने के लिए आवेदन किया था.

  • आरोप: कार्यालय में पदस्थ बाबू सहदेव कुमार चंद्रा ने इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने और पोल स्वीकृत कराने के नाम पर 10,000 रुपये रिश्वत की मांग की थी.

कार्यालय में ही हुई गिरफ़्तारी एसीबी की टीम ने शिकायत की प्रारंभिक पुष्टि होने के बाद जाल (Trap) बिछाया. गुरुवार को जैसे ही शिकायतकर्ता ने मस्तूरी कार्यालय पहुंचकर बाबू सहदेव कुमार चंद्रा को 10,000 रुपये सौंपे, टीम ने उसे मौक़े पर ही दबोच लिया.

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज

एसीबी के डीएसपी अजितेश सिंह के मार्गदर्शन में हुई इन दोनों कार्रवाइयों के बाद पुलिस ने दोनों आरोपियों के ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (Prevention of Corruption Act) की धारा 7 के तहत आपराधिक मामला दर्ज कर लिया है.

एसीबी की नागरिकों से अपील एसीबी प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि यदि कोई भी शासकीय कर्मचारी या अधिकारी किसी भी वैध सरकारी कार्य के बदले या योजना का लाभ देने के लिए रिश्वत या किसी अन्य अनुचित लाभ की मांग करता है, तो उसकी शिकायत तत्काल एंटी करप्शन ब्यूरो के कार्यालय या हेल्पलाइन नंबर पर दर्ज कराएं. ऐसे तत्वों के ख़िलाफ़ सख़्त वैधानिक कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी.

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