छत्तीसगढ़ को जल्द मिलेगा नया वन बल प्रमुख, अरुण पाण्डेय सबसे मजबूत दावेदार

रायपुर। TODAY छत्तीसगढ़  /  छत्तीसगढ़ में नए वन बल प्रमुख की नियुक्ति को लेकर प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। सोमवार को मंत्रालय में प्रधान मुख्य वन संरक्षक (PCCF) एवं वन बल प्रमुख के चयन के लिए विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) की अहम बैठक आयोजित की गई। बैठक के बाद पीसीसीएफ (वाइल्ड लाइफ) अरुण पाण्डेय का नाम सबसे मजबूत दावेदार के रूप में सामने आने की चर्चा है।

जानकारी के अनुसार वर्तमान वन बल प्रमुख वी श्रीनिवास राव 31 मई को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। उनके रिटायरमेंट के बाद नए वन प्रमुख की नियुक्ति के लिए मंत्रालय में डीपीसी बैठक बुलाई गई थी। सूत्रों के मुताबिक बैठक में मुख्य सचिव विकास शील, अपर मुख्य सचिव मनोज पिंगुआ तथाकेंद्र सरकार के प्रतिनिधि के तौर पर मध्यप्रदेश के वन बल प्रमुख शुभरंजन सेन शामिल हुए।

बैठक में पीसीसीएफ अनिल साहू, कौशलेन्द्र कुमार और अरुण पांडेय के नामों पर चर्चा हुई। सूत्रों के अनुसार डीपीसी के बाद अरुण पाण्डेय और कौशलेंद्र कुमार के नाम का पैनल तैयार किया गया है। प्रशासनिक गलियारों में चर्चा है कि लंबे कार्यकाल और प्रशासनिक अनुभव को देखते हुए अरुण पाण्डेय का पलड़ा भारी माना जा रहा है। हालांकि अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय लेंगे।

केवल वरिष्ठता नहीं, अनुभव भी अहम

वन विभाग में इस बार नियुक्ति के लिए केवल वरिष्ठता को आधार नहीं माना जा रहा है। वर्तमान वन प्रमुख वी. श्रीनिवास राव के साथ 1989 बैच के पीसीसीएफ तपेश झा भी 31 मई को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। वरिष्ठता क्रम में अनिल साहू आगे बताए जा रहे हैं, लेकिन उनका कार्यकाल जुलाई तक ही शेष है। ऐसे में लंबे कार्यकाल और विभागीय अनुभव को देखते हुए अरुण पाण्डेय के नाम पर सहमति बनने की संभावना जताई जा रही है।

विभाग में बड़े फेरबदल के संकेत

सूत्रों की मानें तो नए वन बल प्रमुख की नियुक्ति के साथ ही वन विभाग में बड़े प्रशासनिक बदलाव भी हो सकते हैं। एपीसीएफ ओपी यादव भी जल्द सेवानिवृत्त होने वाले हैं। ऐसे में पीसीसीएफ और एपीसीएफ स्तर के कई अधिकारियों के प्रभार और जिम्मेदारियों में बदलाव की संभावना जताई जा रही है। 

अघोषित बिजली कटौती पर कांग्रेस का हल्लाबोल, तिफरा कार्यालय के बाहर धरना


बिलासपुर।
 TODAY छत्तीसगढ़  /  जिले में लगातार हो रही अघोषित बिजली कटौती के विरोध में सोमवार को कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने तिफरा स्थित छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (CSPDCL) कार्यालय का घेराव कर जोरदार प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में पहुंचे कांग्रेस पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने बिजली विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान माहौल उस समय गरमा गया जब कुछ कार्यकर्ता कार्यालय परिसर में घुसने के लिए बाउंड्री वॉल पर चढ़ गए। स्थिति बिगड़ती देख विभाग को मुख्य गेट खोलना पड़ा, जिसके बाद प्रदर्शनकारी मुख्य द्वार तक पहुंच गए।

गेट खुलने के बाद कांग्रेस कार्यकर्ता नौतपा की भीषण गर्मी के बीच कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए और बिजली विभाग के खिलाफ नारेबाजी करते रहे। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक लगातार हो रही अघोषित बिजली कटौती से आम लोग परेशान हैं।

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि बार-बार बिजली बंद होने से पेयजल संकट गहराने लगा है। वहीं भीषण गर्मी में घरों, दुकानों और छोटे कारोबारों पर भी इसका सीधा असर पड़ रहा है। उनका कहना था कि नौतपा शुरू होते ही तापमान लगातार बढ़ रहा है और ऐसे समय में घंटों बिजली गुल रहने से लोगों की मुश्किलें कई गुना बढ़ गई हैं। नेताओं ने सवाल उठाया कि हर साल गर्मी और बारिश से पहले बिजली व्यवस्था के रखरखाव और सुधार के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं। ठेकेदारों को भुगतान भी किया जाता है, इसके बावजूद व्यवस्था में सुधार क्यों नहीं दिखाई देता।

प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने अघोषित बिजली कटौती तत्काल बंद करने, जर्जर विद्युत ढांचे में सुधार करने और उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की। साथ ही चेतावनी दी कि यदि जल्द सुधार नहीं हुआ तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।  


‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर करोड़ों की साइबर ठगी, महाराष्ट्र से दो आरोपी गिरफ्तार

बिलासपुर। TODAY छत्तीसगढ़  /  छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में साइबर पुलिस ने कथित “डिजिटल अरेस्ट” साइबर ठगी मामले में महाराष्ट्र से दो लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार आरोपियों ने अपने बैंक खाते साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराए थे, जिनका इस्तेमाल करोड़ों रुपये की ऑनलाइन ठगी में किया जा रहा था। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मोहम्मद नेमतउल्लाह मंसूरी और उसके पिताअब्दुल कयूम अंसारी के रूप में हुई है। दोनों महाराष्ट्र के भंडारा जिले के रहने वाले बताए गए हैं।

पुलिस के मुताबिक इस मामले में एक वरिष्ठ नागरिक महिला को व्हाट्सएप मैसेज और वीडियो कॉल के जरिए संपर्क किया गया था। आरोपियों ने खुद को जांच एजेंसियों से जुड़ा अधिकारी बताते हुए महिला को यह कहकर डराया कि उनका नाम किसी आतंकवादी संगठन से जुड़ा है और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

पुलिस का कहना है कि महिला को लगातार मानसिक दबाव और भय में रखकर तथाकथित “डिजिटल अरेस्ट” किया गया। इसके बाद गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर विभिन्न बैंक खातों में कुल ₹1 करोड़ 4 लाख 80 हजार जमा करा लिए गए। जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि ICICI Bank के एक खाते में साइबर ठगी से जुड़ी ₹54.40 लाख की राशि ट्रांसफर हुई थी। तकनीकी विश्लेषण के बाद साइबर पुलिस की टीम महाराष्ट्र पहुंची और आरोपी नेमतउल्लाह मंसूरी को हिरासत में लिया।

पूछताछ में आरोपी ने कथित तौर पर स्वीकार किया कि उसने दो प्रतिशत कमीशन के लालच में अपना बैंक खाता अन्य साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराया था। पुलिस के अनुसार इन खातों का इस्तेमाल शेयर ट्रेडिंग फ्रॉड, ऑनलाइन फ्रॉड और डिजिटल अरेस्ट जैसे साइबर अपराधों में किया जा रहा था। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी नेपाल के काठमांडू जाकर अपना बैंक खाता अन्य आरोपियों को उपलब्ध कराता था। पुलिस का दावा है कि आरोपी का पिता भी इस नेटवर्क में शामिल था और मुख्य आरोपियों के संपर्क में रहता था। 

साइबर अपराधियों को सप्लाई होते थे म्यूल अकाउंट, पकड़ा गया मास्टरमाइंड

रायपुर। TODAY छत्तीसगढ़  /  छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में पुलिस ने साइबर और आर्थिक अपराधों में इस्तेमाल होने वाले कथित “म्यूल अकाउंट” नेटवर्क का खुलासा करने का दावा किया है। पुलिस के अनुसार इस नेटवर्क का संचालन करने वाले कथित मास्टरमाइंड समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

दुर्ग पुलिस का कहना है कि आरोपी वर्ष 2022 से विभिन्न बैंकों में खाते खुलवाकर उन्हें साइबर अपराधियों और आर्थिक अपराध में शामिल लोगों को बेच रहे थे। गिरफ्तार मुख्य आरोपी की पहचान मनोज कुमार भुतड़ा के रूप में हुई है। उसके साथ केवल सेठिया, सत्यनारायण सेठिया को भी गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के मुताबिक आरोपियों ने इंडसइंड बैंक, आईडीएफसी बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक समेत कई बैंकों में 200 से अधिक खाते खुलवाए थे। इन खातों में करोड़ों रुपये के लेन-देन की जानकारी सामने आई है। 

कैसे चलता था नेटवर्क

पुलिस के अनुसार साधारण बैंक खाते 15 से 20 हजार रुपये और करंट अकाउंट 40 से 50 हजार रुपये में कथित तौर पर बेचे जाते थे। आरोप है कि आरोपी खाता खुलवाने के लिए न्यूनतम बैलेंस की रकम खुद जमा कराते थे और बाद में उसे वापस निकाल लेते थे। जांच में यह भी सामने आया कि बड़े ट्रांजेक्शन वाले खातों को पहले बैंक में होल्ड कराया जाता था और बाद में बैंक से संपर्क कर होल्ड हटवाकर रकम निकाल ली जाती थी। पुलिस का कहना है कि इस नेटवर्क के तार बालोद, गुण्डरदेही, दुर्ग, जगदलपुर, रायपुर, गाजियाबाद और सूरत जैसे शहरों से जुड़े हो सकते हैं।

ऐसे हुई गिरफ्तारी

पुलिस को सूचना मिली थी कि जगदलपुर का रहने वाला मनोज कुमार भुतड़ा अपने साथियों के साथ भिलाई आया हुआ है। इसके बाद सुपेला थाना और एसीसीयू टीम ने सुपेला ओवरब्रिज के पास घेराबंदी कर आरोपियों को पकड़ लिया। गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने 11 पासबुक, 7 एटीएम कार्ड, 3 फिनो पेमेंट किट, 3 आधार कार्ड और एक पैन कार्ड बरामद किया।

मामले में थाना सुपेला में अपराध क्रमांक 718/2026 के तहत धारा 317(2) और 318(4) बीएनएस के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि पूछताछ के आधार पर अन्य आरोपियों की तलाश में अलग-अलग टीमें रवाना की गई हैं। 


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