बिलासपुर। TODAY छत्तीसगढ़ / छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में साइबर पुलिस ने कथित “डिजिटल अरेस्ट” साइबर ठगी मामले में महाराष्ट्र से दो लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार आरोपियों ने अपने बैंक खाते साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराए थे, जिनका इस्तेमाल करोड़ों रुपये की ऑनलाइन ठगी में किया जा रहा था। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मोहम्मद नेमतउल्लाह मंसूरी और उसके पिताअब्दुल कयूम अंसारी के रूप में हुई है। दोनों महाराष्ट्र के भंडारा जिले के रहने वाले बताए गए हैं।
पुलिस के मुताबिक इस मामले में एक वरिष्ठ नागरिक महिला को व्हाट्सएप मैसेज और वीडियो कॉल के जरिए संपर्क किया गया था। आरोपियों ने खुद को जांच एजेंसियों से जुड़ा अधिकारी बताते हुए महिला को यह कहकर डराया कि उनका नाम किसी आतंकवादी संगठन से जुड़ा है और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
पुलिस का कहना है कि महिला को लगातार मानसिक दबाव और भय में रखकर तथाकथित “डिजिटल अरेस्ट” किया गया। इसके बाद गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर विभिन्न बैंक खातों में कुल ₹1 करोड़ 4 लाख 80 हजार जमा करा लिए गए। जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि ICICI Bank के एक खाते में साइबर ठगी से जुड़ी ₹54.40 लाख की राशि ट्रांसफर हुई थी। तकनीकी विश्लेषण के बाद साइबर पुलिस की टीम महाराष्ट्र पहुंची और आरोपी नेमतउल्लाह मंसूरी को हिरासत में लिया।
पूछताछ में आरोपी ने कथित तौर पर स्वीकार किया कि उसने दो प्रतिशत कमीशन के लालच में अपना बैंक खाता अन्य साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराया था। पुलिस के अनुसार इन खातों का इस्तेमाल शेयर ट्रेडिंग फ्रॉड, ऑनलाइन फ्रॉड और डिजिटल अरेस्ट जैसे साइबर अपराधों में किया जा रहा था। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी नेपाल के काठमांडू जाकर अपना बैंक खाता अन्य आरोपियों को उपलब्ध कराता था। पुलिस का दावा है कि आरोपी का पिता भी इस नेटवर्क में शामिल था और मुख्य आरोपियों के संपर्क में रहता था।
