रायगढ़। TODAY छत्तीसगढ़ / छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के लैलूंगा क्षेत्र में एक बार फिर अवैध अफीम की खेती का मामला सामने आया है। चौंकाने वाली बात यह है कि एक ही गांव में तीन अलग-अलग स्थानों पर अफीम की फसल लहलहाती हुई पाई गई है। इसके साथ ही राज्य में इस तरह के मामलों की संख्या अब पांच तक पहुंच चुकी है, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था और निगरानी तंत्र पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी के अनुसार, जिन खेतों में अफीम की खेती हो रही थी, उन्हें सरकारी रिकॉर्ड में धान के रूप में सत्यापित किया गया था। ऐसे में यह सवाल उठता है कि जब हर रकबे का भौतिक सत्यापन किया गया था, तो फिर अफीम की खेती की जानकारी अधिकारियों को कैसे नहीं मिली।
विपक्ष और स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह केवल लापरवाही नहीं बल्कि संभावित मिलीभगत का मामला भी हो सकता है। वहीं, राज्य की भाजपा सरकार पर इस मुद्दे को लेकर दबाव बढ़ता जा रहा है, क्योंकि बार-बार ऐसे मामलों का उजागर होना शासन की साख पर असर डाल रहा है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि समय रहते निगरानी और सत्यापन प्रक्रिया को पारदर्शी नहीं बनाया गया, तो अवैध खेती का यह नेटवर्क और फैल सकता है। अब देखना यह होगा कि सरकार इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों पर क्या कार्रवाई करती है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।



