देर रात आग: कपड़े की दुकान जलकर खाक, लाखों का नुकसान


बिलासपुर।  
TODAY छत्तीसगढ़  /  शहर के व्यस्ततम प्रताप चौक क्षेत्र में शनिवार देर रात लगी आग में एक कपड़े की दुकान पूरी तरह जलकर खाक हो गई। आग की लपटे इतनी तेजी से फैली कि कुछ ही देर में पूरे शोरूम को अपनी चपेट में ले लिया और अंदर रखा सारा सामान नष्ट हो गया।

जानकारी के मुताबिक, ‘साक्षी फैशन’ नाम की दुकान से देर रात धुआं उठता देखा गया। स्थानीय लोगों ने तुरंत आसपास के दुकानदारों को सतर्क किया, लेकिन आग तेजी से फैल चुकी थी और उस पर काबू पाना मुश्किल हो गया। दुकान में बड़ी मात्रा में रेडीमेड कपड़े और अन्य सामान रखा हुआ था, जिसे बाहर निकालने का मौका नहीं मिल सका। सुबह तक दुकान के अंदर रखा पूरा स्टॉक जलकर खत्म हो गया। शुरुआती अनुमान के अनुसार, इस घटना में लाखों रुपये का नुकसान हुआ है।

घटना के कारणों को लेकर अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, हालांकि शुरुआती तौर पर शॉर्ट सर्किट को आग लगने की वजह माना जा रहा है। दुकान संचालक ने किसी साजिश या रंजिश की संभावना से इनकार किया है। रात के समय लगी इस आग से पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। आसपास के दुकानदार और स्थानीय लोग देर रात तक मौके पर जुटे रहे।

Wildlife Deaths: कुत्तों के हमले के बाद संजय वन वाटिका बंद, 15 चीतलों की मौत


सरगुजा।
  TODAY छत्तीसगढ़  / छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर स्थित संजय वन वाटिका में 15 चीतलों की मौत ने सिर्फ एक हादसे का नहीं, बल्कि व्यवस्था की गहरी खामियों का सवाल खड़ा कर दिया है। जिस जगह को वन्यजीवों के संरक्षण के लिए बनाया गया था, वही अब उनकी असुरक्षा और मौत का कारण बनती दिख रही है। 

बताया जा रहा है कि 21 मार्च की रात पांच-छह आवारा कुत्ते बाड़े की कमजोर फेंसिंग का फायदा उठाकर अंदर घुस गए। इसके बाद जो हुआ, वह किसी भी संरक्षण क्षेत्र के लिए शर्मनाक है। यहां मौजूद हिरण प्रजाति के कई वन्यजीव आवारा कुत्तों के सामने बेबस, असहाय दिखे। बताया जा रहा है कि संजय पार्क में आवारा कुत्तों ने 14 चीतल और एक सांभर को मार डाला है । एक अन्य घायल चीतल ने आज सुबह दम तोड़ दिया। वन विभाग ने मरे हुए वन्यप्राणियों के शव को आनन-फानन में जला भी दिया है ताकि बड़े और गंभीर सवालों से बचा जा सके। 

सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह सिर्फ एक ‘दुर्घटना’ है, या फिर लंबे समय से चली आ रही लापरवाही का नतीजा? प्रारंभिक जानकारी से साफ है कि बाड़े की फेंसिंग इतनी कमजोर थी कि आवारा कुत्ते आसानी से भीतर पहुंच गए। अगर यही सुरक्षा व्यवस्था है, तो फिर यह ‘वाटिका’ नहीं, एक खुला खतरा क्षेत्र बन चुका है। और सवाल यहीं खत्म नहीं होते क्या रात में कोई सुरक्षा गश्त नहीं थी? क्या निगरानी की कोई व्यवस्था नहीं थी? घटना रात में हुई, लेकिन इसकी जानकारी पार्क प्रबंधन और वन विभाग को अगले दिन सुबह मिली। इसका मतलब साफ है न तो तत्काल निगरानी थी, न ही कोई अलर्ट सिस्टम। संरक्षित क्षेत्र में अगर पूरी रात हिंसक हमला चलता रहे और किसी जिम्मेदार को खबर तक न हो, तो यह सिर्फ चूक नहीं, बल्कि तंत्र की विफलता है। 

हर बड़े हादसे के बाद ‘जांच के आदेश’ एक तय प्रक्रिया बन चुके हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या जांच से आगे भी कुछ होगा? क्या किसी अधिकारी की जवाबदेही तय होगी, या यह मामला भी फाइलों में दब जाएगा? हालांकि सुरक्षा में बड़ी चूक मानते हुए ड्यूटी पर तैनात 4 कर्मचारियों को तत्काल निलंबित (Suspend) कर दिया गया है। इस मामले में अब तक किसी बड़े अफसर पर गाज नहीं गिरी है, ना ही जवाबदेही तय की गई है। 

संरक्षण या दिखावा?

संजय वन वाटिका को पर्यटकों के लिए तीन दिनों के लिए बंद कर दिया गया है। लेकिन क्या यह कदम पर्याप्त है? जब तक सुरक्षा व्यवस्था की खामियों को दूर नहीं किया जाता, निगरानी तंत्र को मजबूत नहीं किया जाता और जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं होती तब तक यह बंदी सिर्फ एक औपचारिकता भर ही रहेगी।

खल्लारी मंदिर रोपवे दुर्घटना: केबल टूटने से ट्रॉलियां गिरीं, एक की मौत, 18 से अधिक घायल


महासमुंद।
  TODAY छत्तीसगढ़  /  छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में नवरात्रि के दौरान एक बड़ा हादसा सामने आया है। खल्लारी माता मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचे श्रद्धालु उस समय दुर्घटना का शिकार हो गए, जब रोपवे का केबल टूटने से दो ट्रॉलियां नीचे गिर गईं। 

अधिकारियों के मुताबिक, इस हादसे में 18 से अधिक लोग घायल हुए हैं, जिनमें से आधा दर्जन की हालत गंभीर बताई जा रही है। इस हादसे में एक महिला की मौत की भी पुष्टि हुई है। यह घटना आज रविवार को हुई, जब नवरात्रि और छुट्टी के चलते मंदिर में श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या मौजूद थी। रायपुर से करीब 80 किलोमीटर दूर स्थित इस मंदिर में दर्शन के लिए रोपवे की सुविधा उपलब्ध है, जिसका बड़ी संख्या में लोग इस्तेमाल करते हैं। 

बताया जा रहा है कि हादसे के समय दो ट्रॉलियों में 18 से अधिक श्रद्धालु सवार थे। रोपवे करीब 200 फीट की ऊंचाई पर पहुंचा ही था कि अचानक केबल टूट गया, जिससे ट्रॉलियां नीचे गिर गईं। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया। घायलों को तत्काल नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है।

अधिकारियों का कहना है कि हादसे के कारणों की जांच की जा रही है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि यह तकनीकी खराबी थी या किसी प्रकार की लापरवाही का नतीजा। 


वंदे भारत से गांजा तस्करी करते दो युवती गिरफ्तार, बिलासपुर के तिफरा की रहने वाली निकलीं


बिलासपुर।
  TODAY छत्तीसगढ़  /  रायपुर में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) और रेलवे सुरक्षा बल (RPF) की संयुक्त कार्रवाई में दो युवतियों को गांजा तस्करी के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। अधिकारियों के मुताबिक, दोनों के पास से करीब 24 किलोग्राम गांजा बरामद हुआ है, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 4 लाख रुपये बताई जा रही है।

जांच एजेंसियों का कहना है कि उन्हें पहले से सूचना मिली थी कि दो महिलाएं विशाखापट्टनम से वंदे भारत एक्सप्रेस के जरिए रायपुर पहुंचने वाली हैं और उनके पास अवैध मादक पदार्थ हो सकता है। इसी सूचना के आधार पर टीम ने रायपुर रेलवे स्टेशन पर ट्रेन के पहुंचते ही दोनों को हिरासत में लिया। अधिकारियों के अनुसार, तलाशी के दौरान दोनों युवतियों के ट्रॉली बैग से अलग-अलग पैकेट में गांजा बरामद किया गया। इसके बाद उन्हें औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया गया।

पूछताछ में दोनों ने अपनी पहचान नीलम राठौर और रीना वर्मा के रूप में बताई है। उन्होंने खुद को बिलासपुर के तिफरा इलाके का निवासी बताया है। फिलहाल एजेंसियां उनसे पूछताछ कर रही हैं और यह जानने की कोशिश की जा रही है कि इस कथित तस्करी नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल हो सकते हैं। अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच जारी है और इससे जुड़े अन्य पहलुओं को भी खंगाला जा रहा है।

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