रायपुर। TODAY छत्तीसगढ़ / छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के धरसींवा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गिरौद गांव में सरकारी जमीन पर अवैध प्लाटिंग और अतिक्रमण का मामला सामने आया है। तहसीलदार द्वारा की गई जांच में जमीन कारोबारी बसंत अग्रवाल द्वारा शासकीय भूमि पर कब्जा कर प्लॉटिंग किए जाने की पुष्टि हुई है। इसके बाद जिला प्रशासन ने मामले में सख्ती के संकेत दिए हैं।
अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) नंदकुमार चौबे ने बताया कि ग्रामीणों की ओर से शिकायत मिली थी कि गांव में सरकारी जमीन पर अवैध रूप से प्लॉट काटकर बेचे जा रहे हैं। शिकायत के आधार पर तहसीलदार से जांच कराई गई, जिसमें अतिक्रमण की पुष्टि हुई है। उन्होंने कहा कि जांच रिपोर्ट के आधार पर तहसीलदार को अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए गए हैं।
एसडीएम के अनुसार, अतिक्रमण हटाने के लिए तहसीलदार को तीन बार पत्र भेजा जा चुका है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि कार्रवाई में देरी होती है, तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है। जांच रिपोर्ट में सामने आया है कि गिरौद गांव में शासकीय चारागान, निस्तार और जल क्षेत्र की भूमि पर अवैध रूप से सड़क निर्माण कर प्लॉटिंग की जा रही थी। हल्का पटवारी द्वारा मौके का निरीक्षण कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार की गई, जिसमें कई खसरा नंबरों की जमीन पर कब्जे की पुष्टि हुई है।
रिपोर्ट के अनुसार, खसरा नंबर 511/5, 630, 634, 636, 638 और 644 सहित अन्य जमीनों पर अतिक्रमण किया गया है। दस्तावेजों में दर्ज है कि निस्तारी-धरसा के नाम पर लगभग 6.39 हेक्टेयर सरकारी भूमि है, जिसमें से करीब 4.51 हेक्टेयर हिस्से में मुरम सड़क बनाकर प्लॉटिंग की गई। जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ स्थानों पर बाउंड्रीवाल का निर्माण कर कब्जा किया गया, जबकि चारागाह की जमीन पर सड़क बनाकर उसे निजी व्यक्तियों को बेचने के आरोप हैं। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि कुछ हिस्सों में जमीन को समतल कर 60 फीट चौड़ी सड़क बनाई गई और उसके किनारे प्लॉट विकसित किए गए।
तहसीलदार की रिपोर्ट के अनुसार, यह पूरा कार्य बिना वैधानिक अनुमति के किया गया, जो राजस्व नियमों का उल्लंघन है। जांच प्रतिवेदन के साथ पंचनामा और नक्शा भी संलग्न कर उच्च अधिकारियों को भेजा गया है। प्रशासन अब इस मामले में अतिक्रमण हटाने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की तैयारी कर रहा है। हालांकि, यह देखना बाकी है कि जमीन पर कब्जा हटाने की कार्रवाई कब तक और किस स्तर तक की जाती है।

