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धान खरीदी में बड़ा बदलाव, सैटेलाइट से होगी फसल की पुष्टि; फर्जी रकबे पर लगेगी लगाम

किस खेत में कितना धान? अब GIS और सैटेलाइट से होगा डिजिटल सत्यापन

TODAY छत्तीसगढ़  / रायपुर: छत्तीसगढ़ में धान की खेती के वास्तविक रकबे का सटीक और तकनीक आधारित आकलन करने की दिशा में राज्य सरकार ने अहम पहल की है। इसके लिए खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण संचालनालय और छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के बीच बुधवार को मंत्रालय महानदी भवन में समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।

इस पहल के तहत सैटेलाइट आधारित मैपिंग, डिजिटल क्रॉप सर्वे और भू-स्थानिक डेटा का इस्तेमाल किया जाएगा। इसका उद्देश्य धान उपार्जन व्यवस्था में रकबे के आकलन को अधिक पारदर्शी और तकनीकी रूप से मजबूत बनाना है।

गैर-जियो-रेफरेंस्ड खेतों की भी होगी मैपिंग

तकनीकी सर्वे के तहत ऐसे कृषि क्षेत्रों की पहचान की जाएगी, जो अभी डिजिटल रूप से मैप नहीं हैं। खास तौर पर वन अधिकार अधिनियम (FRA) के तहत आबंटित भू-भागों और डुबान क्षेत्रों में स्थित कृषि भूमि को मैपिंग में शामिल किया जाएगा।

इन क्षेत्रों की पहचान के बाद उनकी GIS आधारित पॉलीगॉन लेयर तैयार की जाएगी। इससे दूरस्थ और दुर्गम इलाकों में मौजूद कृषि भूमि का डिजिटल रिकॉर्ड मजबूत करने में मदद मिलेगी।

सैटेलाइट इमेजरी से होगी धान की फसल की पुष्टि

खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के लिए तैयार की जाने वाली पॉलीगॉन लेयर और भू-स्थानिक डेटा के आधार पर धान के वास्तविक रकबे का आकलन किया जाएगा।

जिन क्षेत्रों में पहले से जियो-रेफरेंस्ड भूमि खंड यानी खसरे उपलब्ध हैं, वहां उनके अक्षांश-देशांतर का सैटेलाइट इमेजरी से मिलान किया जाएगा। इसके जरिए संबंधित खेत में धान की फसल मौजूद होने की डिजिटल पुष्टि की जाएगी।

डिजिटल क्रॉप सर्वे के लिए बनेगा मजबूत आधार

सरकार की इस तकनीकी पहल से दूरस्थ क्षेत्रों, FRA भूमि और डुबान क्षेत्रों में कृषि भूमि की डिजिटल पहचान मजबूत होने की उम्मीद है। साथ ही भविष्य में होने वाले डिजिटल क्रॉप सर्वे के लिए भी एक मजबूत आधार तैयार होगा।

इससे धान के रकबे के आकलन में तकनीक का इस्तेमाल बढ़ेगा और उपार्जन व्यवस्था के लिए उपलब्ध आंकड़ों को अधिक व्यवस्थित तरीके से तैयार किया जा सकेगा।

अधिकारी रहे मौजूद

MoU के दौरान विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की सचिव रीना बाबा साहेब कंगाले, विभाग की संचालक डॉ. फरिहा आलम और छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के संचालक कवीश्वर सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।

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