CG NEWS: TODAY छत्तीसगढ़ / रायपुर: छत्तीसगढ़ पुलिस के साइबर जागृति अभियान के तहत मंगलवार को छत्तीसगढ़ पब्लिक स्कूल में डिजिटल सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त पश्चिम राहुल देव शर्मा ने विद्यार्थियों और स्कूल स्टाफ को साइबर ठगी, डिजिटल अरेस्ट, फिशिंग, फर्जी APK और सोशल मीडिया फ्रॉड से बचने के तरीके बताए। कार्यक्रम में 150 से अधिक विद्यार्थी और स्टाफ शामिल हुए।
'डिजिटल अरेस्ट' के नाम पर डराने वालों से रहें सावधान
एडिशनल डीसीपी ने बताया कि साइबर अपराधी पुलिस, CBI, ED, नारकोटिक्स या अन्य सरकारी एजेंसी का अधिकारी बनकर फोन या वीडियो कॉल कर सकते हैं। अपराध दर्ज होने या गिरफ्तारी का डर दिखाकर पैसे की मांग की जा सकती है।
उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में घबराकर पैसे ट्रांसफर करने के बजाय परिवार के लोगों और संबंधित पुलिस या सरकारी विभाग से आधिकारिक माध्यम से सत्यापन करना चाहिए। किसी वास्तविक सरकारी अधिकारी द्वारा वीडियो कॉल पर किसी व्यक्ति को 'डिजिटल अरेस्ट' कर पैसे भेजने का निर्देश नहीं दिया जाता।
OTP, PIN और बैंकिंग जानकारी शेयर न करें
कार्यक्रम में विद्यार्थियों और स्टाफ को OTP, ATM PIN, CVV, UPI PIN और इंटरनेट बैंकिंग पासवर्ड जैसी गोपनीय जानकारी किसी से साझा नहीं करने की सलाह दी गई। पुलिस ने यह भी बताया कि UPI PIN पैसे भेजने के लिए दर्ज किया जाता है, पैसे प्राप्त करने के लिए नहीं। अनजान व्यक्ति के कहने पर स्क्रीन शेयरिंग या रिमोट एक्सेस ऐप डाउनलोड करने से भी बचना चाहिए।
फर्जी लिंक और APK से भी खतरा
साइबर अपराधी नौकरी, इनाम, KYC अपडेट, बैंक अकाउंट बंद होने या आकर्षक ऑफर के नाम पर संदिग्ध लिंक भेज सकते हैं। पुलिस ने ऐसे लिंक पर क्लिक नहीं करने और अनजान व्यक्ति की ओर से भेजी गई APK फाइल या संदिग्ध ऐप डाउनलोड नहीं करने की सलाह दी।
ऐसी फाइलों के जरिए मोबाइल में मौजूद व्यक्तिगत जानकारी, फोटो, कॉन्टैक्ट और बैंकिंग डेटा तक पहुंच हासिल करने की कोशिश की जा सकती है।
सोशल मीडिया पर निजी जानकारी शेयर करने से बचें
विद्यार्थियों को सोशल मीडिया अकाउंट में मजबूत और अलग-अलग पासवर्ड रखने तथा जहां सुविधा उपलब्ध हो, Two-Factor Authentication (2FA) चालू करने की सलाह दी गई।
पुलिस ने घर का पता, मोबाइल नंबर, स्कूल की जानकारी, यात्रा की जानकारी और निजी दस्तावेज जैसी संवेदनशील चीजें सार्वजनिक रूप से शेयर नहीं करने को कहा। अनजान लोगों की फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार करने और निजी फोटो-वीडियो साझा करने में भी सावधानी बरतने की अपील की गई।
रोमांस से लेकर जॉब फ्रॉड तक, बताए ठगी के तरीके
कार्यक्रम में साइबर ठगी के कई तरीके उदाहरण सहित समझाए गए। इनमें रोमांस स्कैम, जॉब फ्रॉड, ऑनलाइन शॉपिंग फ्रॉड, फिशिंग और फर्जी KYC-बैंक अपडेट फ्रॉड शामिल रहे। पुलिस ने विद्यार्थियों को यह भी बताया कि सोशल मीडिया पर आने वाले किसी मैसेज, वीडियो या खबर को बिना सत्यापन के आगे फॉरवर्ड न करें। फर्जी खबर और एडिटेड वीडियो तेजी से भ्रम फैलाने का कारण बन सकते हैं।
ठगी होते ही 1930 पर करें कॉल
पुलिस ने बताया कि ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी होने पर घबराने के बजाय तुरंत 1930 साइबर हेल्पलाइन पर संपर्क करना चाहिए। ठगी के बाद जितनी जल्दी शिकायत की जाती है, संबंधित वित्तीय लेन-देन पर कार्रवाई की संभावना उतनी बढ़ सकती है।
कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों और स्टाफ को 'जागरूक रहें, सतर्क रहें और सुरक्षित रहें' का संदेश देते हुए जिम्मेदार डिजिटल व्यवहार अपनाने का संकल्प दिलाया गया।
इस दौरान प्र. उप निरीक्षक वर्चस्व उपाध्याय, स्कूल के प्राचार्य राकेश चतुर्वेदी, संचालक गौरव खोसला, रितु सिंह, निधि बिसेन, पूनमजीत कौर समेत 150 से अधिक विद्यार्थी और स्टाफ मौजूद रहे।

