बिलासपुर। TODAY छत्तीसगढ़ / बिलासपुर में सामने आए कथित 17 करोड़ रुपये के सर्पदंश मुआवजा घोटाले को लेकर भाजपा ने कांग्रेस और बिलासपुर के पूर्व विधायक पर निशाना साधा है। पार्टी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में गरीबों के लिए संचालित सरकारी योजना का दुरुपयोग हुआ और अब जांच आगे बढ़ने के बावजूद कांग्रेस इस मुद्दे पर चुप है।
भाजपा के मंडल अध्यक्ष बबलू कश्यप, शैलेन्द्र यादव, राकेश लालवानी, मनोज सोनी, श्रीनिवास राव और देवेंद्र पाठक ने संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि यह केवल आर्थिक अनियमितता का मामला नहीं, बल्कि गरीब और पीड़ित परिवारों के अधिकारों से जुड़ा गंभीर प्रकरण है। भाजपा का आरोप है कि जिस अवधि में यह कथित घोटाला हुआ, उस समय प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी और बिलासपुर का प्रतिनिधित्व कांग्रेस के विधायक कर रहे थे।
भाजपा नेताओं ने दावा किया कि जांच एजेंसियां 431 संदिग्ध सर्पदंश मुआवजा प्रकरणों की जांच कर रही हैं, जिनमें 17 करोड़ रुपये से अधिक की शासकीय राशि के कथित गबन की आशंका है। पार्टी के अनुसार, मामले में अब तक डॉक्टर, पुलिसकर्मी, राजस्व विभाग के कर्मचारी और बैंककर्मी सहित कई लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है।
भाजपा ने आरोप लगाया कि गरीब, आदिवासी और वास्तविक पीड़ित परिवारों के लिए बनाई गई राहत योजना का कथित तौर पर दुरुपयोग किया गया। पार्टी का कहना है कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सरकारी राशि निकाली गई, जिससे जरूरतमंदों के अधिकारों का हनन हुआ।
प्रेस विज्ञप्ति में भाजपा ने पूर्व विधायक से सार्वजनिक रूप से पांच सवाल भी पूछे। इनमें कथित फर्जीवाड़े के दौरान प्रशासन से जवाब मांगने, विधानसभा में मामला उठाने, कथित घोटाले की जानकारी होने या न होने तथा कथित नेटवर्क को संरक्षण मिलने जैसे मुद्दे शामिल हैं।
भाजपा ने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार मामले की निष्पक्ष जांच करा रही है और दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति—चाहे वह अधिकारी, कर्मचारी या किसी प्रकार का राजनीतिक संरक्षण प्राप्त व्यक्ति हो—के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
नोट: इस खबर में शामिल सभी आरोप भाजपा की प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित हैं। इन आरोपों पर कांग्रेस या संबंधित पूर्व विधायक का पक्ष इस विज्ञप्ति में शामिल नहीं है।

