बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने वेलकम, केडिया और भाटिया डिस्टलरी द्वारा कथित रूप से बिना उपचारित दूषित पानी खुले में छोड़े जाने के मामले में सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने कोर्ट कमिश्नरों की जांच रिपोर्ट पर संज्ञान लेते हुए तीनों डिस्टलरी को 22 जुलाई तक विस्तृत जवाब प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच में जनहित याचिका के रूप में चल रही है। यह याचिका मीडिया में प्रकाशित खबर का स्वतः संज्ञान लेने के बाद दर्ज की गई थी। अदालत ने जांच के लिए दो कोर्ट कमिश्नरों की नियुक्ति की थी, जिन्होंने 6 जुलाई को निरीक्षण के बाद अपनी रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत की।
कोर्ट कमिश्नर की रिपोर्ट के अनुसार, तीनों डिस्टलरी परिसरों और आसपास के क्षेत्रों में पर्यावरणीय अनियमितताओं के संकेत मिले हैं।
रिपोर्ट में वेलकम डिस्टलरी के संबंध में कहा गया है कि वहां से निकलने वाला दूषित पानी वन विभाग के क्षेत्र में पहुंच रहा है तथा पाइपलाइन में रिसाव भी पाया गया। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि इस डिस्टलरी पर पहले पर्यावरणीय उल्लंघन के मामले में 56.4 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जा चुका है।
भाटिया वाइंस के संबंध में रिपोर्ट में खजूरी और शिवनाथ नदी की ओर जाने वाले मार्ग पर अत्यधिक प्रदूषित पानी मिलने का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, पानी में बीओडी (Biochemical Oxygen Demand) और सीओडी (Chemical Oxygen Demand) का स्तर निर्धारित मानकों से अधिक पाया गया तथा इससे जलीय जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका जताई गई है।
वहीं केडिया डिस्टलरी के मामले में रिपोर्ट में कहा गया है कि डिस्टलरी का दूषित पानी पास की खदानों के गड्ढों में जमा मिला, जिससे रिसाव की संभावना व्यक्त की गई है।
अदालत ने कोर्ट कमिश्नर की रिपोर्ट के आधार पर तीनों डिस्टलरी को नोटिस जारी करते हुए 22 जुलाई तक अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई में अदालत उनके जवाब और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई पर विचार करेगी।

