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ड्रग तस्कर मुकेश बनिया की 42 लाख रुपये की संपत्तियां सीज़

पुलिस का कहना है- अगर संपत्तियों को ख़रीदने का वैध स्रोत नहीं बताया गया, तो हमेशा के लिए ज़ब्त हो जाएगी 42 लाख की प्रॉपर्टी.

TODAY छत्तीसगढ़  /  छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में पुलिस ने नशे के अवैध कारोबार पर लगाम कसने के लिए एक बड़ी आर्थिक कार्रवाई की है. आदतन मादक पदार्थ तस्कर मुकेश उर्फ़ 'मुकेश बनिया' की क़रीबन 42 लाख रुपये मूल्य की संपत्तियों को कुर्क कर दिया गया है.

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मुंबई स्थित SAFEMA (सफ़ेमा - स्मगलर्स एंड फॉरेन एक्सचेंज मैनिपुलेटर्स एक्ट) के सक्षम प्राधिकारी ने पुलिस के इस 'फ़्रीज़िंग ऑर्डर' की पुष्टि कर दी है.

ड्रग्स की कमाई से मकान और वाहन ख़रीदने का आरोप

रायपुर पुलिस कमिश्नरेट के सेंट्रल ज़ोन द्वारा की गई वित्तीय जांच में यह बात सामने आई थी कि अभियुक्त मुकेश ने कथित तौर पर मादक पदार्थों की तस्करी से कमाए गए पैसों से संपत्तियां बनाई थीं.

  • क्या-क्या हुआ अटैच: पुलिस की अनुशंसा पर NDPS एक्ट की धारा 68-F(1) के तहत अभियुक्त के एक आवासीय मकान और तीन वाहनों को सीज़ किया गया है.

  • क्या होगा असर: SAFEMA का आदेश प्रभावी होने के बाद, अब इन संपत्तियों को सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के बिना न तो बेचा जा सकता है, न ट्रांसफ़र किया जा सकता है और न ही गिरवी रखा जा सकता है.

आय का वैध स्रोत न बताने पर होगी सरकारी ज़ब्ती

अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि अब संबंधित पक्षों (अभियुक्त और उसके परिजनों) को इन संपत्तियों को ख़रीदने के लिए इस्तेमाल किए गए पैसों का 'वैध आय स्रोत' प्राधिकारी के समक्ष साबित करना होगा. यदि वे ऐसा करने में विफल रहते हैं, तो क़ानूनन इन संपत्तियों को स्थायी रूप से सरकारी राजसात कर लिया जाएगा.

फ़रवरी में हुई थी गिरफ़्तारी, दर्ज़ हैं 31 मुक़दमे

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, मुकेश उर्फ़ 'मुकेश बनिया' रायपुर में मादक पदार्थों की तस्करी का एक आदतन अपराधी है. उसके ख़िलाफ़ NDPS एक्ट, आर्म्स एक्ट, हत्या, बलवा और मारपीट जैसे 31 गंभीर मामले पहले से दर्ज़ हैं.

उसे 26 फ़रवरी 2026 को सिटी कोतवाली और एण्टी क्राइम एंड साइबर यूनिट की संयुक्त टीम ने गिरफ़्तार किया था. तब उसके पास से 6.119 किलो गांजा, एक देसी कट्टा, 3 ज़िंदा कारतूस और 2400 अल्प्राज़ोलम नशीली गोलियां बरामद हुई थीं.

उसकी लगातार आपराधिक गतिविधियों को देखते हुए पुलिस पहले ही उसके ख़िलाफ़ 'पिट-एनडीपीएस एक्ट' (PIT-NDPS Act) के तहत 'डिटेंशन ऑर्डर' भी जारी करवा चुकी है.

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