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सौतेली बहन की याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आए गंभीर आरोप, हाई कोर्ट ने बच्चों को किया तलब

याचिकाकर्ता के पति पर ही लगे दुष्कर्म के आरोप

TODAY छत्तीसगढ़  /  छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने एक बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए दो नाबालिग भाई-बहन को आज (30 जून, मंगलवार) दोपहर सवा दो बजे व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में पेश करने का सख़्त निर्देश दिया है.

चीफ़ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविन्द्र कुमार अग्रवाल की डिवीज़न बेंच ने आदेश दिया है कि बच्चों को संबंधित ज़िला मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किया जाए. कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी अपरिहार्य कारण से ज़िला मजिस्ट्रेट उपस्थित नहीं हो पाते हैं, तो संबंधित एसडीएम बच्चों को लेकर न्यायालय में उपस्थित होंगे.

क्या है पूरा मामला और क्या लगे हैं आरोप?

यह मामला इन बच्चों की सौतेली बहन द्वारा दायर की गई एक बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका से जुड़ा है. याचिकाकर्ता (सौतेली बहन) ने हाई कोर्ट में आरोप लगाया था कि उसके नाबालिग भाई-बहन को अवैध रूप से हिरासत में रखा गया है.

सुनवाई के दौरान इस मामले में एक बेहद गंभीर तथ्य तब सामने आया, जब एक बच्चे ने न्यायालय को बताया कि याचिकाकर्ता (सौतेली बहन) के पति ने उसके साथ कथित तौर पर दुष्कर्म किया है. बच्चे ने कहा कि वे दोनों वर्तमान में बाल गृह में पूरी तरह सुरक्षित हैं.

इस आरोप पर याचिकाकर्ता महिला ने अदालत को सूचित किया कि उसने स्वयं अपने पति के ख़िलाफ़ इस मामले में पुलिस में शिकायत दर्ज़ कराई है. मामले की संवेदनशीलता और बच्चों के हितों को देखते हुए हाई कोर्ट ने उनकी उचित काउंसलिंग को आवश्यक माना है और इसीलिए उन्हें व्यक्तिगत रूप से तलब किया है.

वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग से हो चुकी है पेशी

राज्य शासन की ओर से कोर्ट को जानकारी दी गई कि 12 वर्षीय बालिका और 9 वर्षीय बालक वर्तमान में अलग-अलग चाइल्ड केयर संस्थानों में सुरक्षित रह रहे हैं:

  • बालक बैकुंठपुर (कोरिया ज़िले) स्थित 'चाइल्ड वेलफ़ेयर सेंटर' में है.

  • बालिका अंबिकापुर के 'बालिका गृह' में रह रही है.

इससे पहले दोनों बच्चों को वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग (VC) के माध्यम से भी न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया था. हालांकि, उस प्रक्रिया में संबंधित ज़िला मजिस्ट्रेट शामिल नहीं हो सके थे, जिसे कोर्ट ने गंभीरता से लिया.

सुरक्षा और पेशी को लेकर कोर्ट के सख़्त निर्देश

हाई कोर्ट ने बच्चों की यात्रा और उनकी सुरक्षा को लेकर कड़े निर्देश जारी किए हैं:

  • यात्रा के दौरान संबंधित डिप्टी पुलिस अधीक्षक (DSP) बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे.

  • चाइल्ड केयर संस्थान के सक्षम अधिकारी भी बच्चों के साथ अनिवार्य रूप से मौजूद रहेंगे.

  • न्यायालय ने राज्य के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (DGP) को इस आदेश का अक्षरशः पालन सुनिश्चित कराने की ज़िम्मेदारी सौंपी है.

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