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ग्रामीण महिलाओं को 'साइबर ठगों' से बचाएगी पुलिस

नए बीएनएस क़ानून और सोशल मीडिया के ख़तरे... छत्तीसगढ़ के गांवों में पुलिस ने महिलाओं को दी ये ज़रूरी टिप्स

TODAY छत्तीसगढ़  /  छत्तीसगढ़ के बिलासपुर ज़िले में कोटा थाना पुलिस ने ग्रामीण इलाक़ों में महिलाओं और स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के लिए एक विशेष जन जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया.

पुलिस के मुताबिक़, 'चेतना विरुद्ध नशा व प्रहार अभियान' के तहत आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण अंचल में बढ़ते नशे, साइबर अपराधों और यातायात नियमों के प्रति लोगों को सचेत करना है. यह कार्यक्रम 23 जून को ग्राम भुंडा और ग्राम गनियारी में आयोजित किया गया था.

इन मुख्य विषयों पर दी गई जानकारी

कार्यक्रम के दौरान प्रशिक्षु उप पुलिस अधीक्षक (Probationary DSP) आकाश चौधरी और कोटा थाने के स्टाफ ने स्थानीय ग्रामीणों को कई महत्वपूर्ण विषयों की जानकारी दी:

  • नशे के ख़िलाफ़ अभियान: ग्रामीण महिलाओं और स्वयं सहायता समूहों को नशे के दुष्परिणामों के बारे में बताया गया और सामाजिक स्तर पर इसके ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने के लिए प्रेरित किया गया.

  • नए आपराधिक क़ानून (BNS): देश में लागू हुए नए आपराधिक क़ानून 'भारतीय न्याय संहिता' (BNS) और 'भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता' (BNSS) के बुनियादी प्रावधानों और नागरिकों के अधिकारों की जानकारी दी गई.

  • साइबर अपराध से बचाव: आज के दौर में बढ़ रहे ऑनलाइन फ्रॉड, बैंक खातों से जुड़ी धोखाधड़ी और सोशल मीडिया के सुरक्षित इस्तेमाल को लेकर महिलाओं को जागरूक किया गया, ताकि वे साइबर ठगी का शिकार न हों.

  • यातायात के नियम: सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए उपस्थित लोगों को अनिवार्य रूप से ट्रैफ़िक नियमों का पालन करने की समझाइश दी गई.

स्थानीय जनप्रतिनिधि भी रहे शामिल

इस जागरूकता कार्यक्रम में केवल महिला समूह ही नहीं, बल्कि ग्राम पंचायत भुंडा और ग्राम पंचायत गनियारी के निर्वाचित प्रतिनिधि, स्थानीय वरिष्ठ नागरिक और बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाएं शामिल हुईं.

बिलासपुर पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, इस तरह के ग्रामीण अभियानों का मक़सद पुलिस और आम जनता के बीच की दूरी को कम करना है ताकि अपराध मुक्त समाज का निर्माण किया जा सके.

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