तमनार घटना: महिला कांग्रेस की निंदा, सरकार पर संवादहीनता और कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल


रायपुर |
  TODAY छत्तीसगढ़  / छत्तीसगढ़ के तमनार क्षेत्र में महिला पुलिसकर्मियों के साथ हुई घटना को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ तेज़ हो गई हैं। फूलोदेवी नेताम ने इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए राज्य सरकार और प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। फूलोदेवी नेताम ने कहा कि तमनार में महिला टीआई और महिला आरक्षक के साथ जो घटना घटी, वह बेहद दुखद और चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि राज्य में इस तरह का माहौल पहले कभी देखने को नहीं मिला।

कोल माइंस परियोजना और स्थानीय विरोध

नेताम ने बताया कि रायगढ़ जिले के तमनार क्षेत्र के गारे पेलमा सेक्टर-1 में जिंदल स्टील को ओपन कास्ट कोयला खदान आवंटित की गई है। इसके लिए 8 दिसंबर को जनसुनवाई आयोजित की गई थी, लेकिन क्षेत्र के ग्रामीण, आदिवासी और स्थानीय निवासी शुरुआत से ही इस परियोजना का विरोध कर रहे हैं।

उनके अनुसार, प्रभावित 14 गांवों के लोग अपनी पुश्तैनी ज़मीन देने को तैयार नहीं हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कोयला उत्खनन से खेती-बाड़ी, जंगल और पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचेगा। नेताम ने कहा कि स्थानीय लोग लंबे समय से सरकार से संवाद और समाधान की मांग कर रहे थे, लेकिन सरकार या प्रशासन की ओर से किसी भी स्तर पर उनसे बातचीत का प्रयास नहीं किया गया।

संवाद की कमी और बढ़ता तनाव

फूलोदेवी नेताम का कहना है कि संवाद की कमी के कारण प्रदेश में तनावपूर्ण स्थिति बन रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार के कार्यकाल में राज्य में अराजकता का माहौल बनता जा रहा है और कानून-व्यवस्था की स्थिति गंभीर है। उन्होंने कहा, “आंदोलनकारियों पर लाठीचार्ज किया जाना दुखद है और महिला पुलिस कर्मियों के साथ हुई घटना भी उतनी ही पीड़ादायक है। दोनों ही घटनाएँ चिंता का विषय हैं।”

सरकार पर लगाए आरोप

महिला कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने सवाल उठाया कि भारतीय जनता पार्टी की “डबल इंजन सरकार” में जनता क्यों लगातार आक्रोशित हो रही है और क्यों लोग कानून अपने हाथ में लेने को मजबूर हो रहे हैं। उनके अनुसार, राज्य की स्थिति अब चिंताजनक होती जा रही है।

उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार जल, जंगल और ज़मीन को केवल पूंजीपतियों के लिए मानकर चल रही है और जो लोग अपनी बात मुखरता से रखते हैं या आंदोलन करते हैं, उनके साथ बिना संवाद के बल प्रयोग किया जा रहा है। नेताम ने यह भी कहा कि आंदोलन के दौरान हुई एक व्यक्ति की मृत्यु के लिए भी सरकार की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।

महिला सुरक्षा पर सवाल

फूलोदेवी नेताम ने कहा कि यदि राज्य में महिला टीआई और महिला आरक्षक ही सुरक्षित नहीं हैं, तो आम महिलाओं की सुरक्षा की कल्पना करना मुश्किल हो जाता है। उन्होंने इस घटना को महिला सुरक्षा के लिहाज़ से भी बेहद गंभीर बताया। इस संबंध में जानकारी वंदना राजपूत की ओर से दी गई है।

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हेरोइन सप्लाई करते पति-पत्नी गिरफ्तार, NDPS एक्ट में कार्रवाई


रायपुर।
  TODAY छत्तीसगढ़  / पुलिस ने हेरोइन (चिट्टा) की तस्करी में लिप्त पति-पत्नी को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से 16.01 ग्राम प्रतिबंधित मादक पदार्थ हेरोइन (चिट्टा) और मोबाइल फोन जब्त किया गया है। जब्त हेरोइन की कीमत करीब 3.20 लाख रुपये आंकी गई है। 

पुलिस के अनुसार हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी अंतर्गत एलआईजी 02/20 निवासी हरप्रीत कौर के पास हेरोइन बिक्री के लिए रखे जाने की सूचना मिली थी। सूचना पर पुलिस टीम ने दबिश देकर उसे रंगे हाथों पकड़ लिया। घर की तलाशी लेने पर पलंग के दराज में रखी प्लास्टिक जिपर थैली से हेरोइन बरामद की गई। पूछताछ में हरप्रीत कौर ने बताया कि हेरोइन उसका पति जोधा सिंह पंजाब से लेकर आया था। इसी दौरान जोधा सिंह भी घर पहुंचा, जिसे पुलिस ने मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया।

दोनों आरोपियों से कुल 16.01 ग्राम हेरोइन, एक मोबाइल फोन जब्त किया गया है। पुलिस ने पति-पत्नी के खिलाफ धारा 21 (बी) एनडीपीएस एक्ट के तहत अपराध दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि मादक पदार्थों की तस्करी के नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।


राष्ट्रपति को भाया जशपुर का जशक्राफ्ट, हस्तशिल्प की सराहना


जशपुरनगर। 
 TODAY छत्तीसगढ़  / राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू एवं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को जशपुर जिले के जशक्राफ्ट ब्रांड के अंतर्गत स्थानीय प्राकृतिक संसाधनों बांस और सवई घास से निर्मित आकर्षक हस्तशिल्प उत्पाद उपहार स्वरूप भेंट किए गए। इन उत्पादों को पारंपरिक जनजातीय कलाकृतियों के रूप में प्रस्तुत किया गया।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जशक्राफ्ट के हस्तशिल्प उत्पादों को देखकर विशेष प्रसन्नता व्यक्त की और स्थानीय कारीगरों द्वारा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ विकसित की गई इन पारंपरिक कलाकृतियों की भूरि-भूरि प्रशंसा की। यह अवसर जशपुर जिले की समृद्ध जनजातीय कला, कारीगरों के उत्कृष्ट कौशल और जशपुर वनमंडल के नवाचारपूर्ण प्रयासों के लिए गौरवपूर्ण क्षण रहा। जशपुर वनमंडल की ओर से बताया गया कि भविष्य में भी इस प्रकार की नवाचारपूर्ण पहलें निरंतर जारी रखी जाएंगी, जिससे स्थानीय संसाधनों का संरक्षण, पारंपरिक ज्ञान का संवर्धन और ग्रामीण आजीविका को मजबूती मिल सके।

महिला कारीगरों को मिला स्वरोजगार

नवाचार के तहत ग्राम कोटानपानी की संयुक्त वन प्रबंधन समिति को चक्रीय निधि से वित्तीय सहायता प्रदान की गई है। इससे ग्रामीण महिला कारीगरों को स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध हुए हैं। समिति के सदस्य बांस और सवई घास से पर्यावरण-अनुकूल हस्तशिल्प उत्पादों का निर्माण कर रहे हैं।

जशक्राफ्ट ब्रांड के अंतर्गत झुमके, माला, टोपी सहित अन्य पारंपरिक आभूषण और दैनिक उपयोग की सामग्री तैयार की जा रही है। ये उत्पाद स्थानीय कारीगरों की पारंपरिक कला, रचनात्मकता और पीढ़ियों से संचित जनजातीय ज्ञान का सशक्त प्रतीक हैं। निर्माण प्रक्रिया में पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग के सिद्धांतों का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। 

जशक्राफ्ट पहल से न केवल स्थानीय कारीगरों और ग्रामीण परिवारों का आर्थिक सशक्तिकरण हो रहा है, बल्कि जशपुर की जनजातीय कला और हस्तकला को राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। इससे स्थानीय उत्पादों के लिए नए बाजार खुलेंगे और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

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