हनुमान कथा के मंच से धर्मांतरण के मुद्दे पर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का बयान सुर्खियों में


कोरबा। 
 TODAY छत्तीसगढ़  /  छत्तीसगढ़ के कोरबा ज़िले में इन दिनों चल रही हनुमान कथा के दौरान कथावाचक धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के एक बयान ने चर्चा को जन्म दिया है। कथा के मंच से उन्होंने धर्मांतरण के मुद्दे पर टिप्पणी करते हुए कहा कि “यहां आसपास हालेलुयाह वाले सक्रिय हैं,” और इसके खिलाफ कड़ी प्रतिक्रिया जताई।

उन्होंने आगे कहा कि हिंदुओं का धर्मांतरण अब नहीं होने दिया जाएगा और जो लोग पहले धर्मांतरण कर चुके हैं, उन्हें 1 अप्रैल तक “घर वापसी” का अवसर दिया जा रहा है। उन्होंने लोगों से अपनी परंपराओं की ओर लौटने की अपील भी की। कथा के दौरान उनका अलग अंदाज़ भी देखने को मिला, जब उन्होंने अंग्रेज़ी में “Welcome to stage, my dear” कहकर लोगों का अभिवादन किया। 

धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री इन दिनों कोरबा में हनुमान कथा कर रहे हैं, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुट रहे हैं। इस दौरान उन्होंने कोरबा की भी तारीफ करते हुए कहा कि यहां के कोयले का योगदान अन्य क्षेत्रों, विशेषकर मध्यप्रदेश में बिजली आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण है। उनके इस बयान को लेकर सामाजिक और राजनीतिक हलकों में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। हालांकि, प्रशासन की ओर से इस मामले में अब तक कोई औपचारिक टिप्पणी नहीं की गई है।

मुख्यमंत्री की पहल से पुनः जीवंत हुआ मल्हार महोत्सव, सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने बांधा समां


बिलासपुर।
  TODAY छत्तीसगढ़  /   ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक नगरी मल्हार में आयोजित मल्हार महोत्सव का शुभारंभ आज श्रद्धा, उत्साह और परंपरा के संगम के साथ हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत मां डिंडेश्वरी माता के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर की गई, जिसमें क्षेत्र की सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की गई।

मुख्य अतिथि बिल्हा विधायक श्री धरमलाल कौशिक ने अपने संबोधन में मल्हार की ऐतिहासिक महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह क्षेत्र प्राचीन काल से ही समृद्ध सांस्कृतिक एवं पुरातात्विक धरोहरों के लिए प्रसिद्ध रहा है। मल्हार महोत्सव मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की पहल पर ही फिर से शुरू हुआ है। उन्होंने बताया कि यहां हुई पुरातात्विक खोजों में ताम्रपाषाण काल के अवशेष प्राप्त हुए हैं, जो इस क्षेत्र की प्राचीन सभ्यता और जीवन शैली को दर्शाते हैं। प्राचीन मिट्टी के बर्तन, औजार एवं अन्य उपयोगी वस्तुएं उस समय के मानव जीवन, कृषि एवं संस्कृति की महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करती हैं। इस अवसर पर बेलतरा विधायक श्री सुशांत सिंह शुक्ला, मस्तुरी विधायक श्री दिलीप लहरिया, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री राजेश सूर्यवंशी एवं नगर पंचायत अध्यक्ष श्रीमती धनेश्वरी केवर्त,  कलेक्टर श्री संजय अग्रवाल, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री रजनेश सिंह, सीईओ जिला पंचायत श्री संदीप अग्रवाल,अपर कलेक्टर श्री शिव कुमार बैनर्जी,  सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित रहे। 

मेला ग्राउंड में आयोजित उत्सव के अंतर्गत प्रथम दिवस शाम 5.30 बजे से लेकर रात 11 बजे तक विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों की आकर्षक प्रस्तुतियां हुईं। कार्यक्रमों की श्रृंखला में लोक एवं शास्त्रीय कला का अद्भुत संगम देखने को मिला, जिसमें प्रदेश के कलाकारों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। करमा नृत्य (जय माता दी करमा दल, बेलतरा) से कार्यक्रम की शुरुआत हुई, इसके बाद हमर ज्योति पंथी पार्टी, मुंगेली द्वारा पंथी नृत्य प्रस्तुत किया गया। शास्त्रीय संगीत में डॉ. तोपराज पटेल ने अपनी प्रस्तुति दी, वहीं सृष्टि अंचल पाण्डेय, बिलासपुर द्वारा ओडिसी नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति दी गई। स्वाति सोनी लोककला मंच की प्रस्तुति ने भी दर्शकों को खूब आकर्षित किया। श्री शिवकुमार तिवारी एवं साथियों के कार्यक्रम के साथ ही सुनील सोनी स्टार नाइट ऑर्केस्ट्रा विशेष आकर्षण का केंद्र रहा।

कार्यक्रम के दौरान विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने दर्शकों का मन मोह लिया। लोकगीत, लोकनृत्य एवं रंगारंग प्रस्तुतियों से पूरा वातावरण उत्सवमय हो उठा। कार्यक्रम में भाग लेने वाले कलाकारों को अतिथियों द्वारा शॉल एवं श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया गया तथा उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना की गई। कल भी सांस्कृतिक कार्यक्रमों का सिलसिला जारी रहेगा। 


सरकारी रिसॉर्ट में चीतल का मांस पकाने के आरोप में 6 लोग गिरफ़्तार, 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल दाखिल


बिलासपुर।
  TODAY छत्तीसगढ़  /  ज़िले में वन विभाग ने वन्यजीव शिकार से जुड़े एक मामले में छह लोगों को गिरफ़्तार किया है। अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई बेलगहना क्षेत्र में स्थित कुरदर के एक ईको पर्यटन रिसॉर्ट में की गई, जहां कथित तौर पर चीतल (हिरण) का मांस पकाया जा रहा था।

वन विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि वनमंडल अधिकारी नीरज कुमार को इस संबंध में सूचना मिली थी। इसके बाद एक टीम गठित कर रिसॉर्ट पर छापा मारा गया। टीम का नेतृत्व वन परिक्षेत्र अधिकारी देव सिंह मरावी कर रहे थे, जबकि कार्रवाई उपवनमंडल अधिकारी अनिल भास्करन के मार्गदर्शन में की गई।

अधिकारियों के मुताबिक, मौके से पका हुआ मांस बरामद किया गया। प्रारंभिक जांच में इसे नर चीतल का मांस बताया गया है। इस मामले में जिन लोगों को गिरफ़्तार किया गया है, उनसे पूछताछ के दौरान कथित तौर पर शिकार और मांस पकाने की बात स्वीकार की गई।

वन विभाग ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम 1972 की विभिन्न धाराओं—9, 39, 44, 50 और 51—के तहत मामला दर्ज किया गया है। ये धाराएं वन्यजीवों के शिकार, उनके अवैध कब्जे और संबंधित गतिविधियों को दंडनीय बनाती हैं। 

गिरफ़्तार किए गए लोगों में रामकुमार टोप्पो, जनक राम बैगा, देवसिंह बैगा, राजेश बैगा, लखन सिंह और रजनीश सिंह शामिल हैं। सभी को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, बिलासपुर की अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।  वन विभाग का कहना है कि मामले की आगे जांच जारी है और इस तरह की गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए निगरानी बढ़ाई जाएगी।  

कार्रवाई में वन विभाग बेलगहना के परिक्षेत्र सहायक शिवकुमार पैकरा, बीएफओ संतकुमार वाकरे, पंकज साहू, सोमप्रकाश जयसिंधु, सावन यादव, वन विकास निगम रेंजर रवि जगत, डिप्टी रेंजर अरविंद बंजारे और नंदकिशोर सिंह की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

अनुशासन, विश्वास और सौहार्द की मिसाल बनी रायगढ़ की रामनवमी


रायगढ़। 
 TODAY छत्तीसगढ़  /  शहर के साथ साथ जिले में इस वर्ष रामनवमी की शोभायात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन भर नहीं रही बल्कि यह कानून के राज, सामाजिक सौहार्द और प्रशासनिक इच्छाशक्ति के सफल समन्वय की सशक्त मिसाल बनकर उभरी है। लंबे समय से ऐसे आयोजनों के साथ जुड़ी आशंकाओं, दबाव और अव्यवस्था की छवि को इस बार निर्णायक रूप से बदला गया है और इसके केंद्र में रही पुलिस की अनुशासनात्मक पहल।

कानून का भरोसा—सबसे बड़ा परिवर्तन

किसी भी समाज में कानून का वास्तविक प्रभाव तब दिखता है, जब आम नागरिक बिना भय के अपने सामाजिक और धार्मिक अधिकारों का पालन कर सके। रायगढ़ में इस बार यही हुआ। जहां पहले रामनवमी जैसे आयोजनों के दौरान एक अदृश्य डर का माहौल रहता था व्यापारी वर्ग दबाव में रहता था और आम नागरिक दूरी बनाकर चलते थे वहीं इस बार लोगों ने खुलकर भागीदारी निभाई। यह बदलाव केवल व्यवस्था का नहीं, बल्कि मानसिकता का परिवर्तन है और इस परिवर्तन की जड़ में है कानून के प्रति बढ़ा हुआ विश्वास है।

अनुशासनात्मक पहल का स्पष्ट प्रभाव

जिले के एसएसपी शशि मोहन सिंह की कार्यशैली इस पूरे घटनाक्रम में निर्णायक रही। उन्होंने यह स्पष्ट संदेश दिया कि धार्मिक आस्था के नाम पर किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या दबंगई को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने त्योहार से पहले कुछ रणनीति तैयार की जिसमें असामाजिक तत्वों की पहचान, संभावित उपद्रवियों पर अग्रिम कार्रवाई, आयोजकों के साथ संवाद और जिम्मेदारी तय करना साथ ही संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष निगरानी प्रमुख रहा। इन सभी कदमों ने मिलकर एक ऐसा वातावरण तैयार किया, जहां अनुशासन स्वाभाविक रूप से दिखाई दिया। यह पहल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह केवल “कंट्रोल” की कार्रवाई नहीं थी, बल्कि “प्रिवेंटिव पुलिसिंग” का एक प्रभावी उदाहरण थी।

सामाजिक सौहार्द का सशक्त संदेश

रायगढ़ की इस शोभायात्रा ने यह भी साबित किया कि जब माहौल निष्पक्ष और सुरक्षित हो, तो समाज अपने आप एकजुट होकर आगे आता है। व्यापारी वर्ग, जो पहले आशंकित रहता था इस बार स्वागत में आगे आया। आम नागरिकों ने न केवल सहभागिता की, बल्कि इसे एक उत्सव के रूप में जिया। यह सामाजिक सौहार्द किसी आदेश से नहीं आता यह विश्वास से आता है और यह विश्वास तभी बनता है, जब प्रशासन निष्पक्ष, सक्रिय और दृढ़ दिखाई देता है। 

शक्ति प्रदर्शन से संस्कार तक

पिछले वर्षों में ऐसे आयोजनों के दौरान हथियारों का प्रदर्शन और दबंगई एक चिंताजनक प्रवृत्ति बन चुकी थी। यह न केवल कानून व्यवस्था के लिए चुनौती थी, बल्कि सामाजिक ताने-बाने को भी प्रभावित करती थी। इस बार इन प्रवृत्तियों का पूरी तरह अभाव रहा। यह बदलाव केवल पुलिस की सख्ती का परिणाम नहीं, बल्कि उस स्पष्ट नीति का परिणाम है, जिसमें यह तय कर दिया गया कि आस्था का मंच केवल श्रद्धा और संस्कृति के लिए है, शक्ति प्रदर्शन के लिए नहीं।

एक अनुकरणीय मॉडल

रायगढ़ का यह अनुभव केवल एक शहर तक सीमित नहीं रहना चाहिए। यह एक मॉडल के रूप में सामने आया है, जहां प्रशासन की दृढ़ता, पुलिस की रणनीतिक सक्रियता और समाज की सकारात्मक भागीदारी, तीनों मिलकर एक स्वस्थ और सुरक्षित वातावरण का निर्माण करते हैं। एसएसपी शशि मोहन सिंह की पहल इस संदर्भ में सराहनीय ही नहीं, बल्कि प्रेरणादायक भी है। उन्होंने यह दिखाया कि सख्ती और संवेदनशीलता साथ-साथ चल सकती हैं और जब ऐसा होता है, तब कानून केवल डर का माध्यम नहीं, बल्कि भरोसे का आधार बनता है। रायगढ़ की इस रामनवमी ने एक महत्वपूर्ण संदेश भी दिया है कि यदि प्रशासनिक इच्छाशक्ति स्पष्ट हो और समाज उसका साथ दे, तो किसी भी परंपरा को उसकी वास्तविक गरिमा के साथ निभाया जा सकता है। अब आवश्यकता इस बात की है कि इस पहल को निरंतरता मिले, ताकि कानून का यह भरोसा और सामाजिक सौहार्द आने वाले समय में और मजबूत हो सके।

© all rights reserved TODAY छत्तीसगढ़ 2018
todaychhattisgarhtcg@gmail.com