अंबिकापुर सेंट्रल जेल VIDEO: मोबाइल, घर का खाना और अस्पताल में विशेष ठहराव, दो प्रहरी निलंबित


अंबिकापुर। 
 TODAY छत्तीसगढ़  /  जेल की ऊंची दीवारों के भीतर बंद कैदियों के लिए कानून समान होता है कम से कम कागज़ों पर लेकिन अंबिकापुर सेंट्रल जेल से सामने आया ताज़ा मामला इस दावे को कठघरे में खड़ा करता है। हत्या के आरोप में आजीवन सजा काट रहे मनेंद्रगढ़ निवासी गुरुबक्श नामक कैदी को जेल नियमों के विपरीत मोबाइल फोन, घर का बना खाना और मिनरल वाटर तक उपलब्ध कराया जा रहा था।

मामले का खुलासा तब हुआ जब शिकायत मिलने पर जेल अधीक्षक अक्षय सिंह राजपूत ने अचानक निरीक्षण किया। जांच के दौरान अस्पताल वार्ड का ताला खुला मिला और अंदर ऐसी व्यवस्थाएं देखी गईं, जो जेल नियमों के बिल्कुल विपरीत थीं। बताया जा रहा है कि संबंधित कैदी को डॉक्टर के प्रमाण पत्र के आधार पर अस्पताल वार्ड में भर्ती किया गया था, जबकि उसकी हालत को लेकर अब सवाल उठ रहे हैं।

सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि कैदी के परिजनों को अटेंडेंट बनाकर उसके साथ रहने की अनुमति भी दे दी गई थी। नियमों के मुताबिक यह सुविधा बेहद सीमित परिस्थितियों में ही दी जाती है, लेकिन यहां यह एक ‘सुविधा पैकेज’ की तरह संचालित होती दिखी।

जेल प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए कैदी को दी जा रही सभी विशेष सुविधाओं पर रोक लगा दी और ड्यूटी में लापरवाही के आरोप में दो जेल प्रहरियों को निलंबित कर दिया। लेकिन इस कार्रवाई के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है—क्या इतना बड़ा खेल सिर्फ दो प्रहरियों की जानकारी में चल सकता था?  

जेल के भीतर ‘सुविधाओं का कारोबार’?

जेल से बाहर आ चुके कुछ पूर्व कैदियों का दावा है कि जेलों के भीतर सुविधाओं के नाम पर मोटी रकम वसूली जाती है। इसके बदले कैदियों को मोबाइल फोन, नशे का सामान, घर का खाना और अन्य आरामदायक सुविधाएं मुहैया कराई जाती हैं। आरोप यह भी हैं कि यह सब बिना उच्च अधिकारियों की जानकारी के संभव नहीं होता। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन अंबिकापुर जेल का यह मामला उन आरोपों को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ले आया है।

सवालों के घेरे में सिस्टम

इस पूरे घटनाक्रम ने जेल प्रबंधन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अगर एक कैदी को इस तरह की विशेष सुविधाएं मिल रही थीं, तो क्या यह व्यवस्था लंबे समय से चल रही थी? और अगर हां, तो जिम्मेदारी सिर्फ निचले स्तर के कर्मचारियों तक सीमित क्यों रहे?

अंबिकापुर सेंट्रल जेल का यह खुलासा केवल एक घटना नहीं, बल्कि उस सिस्टम की परतें खोलता है, जहां नियमों से ज्यादा ‘पहुंच’ और ‘पैसा’ असरदार साबित होते दिखते हैं। अब देखना होगा कि जांच का दायरा कितना व्यापक होता है और क्या इस बार जिम्मेदारी ऊपर तक तय हो पाती है या फिर मामला फिर से निचले स्तर तक सिमट कर रह जाएगा।

हनुमान कथा के मंच से धर्मांतरण के मुद्दे पर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का बयान सुर्खियों में


कोरबा। 
 TODAY छत्तीसगढ़  /  छत्तीसगढ़ के कोरबा ज़िले में इन दिनों चल रही हनुमान कथा के दौरान कथावाचक धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के एक बयान ने चर्चा को जन्म दिया है। कथा के मंच से उन्होंने धर्मांतरण के मुद्दे पर टिप्पणी करते हुए कहा कि “यहां आसपास हालेलुयाह वाले सक्रिय हैं,” और इसके खिलाफ कड़ी प्रतिक्रिया जताई।

उन्होंने आगे कहा कि हिंदुओं का धर्मांतरण अब नहीं होने दिया जाएगा और जो लोग पहले धर्मांतरण कर चुके हैं, उन्हें 1 अप्रैल तक “घर वापसी” का अवसर दिया जा रहा है। उन्होंने लोगों से अपनी परंपराओं की ओर लौटने की अपील भी की। कथा के दौरान उनका अलग अंदाज़ भी देखने को मिला, जब उन्होंने अंग्रेज़ी में “Welcome to stage, my dear” कहकर लोगों का अभिवादन किया। 

धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री इन दिनों कोरबा में हनुमान कथा कर रहे हैं, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुट रहे हैं। इस दौरान उन्होंने कोरबा की भी तारीफ करते हुए कहा कि यहां के कोयले का योगदान अन्य क्षेत्रों, विशेषकर मध्यप्रदेश में बिजली आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण है। उनके इस बयान को लेकर सामाजिक और राजनीतिक हलकों में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। हालांकि, प्रशासन की ओर से इस मामले में अब तक कोई औपचारिक टिप्पणी नहीं की गई है।

मुख्यमंत्री की पहल से पुनः जीवंत हुआ मल्हार महोत्सव, सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने बांधा समां


बिलासपुर।
  TODAY छत्तीसगढ़  /   ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक नगरी मल्हार में आयोजित मल्हार महोत्सव का शुभारंभ आज श्रद्धा, उत्साह और परंपरा के संगम के साथ हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत मां डिंडेश्वरी माता के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर की गई, जिसमें क्षेत्र की सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की गई।

मुख्य अतिथि बिल्हा विधायक श्री धरमलाल कौशिक ने अपने संबोधन में मल्हार की ऐतिहासिक महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह क्षेत्र प्राचीन काल से ही समृद्ध सांस्कृतिक एवं पुरातात्विक धरोहरों के लिए प्रसिद्ध रहा है। मल्हार महोत्सव मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की पहल पर ही फिर से शुरू हुआ है। उन्होंने बताया कि यहां हुई पुरातात्विक खोजों में ताम्रपाषाण काल के अवशेष प्राप्त हुए हैं, जो इस क्षेत्र की प्राचीन सभ्यता और जीवन शैली को दर्शाते हैं। प्राचीन मिट्टी के बर्तन, औजार एवं अन्य उपयोगी वस्तुएं उस समय के मानव जीवन, कृषि एवं संस्कृति की महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करती हैं। इस अवसर पर बेलतरा विधायक श्री सुशांत सिंह शुक्ला, मस्तुरी विधायक श्री दिलीप लहरिया, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री राजेश सूर्यवंशी एवं नगर पंचायत अध्यक्ष श्रीमती धनेश्वरी केवर्त,  कलेक्टर श्री संजय अग्रवाल, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री रजनेश सिंह, सीईओ जिला पंचायत श्री संदीप अग्रवाल,अपर कलेक्टर श्री शिव कुमार बैनर्जी,  सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित रहे। 

मेला ग्राउंड में आयोजित उत्सव के अंतर्गत प्रथम दिवस शाम 5.30 बजे से लेकर रात 11 बजे तक विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों की आकर्षक प्रस्तुतियां हुईं। कार्यक्रमों की श्रृंखला में लोक एवं शास्त्रीय कला का अद्भुत संगम देखने को मिला, जिसमें प्रदेश के कलाकारों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। करमा नृत्य (जय माता दी करमा दल, बेलतरा) से कार्यक्रम की शुरुआत हुई, इसके बाद हमर ज्योति पंथी पार्टी, मुंगेली द्वारा पंथी नृत्य प्रस्तुत किया गया। शास्त्रीय संगीत में डॉ. तोपराज पटेल ने अपनी प्रस्तुति दी, वहीं सृष्टि अंचल पाण्डेय, बिलासपुर द्वारा ओडिसी नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति दी गई। स्वाति सोनी लोककला मंच की प्रस्तुति ने भी दर्शकों को खूब आकर्षित किया। श्री शिवकुमार तिवारी एवं साथियों के कार्यक्रम के साथ ही सुनील सोनी स्टार नाइट ऑर्केस्ट्रा विशेष आकर्षण का केंद्र रहा।

कार्यक्रम के दौरान विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने दर्शकों का मन मोह लिया। लोकगीत, लोकनृत्य एवं रंगारंग प्रस्तुतियों से पूरा वातावरण उत्सवमय हो उठा। कार्यक्रम में भाग लेने वाले कलाकारों को अतिथियों द्वारा शॉल एवं श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया गया तथा उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना की गई। कल भी सांस्कृतिक कार्यक्रमों का सिलसिला जारी रहेगा। 


सरकारी रिसॉर्ट में चीतल का मांस पकाने के आरोप में 6 लोग गिरफ़्तार, 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल दाखिल


बिलासपुर।
  TODAY छत्तीसगढ़  /  ज़िले में वन विभाग ने वन्यजीव शिकार से जुड़े एक मामले में छह लोगों को गिरफ़्तार किया है। अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई बेलगहना क्षेत्र में स्थित कुरदर के एक ईको पर्यटन रिसॉर्ट में की गई, जहां कथित तौर पर चीतल (हिरण) का मांस पकाया जा रहा था।

वन विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि वनमंडल अधिकारी नीरज कुमार को इस संबंध में सूचना मिली थी। इसके बाद एक टीम गठित कर रिसॉर्ट पर छापा मारा गया। टीम का नेतृत्व वन परिक्षेत्र अधिकारी देव सिंह मरावी कर रहे थे, जबकि कार्रवाई उपवनमंडल अधिकारी अनिल भास्करन के मार्गदर्शन में की गई।

अधिकारियों के मुताबिक, मौके से पका हुआ मांस बरामद किया गया। प्रारंभिक जांच में इसे नर चीतल का मांस बताया गया है। इस मामले में जिन लोगों को गिरफ़्तार किया गया है, उनसे पूछताछ के दौरान कथित तौर पर शिकार और मांस पकाने की बात स्वीकार की गई।

वन विभाग ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम 1972 की विभिन्न धाराओं—9, 39, 44, 50 और 51—के तहत मामला दर्ज किया गया है। ये धाराएं वन्यजीवों के शिकार, उनके अवैध कब्जे और संबंधित गतिविधियों को दंडनीय बनाती हैं। 

गिरफ़्तार किए गए लोगों में रामकुमार टोप्पो, जनक राम बैगा, देवसिंह बैगा, राजेश बैगा, लखन सिंह और रजनीश सिंह शामिल हैं। सभी को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, बिलासपुर की अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।  वन विभाग का कहना है कि मामले की आगे जांच जारी है और इस तरह की गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए निगरानी बढ़ाई जाएगी।  

कार्रवाई में वन विभाग बेलगहना के परिक्षेत्र सहायक शिवकुमार पैकरा, बीएफओ संतकुमार वाकरे, पंकज साहू, सोमप्रकाश जयसिंधु, सावन यादव, वन विकास निगम रेंजर रवि जगत, डिप्टी रेंजर अरविंद बंजारे और नंदकिशोर सिंह की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

© all rights reserved TODAY छत्तीसगढ़ 2018
todaychhattisgarhtcg@gmail.com