रायगढ़: TODAY छत्तीसगढ़ / शहर की श्रीराम ट्रांसपोर्ट कंपनी से करीब ₹32 लाख की धोखाधड़ी के मामले में फरार चल रहे आरोपी प्रकाश मिश्रा को कोतवाली पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस के मुताबिक आरोपी ने सह आरोपी दीपक शर्मा के साथ मिलकर फर्जी बिल-वाउचर तैयार कर कंपनी से भुगतान कराया था। रकम अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर किए जाने का भी आरोप है।
यह कार्रवाई ‘ऑपरेशन क्लीन हंट’ के तहत की गई। पुलिस के अनुसार प्रकाश मिश्रा ने पुलिस के बढ़ते दबाव के बीच न्यायालय में आत्मसमर्पण किया। कोर्ट की अनुमति के बाद कोतवाली पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे रिमांड पर भेज दिया गया।
एक ही वाउचर नंबर से बनाए गए डुप्लीकेट बिल
पुलिस के मुताबिक मामला 24 मार्च 2026 को सामने आया, जब श्रीराम ट्रांसपोर्ट के संचालक कमल किशोर शाह ने कोतवाली थाने में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में कंपनी में काम करने वाले प्रकाश मिश्रा और दीपक शर्मा पर फर्जी बिल-वाउचर तैयार कर भुगतान लेने का आरोप लगाया गया।
कंपनी की जांच में एक ही क्रमांक के कई वाउचर सामने आए। जांच में आरोप है कि एक ही वाउचर नंबर पर अलग-अलग वाहनों के नाम से डुप्लीकेट वाउचर तैयार कर भुगतान कराया गया। सितंबर 2025 से लगातार यह फर्जीवाड़ा किए जाने की बात सामने आई। पुलिस ने मामले में अपराध क्रमांक 187/2026 दर्ज कर BNS की धारा 316(5), 338, 336(3), 340(2) और 60 के तहत जांच शुरू की।
दोपहिया और निजी वाहनों के नंबर ..
विवेचना के दौरान कंपनी के बिल-वाउचर में दर्ज वाहन नंबरों का क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय से सत्यापन कराया गया। पुलिस के अनुसार इनमें कई नंबर दोपहिया और छोटे निजी वाहनों के निकले, जिनका श्रीराम ट्रांसपोर्ट या माल परिवहन से कोई संबंध नहीं था।
संबंधित वाहन मालिकों से पूछताछ में भी उन्होंने परिवहन कंपनी के लिए किसी तरह का काम करने से इनकार किया। पुलिस का कहना है कि इससे फर्जी बिल-वाउचर के जरिए भुगतान हासिल किए जाने के आरोपों को जांच में आधार मिला।
सह आरोपी ने पूछताछ में बताई ..
इस मामले में पुलिस ने सह आरोपी दीपक शर्मा को 29 जुलाई 2026 को गिरफ्तार किया था। पुलिस के मुताबिक पूछताछ में उसने प्रकाश मिश्रा के साथ मिलकर फर्जी बिल-वाउचर तैयार करने और अलग-अलग खातों में भुगतान कराने की बात बताई।
पुलिस के अनुसार, जिन खातों में रकम भेजी जाती थी, वहां से कमीशन काटकर शेष राशि प्रकाश मिश्रा और दीपक शर्मा द्वारा बताए गए बैंक खातों, QR कोड और फोन-पे नंबरों पर वापस ट्रांसफर की जाती थी।
पुलिस के मुताबिक दीपक शर्मा ने करीब ₹32 लाख की रकम में से लगभग ₹15 लाख खुद रखने और ₹16-17 लाख प्रकाश मिश्रा को देने की जानकारी दी थी। इन बयानों और लेनदेन से जुड़े तथ्यों की जांच जारी है।
डिजिटल पेमेंट की भी जांच
गिरफ्तार प्रकाश मिश्रा से पूछताछ में पुलिस को फर्जी बिल-वाउचर तैयार करने और कथित धोखाधड़ी की रकम को PayTM समेत डिजिटल माध्यमों से हासिल करने के संबंध में जानकारी मिलने की बात कही गई है। पुलिस अब इस्तेमाल किए गए बैंक खातों, डिजिटल ट्रांजैक्शन और मामले में जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।

