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पेट्रोल पंप का एलओआई रद्द, लेकिन कंपनी को देना होगा मुआवजा: हाईकोर्ट

राज्य राजमार्ग पर 'रूरल' पेट्रोल पंप नहीं, लेकिन एचपीसीएल की देरी पर हाईकोर्ट सख्त

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा है कि राष्ट्रीय या राज्य राजमार्ग पर ग्रामीण श्रेणी का पेट्रोल पंप स्थापित नहीं किया जा सकता। हालांकि, एचपीसीएल की जांच में देरी और लापरवाही के कारण महिला आवेदक को हुए नुकसान को देखते हुए कंपनी को एक लाख रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया गया।
बिलासपुर।  TODAY छत्तीसगढ़  / छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि तेल कंपनियों की नीति के अनुसार राष्ट्रीय या राज्य राजमार्ग पर 'रूरल कैटेगरी' का पेट्रोल पंप स्थापित नहीं किया जा सकता। अदालत ने हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) द्वारा जारी आशय पत्र (एलओआई) निरस्त करने के निर्णय को सही माना, लेकिन जांच में लापरवाही और अनावश्यक देरी के कारण कंपनी को महिला आवेदक को एक लाख रुपये मुआवजा देने का निर्देश भी दिया।

मामले के अनुसार, एचपीसीएल ने वर्ष 2018 में ग्रामीण श्रेणी के पेट्रोल पंप के लिए आवेदन आमंत्रित किए थे। आवेदक अनंता चौधरी ने सरायपाली-पदमपुर मार्ग स्थित ग्राम नवागांव की भूमि प्रस्तावित की थी। दस्तावेजों की जांच और स्थल निरीक्षण के बाद कंपनी ने दिसंबर 2020 में उनके पक्ष में आशय पत्र जारी कर दिया।

एलओआई मिलने के बाद महिला ने सुरक्षा राशि जमा की, कलेक्टर से एनओसी प्राप्त की, भूमि का सीमांकन कराया, बैंक से ऋण लिया, निर्माण कार्य शुरू कराया और ट्रांसफार्मर भी स्थापित करा दिया। इसी बीच एचपीसीएल ने नोटिस जारी कर बताया कि प्रस्तावित भूमि राज्य राजमार्ग-16 पर स्थित है, जबकि ग्रामीण श्रेणी के पेट्रोल पंप राजमार्ग पर स्थापित नहीं किए जा सकते। स्पष्टीकरण अस्वीकार करते हुए कंपनी ने फरवरी 2022 में एलओआई रद्द कर दिया।

इस निर्णय को चुनौती देते हुए महिला ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सुनवाई के दौरान एचपीसीएल ने दलील दी कि डीलर चयन दिशा-निर्देशों के अनुसार राष्ट्रीय या राज्य राजमार्ग पर ग्रामीण श्रेणी के पेट्रोल पंप की अनुमति नहीं है। अदालत ने इस तर्क को स्वीकार करते हुए कहा कि नियमों के विपरीत पेट्रोल पंप स्थापित करने का आदेश नहीं दिया जा सकता।

हालांकि, हाईकोर्ट ने यह भी माना कि यदि कंपनी प्रारंभिक स्तर पर ही भूमि की स्थिति का सही सत्यापन कर लेती, तो आवेदक को आर्थिक और मानसिक नुकसान नहीं उठाना पड़ता। इसी आधार पर अदालत ने एचपीसीएल की लापरवाही मानते हुए महिला को एक लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया।

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