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कमीशन के चक्कर में फंसा क़ानूनी शिकंजा: भिलाई-खुर्सीपार इलाक़े में पुलिस की दबिश

बैंक पासबुक, एटीएम और 11 मोबाइल ज़ब्त. पढ़ें साइबर ठगी से जुड़ी यह पूरी रिपोर्ट

TODAY छत्तीसगढ़  /  छत्तीसगढ़ के दुर्ग ज़िले में पुलिस ने साइबर ठगी के एक बड़े नेटवर्क का ख़ुलासा किया है. पुलिस ने साइबर अपराधियों को पैसों के अवैध लेनदेन के लिए 'म्यूल अकाउंट' (किराए के बैंक खाते) उपलब्ध कराने वाले एक संगठित गिरोह के 23 सदस्यों को हिरासत में लिया है.

अधिकारियों के अनुसार, पकड़े गए लोग महज़ कुछ कमीशन के लालच में अपने और अपने परिचितों के बैंक खाते साइबर ठगों को सौंप देते थे.

कमीशन के लालच में देते थे बैंक खाते

छावनी थाना पुलिस की विवेचना और तकनीकी जांच में यह बात सामने आई थी कि इलाक़े के कुछ लोग साइबर ठगी की रक़म को ठिकाने लगाने में साइबर माफ़ियाओं की मदद कर रहे हैं.

  • क्या था तरीक़ा: पूछताछ में सामने आया कि ये लोग साइबर ठगी से प्राप्त अवैध धन के लेनदेन और उसे अलग-अलग खातों में ट्रांसफ़र करने के लिए अपराधियों को बैंक खाते मुहैय्या कराते थे. इसके एवज़ में उन्हें एक तय कमीशन दिया जाता था.

  • तकनीकी साक्ष्यों और बैंक खातों के विश्लेषण के आधार पर पुलिस ने 29 जून 2026 को भिलाई, खुर्सीपार और छावनी सहित अलग-अलग इलाक़ों में दबिश देकर 23 लोगों को हिरासत में लिया.

ज़ब्ती और पुलिस की क़ानूनी कार्रवाई

छावनी पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(2), 318(3) और 318(4) के तहत मुक़दमा दर्ज़ किया है.

पुलिस के मुताबिक़, हिरासत में लिए गए 23 लोगों में से राकेश गुप्ता, के. हरीश, योगेश राजभर और लखविन्दर सिंह सहित 15 मुख्य अभियुक्तों पर आगे की क़ानूनी कार्रवाई की गई है. वहीं, 8 अन्य लोगों (जिनमें कुछ बुज़ुर्ग और महिलाएं शामिल हैं) को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 35(1) के तहत नोटिस देकर छोड़ दिया गया है.

  • क्या-क्या हुआ ज़ब्त: पुलिस ने अभियुक्तों के पास से 11 मोबाइल फ़ोन, 3 एटीएम कार्ड, 3 बैंक पासबुक, 3 चेकबुक, 3 आधार कार्ड और अन्य अहम इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेज़ बरामद किए हैं.

इस बड़े ख़ुलासे के बाद दुर्ग पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी लालच या कमीशन के चक्कर में अपने बैंक खाते, एटीएम, चेकबुक या सिम कार्ड किसी अन्य व्यक्ति को इस्तेमाल के लिए न दें. यदि उन खातों का उपयोग साइबर अपराध में होता है, तो खाताधारक को भी क़ानूनी कार्रवाई और जेल का सामना करना पड़ सकता है.

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