चंद्रशेखर बाजपेयी ने कहा कि जब कोई युवा अधिवक्ता विधिक सेवा की शुरुआत करता है, तो शुरुआती कुछ वर्षों में उसे आर्थिक और व्यावसायिक दोनों तरह के संघर्ष का सामना करना पड़ता है। इस दौरान न तो पर्याप्त मुकदमे मिलते हैं और न ही नियमित आय का स्रोत बन पाता है। ऐसे समय में उन्हें सहयोग और मार्गदर्शन की सबसे अधिक आवश्यकता होती है।
उन्होंने कहा कि यदि उन्हें अधिवक्ता संघ का नेतृत्व करने का अवसर मिला तो नवोदित अधिवक्ताओं के हितों की रक्षा और उनके लिए सहयोगात्मक माहौल तैयार करना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा। साथ ही उन्होंने अधिवक्ता साथियों से आगामी चुनाव में समर्थन देकर उन्हें सेवा का अवसर देने की अपील की। आपको बता दें कि जिला अधिवक्ता संघ का की नई कार्यकारिणी के लिए 25 जुलाई को मतदान होना है।

