TODAY छत्तीसगढ़ / छत्तीसगढ़ सरकार ने भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के वरिष्ठ अधिकारी बद्रीनारायण मीणा को बस्तर रेंज का नया पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) नियुक्त किया है. राज्य के गृह (पुलिस) विभाग ने इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी कर दिया है.
यह प्रशासनिक फेरबदल बस्तर के निवर्तमान आईजी सुंदरराज पी. के केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) में जाने के बाद किया गया है. माओवादी प्रभाव वाले क्षेत्रों में शामिल होने के कारण सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के दृष्टिकोण से बस्तर रेंज के आईजी का पद बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है.
नवा रायपुर से जगदलपुर भेजे गए बद्रीनारायण मीणा
गृह विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार, वर्ष 2004 बैच के आईपीएस अधिकारी बद्रीनारायण मीणा अब तक पुलिस मुख्यालय (PHQ) नवा रायपुर में पुलिस महानिरीक्षक के पद पर तैनात थे. उन्हें अब अस्थायी रूप से आगामी आदेश तक पुलिस महानिरीक्षक, बस्तर रेंज (जगदलपुर) के पद पर पदस्थ किया गया है. मीणा पर अब बस्तर क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था, नक्सल विरोधी अभियानों और स्थानीय पुलिस प्रशासन के समन्वय की मुख्य ज़िम्मेदारी होगी.
सुंदरराज पी. अब एनआईए में संभालेंगे ज़िम्मेदारी
बस्तर रेंज में लंबे समय तक आईजी रहे वर्ष 2003 बैच के आईपीएस अधिकारी सुंदरराज पी. को केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) में इंस्पेक्टर जनरल (IG) के पद पर नियुक्त किया है. इसके बाद से ही बस्तर आईजी का पद रिक्त था.
सुंदरराज पी. को छत्तीसगढ़ में माओवाद विरोधी रणनीतियों और अभियानों के प्रमुख चेहरों में गिना जाता है. उनके कार्यकाल के दौरान सुरक्षा बलों ने बस्तर के कई दुर्गम और अंदरूनी इलाक़ों में अभियान चलाए, जिससे माओवादी संगठनों के प्रभाव क्षेत्र में कमी आई.
सुरक्षा और विकास की दोहरी रणनीति
वन विभाग और गृह विभाग के समन्वय से जुड़े जानकारों के मुताबिक़, सुंदरराज पी. का कार्यकाल केवल सशस्त्र कार्रवाइयों तक सीमित नहीं था. उनके कार्यकाल की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार रहीं:
खुफिया तंत्र और स्थानीय जुड़ाव: उन्होंने ज़मीनी स्तर पर खुफिया तंत्र (Intelligence Network) को मज़बूत किया और स्थानीय आदिवासियों व युवाओं को सुरक्षा अभियानों और मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया.
सुरक्षा कैंपों की स्थापना: बस्तर के उन अंदरूनी और संवेदनशील क्षेत्रों में नए सुरक्षा कैंप स्थापित किए गए, जिन्हें कभी माओवादियों का सुरक्षित गढ़ माना जाता था.
बुनियादी विकास: अबूझमाड़ जैसे पहुंचविहीन इलाक़ों में सुरक्षा बलों की निगरानी में सड़कों का निर्माण और अन्य विकास कार्यों को आगे बढ़ाया गया.
आत्मसमर्पण: उनके कार्यकाल के दौरान बस्तर परिदृश्य में बड़ी संख्या में माओवादियों के आत्मसमर्पण और पुनर्वास की नीतियां प्रभावी रूप से लागू की गईं.
राज्य सरकार के आदेश के मुताबिक़, बद्रीनारायण मीणा की यह पदस्थापना तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है और वे जल्द ही जगदलपुर पहुंचकर अपना कार्यभार संभालेंगे.

