ऐतिहसिक नगरी मल्हार में 2000 वर्ष पुराना ताम्रपत्र मिला, इतिहास की अनमोल धरोहर उजागर


बिलासपुर। 
TODAY छत्तीसगढ़  /  ज्ञान भारतम अभियान के तहत ऐतिहासिक नगर मल्हार में एक  महत्वपूर्ण खोज सामने आई है। यहाँ रहने वाले श्री संजीव पाण्डेय के निवास पर 3 किलोग्राम से अधिक वजन का एक दुर्लभ ताम्रपत्र प्राप्त हुआ है, जिस पर लगभग 2000 वर्ष पुरानी ब्राह्मी लिपि तथा पाली भाषा में लेख उत्कीर्ण हैं। यह ताम्रपत्र ऐतिहासिक और पुरातात्विक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 

      ब्राह्मी लिपि भारत की प्राचीनतम लिपियों में से एक है, जिसका उपयोग मौर्य काल से प्रारंभ होकर कई शताब्दियों तक होता रहा। वहीं पाली भाषा का संबंध मुख्यतः बौद्ध धर्म के साहित्य और शिक्षाओं से जुड़ा रहा है, जिससे इस खोज का धार्मिक महत्व भी बढ़ जाता है।

   विशेषज्ञों के अनुसार, प्राचीन समय में ऐसे ताम्रपत्रों का उपयोग भूमि दान, राजकीय आदेश या धार्मिक घोषणाओं के आधिकारिक दस्तावेज के रूप में किया जाता था। इस ताम्रपत्र का वैज्ञानिक परीक्षण एवं विस्तृत अध्ययन किए जाने पर उस काल की सामाजिक संरचना, प्रशासनिक व्यवस्था और धार्मिक परंपराओं के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हो सकती है। ज्ञान भारतम अभियान के तहत यह खोज न केवल मल्हार क्षेत्र की समृद्ध ऐतिहासिक विरासत को उजागर करती है, बल्कि शोधकर्ताओं, इतिहासकारों और पुरातत्वविदों के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण सिद्ध हो सकती है।

     उल्लेखनीय है कि संस्कृति  मंत्रालय द्वारा ज्ञान भारतम् अभियान के तहत देश की प्राचीन और दुर्लभ पांडुलिपियों के संरक्षण के लिए व्यापक अभियान चलाया जा रहा है। संस्कृति मंत्रालय के मार्गदर्शन में यह पहल गांव-गांव तक पहुंच रही है, जहां ग्राम सभाओं के माध्यम से लोगों को अपनी पुरानी पांडुलिपियों को सुरक्षित रखने और उन्हें सामने लाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इस अभियान का उद्देश्य भारत की समृद्ध ज्ञान परंपरा, साहित्य, विज्ञान, चिकित्सा और दर्शन से जुड़े अमूल्य दस्तावेजों का दस्तावेजीकरण और संरक्षण करना है। विशेषज्ञों द्वारा पांडुलिपियों की पहचान कर उनका डिजिटलीकरण किया जा रहा है, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए इस विरासत को सुरक्षित रखा जा सके। यह अभियान न केवल सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि देश की ऐतिहासिक और बौद्धिक संपदा को पुनर्जीवित करने का भी एक सशक्त प्रयास है।

कैमरे की कलम: गुमनामी के साये में सुबह का सिपाही


सुबह की पहली किरण जब क्षितिज पर दस्तक देती है, तब शहर अब भी आधी नींद में होता है। कहीं चाय चढ़ रही होती है, कहीं अलार्म बजने की तैयारी में होता है, और कहीं लोग अभी सपनों में खोए रहते हैं। लेकिन इसी अधजगी दुनिया में कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जिनका दिन बहुत पहले शुरू हो चुका होता है। ये वे लोग हैं, जो हमारे दरवाजे तक हर सुबह अखबार पहुँचाते हैं—अखबार हॉकर।

हमारे लिए अखबार महज़ खबरों का पुलिंदा हो सकता है, लेकिन उनके लिए यह रोज़ी-रोटी का जरिया है, जीवन का संघर्ष है और जिम्मेदारी का एक ऐसा बोझ है, जिसे वे बिना किसी शोर-शराबे के ढोते रहते हैं। जब शहर सो रहा होता है, तब हॉकर जाग चुके होते हैं। सुबह के तीन या चार बजे का समय—जब ठंड हड्डियों तक चुभती है या गर्मी की रात अभी ढली नहीं होती—वे अपने दिन की शुरुआत करते हैं। नींद अधूरी होती है, शरीर थका हुआ होता है, लेकिन जिम्मेदारियाँ उन्हें आगे बढ़ने को मजबूर करती हैं।

अखबार एजेंसी तक पहुँचना, बंडल उठाना, उन्हें अलग-अलग मोहल्लों के हिसाब से बांटना—यह सब काम इतनी तेजी और सटीकता से होता है कि मानो यह कोई अभ्यास किया हुआ युद्ध हो। हर अखबार सही घर तक पहुँचना चाहिए, हर ग्राहक की अपेक्षा पूरी होनी चाहिए। एक छोटी सी चूक भी शिकायत में बदल सकती है। हॉकर का सबसे बड़ा दुश्मन समय होता है। उन्हें हर हाल में सूरज निकलने से पहले अपना काम पूरा करना होता है। साइकिल, मोटरसाइकिल या कभी-कभी पैदल—वे गलियों, सड़कों और मोहल्लों में दौड़ते रहते हैं। बारिश हो तो अखबार बचाना भी चुनौती बन जाता है। हवा तेज हो तो पन्ने उड़ने का डर रहता है। ठंड में उंगलियां सुन्न हो जाती हैं और गर्मी में पसीना आँखों में चुभता है। लेकिन इन सबके बावजूद, उनके काम की रफ्तार कभी धीमी नहीं पड़ती।

यह विडंबना ही है कि जो व्यक्ति हर सुबह हमें देश-दुनिया की खबरों से जोड़ता है, उसकी अपनी आर्थिक स्थिति अक्सर कमजोर होती है। अखबार बांटने के बदले उन्हें बहुत कम पैसा मिलता है—इतना कि उससे गुजारा करना भी मुश्किल हो जाता है। अक्सर यह काम वे किसी और नौकरी के साथ करते हैं, या फिर उनके परिवार के अन्य सदस्य भी किसी छोटे-मोटे काम में लगे होते हैं। कई बार बच्चों की पढ़ाई भी इसी संघर्ष में पीछे छूट जाती है।

समाज में हर काम का एक महत्व होता है, लेकिन हर काम को समान सम्मान नहीं मिलता। हॉकर का काम भी ऐसा ही है—जरूरी तो है, लेकिन सम्मान के मामले में पीछे छूट जाता है। हम अक्सर दरवाजा खोलते ही अखबार उठा लेते हैं, बिना यह सोचे कि उसे वहाँ तक पहुँचाने में कितनी मेहनत लगी होगी। कभी-कभी शिकायतें भी कर देते हैं—अखबार देर से आया, गीला था या सही जगह नहीं रखा गया। लेकिन क्या हम कभी उनके हालात समझने की कोशिश करते हैं?

अखबार हॉकर सिर्फ अखबार नहीं बाँटते, वे विश्वास भी बाँटते हैं। हर घर उनसे एक तय समय पर अखबार की उम्मीद करता है। यह भरोसा उनके कंधों पर एक अदृश्य जिम्मेदारी की तरह होता है। कई बार वे बीमार होते हुए भी काम पर निकलते हैं, क्योंकि उन्हें पता है कि अगर वे नहीं गए, तो कई घरों में सुबह अधूरी रह जाएगी। यह सिर्फ काम नहीं, बल्कि एक आदत और एक भरोसा है, जिसे वे निभाते हैं।

आज के डिजिटल युग में, जब खबरें मोबाइल स्क्रीन पर पल भर में उपलब्ध हो जाती हैं, अखबार हॉकर का काम और भी कठिन हो गया है। लोगों ने अखबार पढ़ना कम कर दिया है, जिससे उनकी आय पर सीधा असर पड़ा है। लेकिन इसके बावजूद, वे हार नहीं मानते। वे जानते हैं कि अभी भी बहुत से लोग सुबह की चाय के साथ कागज़ की खुशबू और छपी हुई खबरों का आनंद लेना पसंद करते हैं।

अगर हम गहराई से सोचें, तो हॉकर समाज को जोड़ने में एक अहम भूमिका निभाते हैं। वे हर दिन लाखों लोगों तक जानकारी पहुँचाते हैं, जागरूकता फैलाते हैं और लोकतंत्र की नींव को मजबूत करते हैं। उनका काम भले ही छोटा लगे, लेकिन उसका प्रभाव बहुत बड़ा होता है। वे उस सूचना श्रृंखला की पहली कड़ी हैं, जिसके बिना खबरें लोगों तक नहीं पहुँच सकतीं।

इन सबके बीच, हॉकर भी इंसान हैं—उनके भी सपने हैं, इच्छाएँ हैं और परेशानियाँ हैं। कोई अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा देना चाहता है, कोई अपने घर की हालत सुधारना चाहता है, तो कोई सिर्फ एक स्थिर जीवन की उम्मीद करता है लेकिन अक्सर ये सपने जिम्मेदारियों और संघर्षों के बोझ तले दब जाते हैं। यह जरूरी है कि हम इन गुमनाम नायकों को पहचानें और उनके प्रति संवेदनशील बनें। एक छोटी सी मुस्कान, एक धन्यवाद, या उनके काम की सराहना—यह सब उनके लिए बहुत मायने रखता है। सरकार और समाज को भी उनके लिए बेहतर योजनाएँ बनानी चाहिए—जैसे बीमा, स्वास्थ्य सुविधाएँ और उचित वेतन। क्योंकि जब तक उनके जीवन में सुधार नहीं होगा, तब तक इस व्यवस्था की नींव कमजोर ही रहेगी।



ओवरटेक विवाद बना मारपीट का कारण: प्रभारी कुलपति से अभद्रता, दो आरोपी गिरफ्तार


बिलासपुर।
  TODAY छत्तीसगढ़  /  शहर में रोड रेज का एक मामला सामने आया है, जहां ओवरटेक करने की बात को लेकर विवाद इतना बढ़ गया कि मारपीट तक पहुंच गया। इस मामले में तोरवा पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया है।

मिली जानकारी के अनुसार, अटल बिहारी विश्वविद्यालय बिलासपुर के प्रभारी कुलपति 23 अप्रैल की सुबह करीब 9 बजे अपने निजी वाहन से विश्वविद्यालय जा रहे थे। जब वे स्वास्तिक अस्पताल के पास पहुंचे, तभी एक फॉर्च्यूनर वाहन (क्रमांक CG 10 AT 0017) के चालक और उसके साथी ने ओवरटेक को लेकर विवाद शुरू कर दिया। आरोप है कि आरोपियों ने गाली-गलौज की, अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया और मारपीट की घटना को अंजाम दिया। इस घटना की रिपोर्ट पर थाना तोरवा में अपराध क्रमांक 216/2026 के तहत मामला दर्ज किया गया।

पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ धारा 296, धारा 351(3) और धारा 3(5) बीएनएस के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की। मामले की गंभीरता को देखते हुए तोरवा पुलिस ने त्वरित जांच शुरू की और फॉर्च्यूनर वाहन की जानकारी आरटीओ कार्यालय से प्राप्त की। जांच में वाहन स्वामी का पता मस्तुरी क्षेत्र का मिला। पूछताछ में सामने आया कि घटना वाहन स्वामी के साले द्वारा की गई थी। इसके बाद पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया और प्रतिबंधात्मक कार्रवाई करते हुए न्यायालय में पेश किया।

मोबाइल दुकान में घुसकर लूट: चाकू दिखाकर वारदात करने वाला आदतन बदमाश गिरफ्तार


राजनांदगांव।
  TODAY छत्तीसगढ़  /  चिखली चौकी क्षेत्र में एक मोबाइल दुकान में चाकू के दम पर लूट की वारदात को अंजाम देने वाले आदतन बदमाश को पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी के कब्जे से लूट की रकम और वारदात में प्रयुक्त चाकू बरामद किया गया है।

प्रार्थी ने चौकी चिखली में रिपोर्ट दर्ज कराई कि 24 अप्रैल की रात आरोपी सूरज वाहने अपने एक साथी के साथ उसकी मोबाइल दुकान में घुसा। आरोप है कि आरोपी ने गाली-गलौज शुरू कर दी, चाकू दिखाकर धमकाया और प्रार्थी की जेब से ₹3000 लूट लिए और दुकान के गल्ले से भी नगदी निकाल ली। जब प्रार्थी के साथी ने बीच-बचाव किया, तो आरोपियों ने उसके साथ मारपीट भी की। मामले में पुलिस ने धारा 311, 296, 115(2), 351(2), 3(5) बीएनएस 25, 27 आर्म्स एक्ट के तहत अपराध पंजीबद्ध कर जांच शुरू की।

पुलिस अधीक्षक अंकिता शर्मा के निर्देशन और अधिकारियों के मार्गदर्शन में चिखली पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को दीनदयाल कॉलोनी से गिरफ्तार किया। पूछताछ में आरोपी ने अपने साथी के साथ मिलकर लूट की वारदात करना स्वीकार किया। उसने बताया कि लूट की रकम का बंटवारा कर खर्च कर दिया गया, जबकि उसके पास ₹1000 शेष मिले। पुलिस के अनुसार आरोपी सूरज वाहने (29 वर्ष) के खिलाफ पहले भी लूट, मारपीट और आर्म्स एक्ट के कई मामले दर्ज हैं। फरार दूसरे आरोपी की तलाश जारी है।

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