बिलासपुर: TODAY छत्तीसगढ़ / छत्तीसगढ़ के अचानकमार टाइगर रिजर्व में पर्यटन को नई रफ्तार देने की तैयारी है। अब अमरकंटक के रास्ते मध्य प्रदेश की ओर से आने वाले पर्यटकों को अचानकमार पहुंचने के लिए कोटा और शिवतराई होकर लंबा रास्ता तय नहीं करना पड़ेगा। केंवची में नए बफर सफारी प्रवेश द्वार और नवीन सफारी मार्ग की शुरुआत से पर्यटक सीधे टाइगर रिजर्व के बफर क्षेत्र में हर दिन पहुंच सकेंगे। इससे न केवल पर्यटकों का समय और दूरी बचेगी, बल्कि अमरकंटक, अचानकमार और रतनपुर को जोड़कर एक नया अंतरराज्यीय पर्यटन सर्किट विकसित करने की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।
छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर आज रविवार 1 नवम्बर को अचानकमार टाइगर रिजर्व के पर्यटन सत्र 2026-27 का विधिवत शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर केंवची बफर सफारी प्रवेश द्वार और नए सफारी मार्ग का वर्चुअल लोकार्पण किया गया। केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू, छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री अरुण साव और वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने संयुक्त रूप से इस नई सुविधा का लोकार्पण किया। वहीं, केंवची में आयोजित मुख्य समारोह में तखतपुर विधायक धरमजीत सिंह ने सफारी वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
इस ख़ास अवसर पर वर्चुअल माध्यम से जुड़े केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, उप मुख्यमंत्री अरुण साव और वन मंत्री केदार कश्यप ने ग्रामीणों के साथ-साथ आम जनमानस से अपील की कि वे जंगल और वन्यप्राणियों के संरक्षण में अपनी नैतिक जिम्मेदारियों का निर्वहन करें। वन मंत्री ने कहा कि वन अमला और सरकार वन्य प्राणियों के संरक्षण संवर्धन की दिशा में लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने उम्मीद जताई कि अचानकमार टाईगर रिजर्व आने वाले समय में देश के अन्य टाइगर रिजर्व की बराबरी में मजबूती से खड़ा दिखाई देगा साथ ही पर्यटन को बढ़ावा मिलने से स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे।
अमरकंटक से सीधे जंगल सफारी का मिलेगा मौका
अचानकमार टाइगर रिजर्व अपनी समृद्ध जैव विविधता, घने जंगलों और प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है। अमरकंटक और मध्य प्रदेश के आसपास के क्षेत्रों से यहां पर्यटकों के पहुंचने की अच्छी संभावनाएं रही हैं, लेकिन सीधे पहुंच मार्ग की सुविधा नहीं होने के कारण पर्यटकों को कोटा और शिवतराई की ओर से लंबा सफर तय करना पड़ता था।
केंवची में नया सफारी प्रवेश द्वार शुरू होने से यह समस्या काफी हद तक दूर होने की उम्मीद है। अब अमरकंटक की ओर से आने वाले पर्यटक केंवची पहुंचकर सीधे बफर क्षेत्र में जंगल सफारी का आनंद ले सकेंगे। इससे अचानकमार की पहुंच दूसरे राज्यों के पर्यटकों तक आसान होगी और नए पर्यटन विकल्प भी विकसित होंगे।
अमरकंटक-अचानकमार-रतनपुर बनेगा नया टूरिज्म सर्किट
इस पहल का सबसे बड़ा फायदा क्षेत्रीय पर्यटन को एक साथ जोड़ने में मिल सकता है। अमरकंटक की धार्मिक और प्राकृतिक खूबसूरती, अचानकमार के घने जंगल और रतनपुर के ऐतिहासिक एवं धार्मिक स्थलों को एक पर्यटन सर्किट के रूप में विकसित किया जा सकता है।
इससे दूसरे राज्यों से आने वाले पर्यटक एक ही यात्रा में तीनों प्रमुख पर्यटन स्थलों का भ्रमण कर सकेंगे। पर्यटकों के लिए यात्रा के नए विकल्प तैयार होंगे और क्षेत्र में उनके ठहरने की अवधि बढ़ने की संभावना रहेगी। इसका सीधा लाभ होटल, रिसॉर्ट, स्थानीय परिवहन, खानपान और अन्य पर्यटन आधारित कारोबार को मिल सकता है।
स्थानीय युवाओं के लिए खुलेंगे रोजगार के रास्ते
केंवची में नए प्रवेश द्वार की शुरुआत को केवल पर्यटन सुविधा के विस्तार के रूप में नहीं देखा जा रहा है। इसके जरिए जंगल से लगे गांवों में रहने वाले ग्रामीणों और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करने की भी उम्मीद है।
सफारी वाहनों के संचालन, स्थानीय गाइड, पर्यटकों के ठहरने की व्यवस्था, रिसॉर्ट, खानपान और आतिथ्य सेवाओं से जुड़े कार्यों में स्थानीय लोगों की भागीदारी बढ़ सकती है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने के साथ पर्यटन से होने वाली आय का लाभ स्थानीय समुदायों तक पहुंचाने का रास्ता भी तैयार होगा।
वन संरक्षण के साथ पर्यटन विकास पर जोर
कार्यक्रम में मौजूद अतिथियों ने कहा कि अचानकमार टाइगर रिजर्व छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक विरासत और समृद्ध जैव विविधता का महत्वपूर्ण केंद्र है। यहां पर्यटन का विकास वन एवं वन्यजीव संरक्षण के नियमों के अनुरूप होना चाहिए। नियंत्रित और जिम्मेदार ईको-टूरिज्म के माध्यम से पर्यटकों को प्रकृति के करीब लाने के साथ वनवासी समुदायों की आर्थिक और सामाजिक स्थिति मजबूत की जा सकती है।
तखतपुर विधायक धरमजीत सिंह ने कहा कि केंवची में नया प्रवेश द्वार शुरू होने से अमरकंटक और मध्य प्रदेश की ओर से आने वाले पर्यटकों को सीधी सुविधा मिलेगी। इससे क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय युवाओं के लिए गाइड, वाहन संचालन तथा आतिथ्य सेवाओं में रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
अचानकमार टाइगर रिजर्व की मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) और फील्ड डायरेक्टर श्रीमती प्रियंका पांडेय ने कार्यक्रम में मौजूद जन मानस से उम्मीद जताई कि वे वन विभाग की सकारत्मक कोशिशों में परस्पर सहयोग करके जंगल और वन्य प्राणियों की सुरक्षा करेंगे। श्रीमती पांडेय ने इस ख़ास अवसर पर कहा कि आज केंवची से जिस प्रवेश द्वार का एटीआर की बफर सफारी के लिए शुभारम्भ हो रहा है वो इस टाइगर रिजर्व के उज्ज्वल भविष्य में मील का पत्थर साबित होगा, बशर्ते प्रत्येक व्यक्ति अपनी जिम्मेदारियों को समझकर जंगल और वन्यप्राणियों की सुरक्षा में अपनी भूमिका निभाए।
पर्यटकों की बढ़ती संख्या के बीच संरक्षण होगी बड़ी चुनौती
पर्यटन की नई संभावनाओं के साथ अचानकमार के सामने वन्यजीव संरक्षण की जिम्मेदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण होगी। पर्यटकों की संख्या बढ़ने पर जंगल में वाहनों की आवाजाही नियंत्रित रखना, वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखना और जंगल की शांति बनाए रखना प्रबंधन के लिए बड़ी चुनौती होगी।
सफारी के दौरान निर्धारित नियमों का पालन, प्लास्टिक कचरे पर रोक, वन्यजीवों से सुरक्षित दूरी और पर्यावरण के अनुकूल पर्यटन गतिविधियों को प्राथमिकता देनी होगी। पर्यटन का विस्तार तभी सफल माना जाएगा, जब इससे स्थानीय लोगों की आजीविका मजबूत होने के साथ जंगल और वन्यजीवों का संरक्षण भी सुनिश्चित हो। रिजर्व प्रबंधन ने पर्यटकों से अपील की है कि वे जंगल भ्रमण के दौरान वन एवं वन्यजीव संरक्षण से जुड़े सभी नियमों का पालन करें और स्वच्छ एवं जिम्मेदार पर्यटन को बढ़ावा दें।
समृद्ध जैव विविधता और घने जंगल
अधिकारी और जनप्रतिनिधि रहे मौजूद
कार्यक्रम में अतिरिक्त मुख्य सचिव मनोज पिंगुआ, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख अरुण पाण्डेय तथा प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) ओपी यादव वर्चुअल माध्यम से शामिल हुए। वहीं, कार्यक्रम स्थल पर मुख्य वन्यजीव संरक्षक प्रियंका पाण्डेय, जीपीएम कलेक्टर विजय दयाराम, पुलिस अधीक्षक मनोज खिलारी, मरवाही वन मंडलाधिकारी कुमार निशांत, अचानकमार टाइगर रिजर्व के प्रभारी उप संचालक तन्मय कौशिक, जिला पंचायत अध्यक्ष समीरा पैकरा, उपाध्यक्ष राजा उपेन्द्र बहादुर, जिला पंचायत सदस्य भंवर सिंह गोवास और गौरेला नगर पंचायत अध्यक्ष मुकेश दुबे सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, अधिकारी और ग्रामीण उपस्थित रहे।



