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अस्पताल के दरवाज़े पर दे मारा पत्थर... गुरु नानक चौक पर इस व्यक्ति के व्यवहार से क्यों परेशान हैं लोग ?

इलाज की कमी या परिजनों की लापरवाही ? अस्पताल में तोड़फोड़ के बाद सुरक्षा की मांग तेज़

 TODAY छत्तीसगढ़  /   छत्तीसगढ़ के बिलासपुर शहर के तोरवा थाना क्षेत्र के अंतर्गत गुरु नानक चौक पर स्थित 'लाइफ केयर अस्पताल' में एक व्यक्ति द्वारा तोड़फोड़ किए जाने का मामला सामने आया है. कथित तौर पर मानसिक रूप से अस्वस्थ इस व्यक्ति ने अस्पताल के मुख्य प्रवेश द्वार के शीशे पर पत्थर मारकर उसे तोड़ दिया.

इस घटना के बाद स्थानीय निवासियों और व्यापारियों ने ज़िला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से उक्त व्यक्ति के समुचित इलाज और सुरक्षात्मक निगरानी की मांग की है.

अस्पताल परिसर में क्या हुआ?

प्रत्यक्षदर्शियों और अस्पताल प्रबंधन से मिली जानकारी के अनुसार, गुरुवार (25 जून 2026) सुबह राजू उर्फ शत्रुघ्न नामक एक व्यक्ति अचानक अस्पताल परिसर में दाखिल हुआ. वहां मौजूद मरीजों, उनके परिजनों और कर्मचारियों के साथ उसने विवाद करना शुरू कर दिया.

स्थिति को नियंत्रित करने के लिए जब अस्पताल के सुरक्षा गार्ड ने उसे परिसर से बाहर निकालने का प्रयास किया, तो उसने बाहर से एक भारी पत्थर उठाकर मुख्य प्रवेश द्वार के टफन ग्लास (Toughen Glass) पर दे मारा, जिससे दरवाज़े का कीमती शीशा टूट गया. इसके बाद भी उसने वहां मौजूद लोगों पर पत्थर फेंकने की कोशिश की, जिससे परिसर में कुछ देर के लिए असहज स्थिति निर्मित हो गई. घटना की सूचना तत्काल तोरवा थाना पुलिस और डायल 112 को दी गई.

सेंदरी मानसिक चिकित्सालय से बार-बार वापसी का दावा

स्थानीय नागरिकों के मुताबिक़, राजू उर्फ शत्रुघ्न लंबे समय से मानसिक बीमारी से ग्रसित है और इस क्षेत्र में उसके द्वारा राहगीरों और ऑटो चालकों से विवाद किए जाने की घटनाएं पहले भी सामने आ चुकी हैं.

प्रशासनिक रिकॉर्ड और स्थानीय लोगों के अनुसार:

  • उसे पूर्व में कई बार पुलिस और स्थानीय प्रशासन की मदद से बिलासपुर के सेंदरी स्थित मानसिक चिकित्सालय भेजा जा चुका है.

  • हालांकि, हर बार उसके परिजन (मां और बहन) उसे वापस घर ले आते हैं.

  • नागरिकों का आरोप है कि घर वापसी के बाद उसकी उचित चिकित्सकीय निगरानी या दवाइयों का प्रबंधन नहीं हो पाता, जिससे वह पुनः सड़कों पर घूमकर हिंसक व्यवहार करने लगता है.

आपराधिक कार्रवाई में पुलिस की व्यावहारिक चुनौतियां

इस मामले में तोरवा पुलिस का कहना है कि कानूनन किसी मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति के ख़िलाफ़ सामान्य आपराधिक धाराओं के तहत पारंपरिक कार्रवाई करना जटिल होता है. पुलिस जब भी उसे हिरासत में लेने का प्रयास करती है, वह हिंसक होकर पुलिसकर्मियों पर ही हमला कर देता है.

इसके अलावा, मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों की अपनी प्रक्रियात्मक सीमाएं होती हैं, जिसके कारण किसी मरीज़ को बिना परिजनों की सहमति या लंबी वैधानिक प्रक्रिया के बिना स्थायी रूप से वहां रखना संभव नहीं हो पाता.

फिलहाल, इस घटना के बाद क्षेत्र के नागरिकों ने ज़िला कलेक्टर, स्वास्थ्य विभाग और पुलिस प्रशासन से सामूहिक अपील की है कि जन सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उक्त व्यक्ति को किसी सुरक्षित मानसिक स्वास्थ्य संस्थान में भर्ती कराया जाए और उसकी निरंतर निगरानी सुनिश्चित की जाए. 


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