बिलासपुर। TODAY छत्तीसगढ़ / वन विभाग की महिला वनरक्षक द्वारा लिखा गया दो पन्नों का पत्र केवल एक शिकायत नहीं, बल्कि सरकारी तंत्र की संवेदनशीलता, जवाबदेही और महिला सुरक्षा के दावों की वास्तविकता को परखने वाला दस्तावेज बनकर सामने आया है।
बिलासपुर वनमण्डल के अनुसन्धान एवं विस्तार विभाग की महिला वनरक्षक ओसिन रानी सिंह ने पत्र में महिला ने स्पष्ट रूप से अपने ही विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और कर्मचारियों पर मानसिक, आर्थिक और सामाजिक प्रताड़ना के आरोप लगाए हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह आरोप किसी निजी संस्था पर नहीं, बल्कि एक शासकीय विभाग पर हैं—जहां नियम, संरचना और शिकायत निवारण तंत्र पहले से स्थापित होना चाहिए।
पीड़िता ने अपने पत्र में वनमंडलाधिकारी नीरज कुमार यादव, वनरक्षक बंसल महिलागे और भूपेंद्र उहरिया पर मानसिक और आर्थिक प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने बताया कि लगातार प्रताड़ना के चलते उनकी शारीरिक और मानसिक स्थिति भी प्रभावित हो रही है।
महिला वनरक्षक का कहना है कि उन्होंने इस मामले में उच्च अधिकारियों से भी शिकायत की, लेकिन कहीं सुनवाई नहीं हुई। ऐसे में उन्होंने मीडिया के माध्यम से अपनी आवाज सरकार तक पहुंचाने की अपील की है। पीड़िता ने अपने आरोपों के समर्थन में एक आडियो/वीडियो भी साझा किया है, जिसमें कथित तौर पर आपत्तिजनक भाषा का उपयोग किया गया है। हालांकि, इसकी स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है।
पत्र क्या कहता है — आरोपों की परतें
पत्र के अनुसार— महिला को लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है, आर्थिक दबाव और कार्यस्थल पर उत्पीड़न का आरोप, गाली-गलौज और अपमानजनक व्यवहार का उल्लेख है। महिला कर्मी का कहना है कि शिकायत के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं होना वन कार्यालय में जंगल कानून जैसा लगता है। इस पुरे मामले में सबसे गंभीर आरोप यह है कि पीड़िता ने विभागीय स्तर पर शिकायत करने के बाद भी कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं होने की बात कही है, जिससे यह संकेत मिलता है कि या तो शिकायत प्रणाली निष्क्रिय है या जानबूझकर अनदेखी की जा रही है।

