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देश की संसद अभी जाने कितनी और गोलियां गांधी पर दागेगी...

लोकसभा में कल भोपाल की आतंक-आरोपी भाजपा सांसद प्रज्ञा ठाकुर ने गांधी के हत्यारे गोडसे को एक बार फिर देशभक्त करार देकर हंगामा खड़ा कर दिया। इसके पहले जनता के बीच तब हंगामा हुआ था जब भाजपा ने आम चुनाव में लोकसभा से प्रज्ञा ठाकुर को उम्मीदवार बनाया था, और साध्वी कही जाने वाली यह महिला अदालत में आतंकी मामलों में आरोपी चले आ रही है, और इलाज के लिए जमानत पाकर जेल के बाहर है। जिस भाजपा का देश भर में इतने करोड़ सदस्यों के होने का दावा है कि जिनकी बदौलत वह दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी होने की बात करती है, उतने करोड़ लोगों में से कुल कुछ सौ सांसद उम्मीदवार उसे चाहिए थे, और वह साध्वी प्रज्ञा ठाकुर पर आकर टिकी थी। खैर, चुनाव प्रचार के दौरान इस उम्मीदवार ने मुम्बई आतंकी हमले में शहीद हुए पुलिस अफसर हेमंत करकरे के खिलाफ गंदी, ओछी, और हिंसक बातें करते हुए यह दावा किया था कि उसके (साध्वी के) श्राप से हेमंत करकरे की मौत हुई थी। उल्लेखनीय है कि साध्वी प्रज्ञा को आतंकी मामलों में हेमंत करकरे द्वारा की गई जांच के आधार पर ही गिरफ्तार किया गया था। प्रज्ञा ठाकुर ने एक किस्म से मुम्बई आतंकी हमला करने वाले आतंकियों के बारे में यह कहा था कि वे भगवान की तरफ से हेमंत करकरे को सजा देने के लिए आए थे। उन्होंने कहा था- हेमंत करकरे को मैंने कहा था तेरा सर्वनाश होगा। चुनाव चल ही रहा था और पार्टी ने उससे यह बयान वापिस लेने को कहा था। फिर प्रज्ञा ठाकुर ने भोपाल चुनाव प्रचार के दौरान ही नाथूराम गोडसे को देशभक्त कहा था, और कहा था कि वे देशभक्त हैं, और रहेंगे। इस पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अफसोस जाहिर करते हुए कहा था कि वे उन्हें मन से कभी माफ नहीं करेंगे। लेकिन अभी जब देश के सबसे महत्वपूर्ण एक मंत्रालय, प्रतिरक्षा मंत्रालय की संसदीय सलाहकार समिति बनी तो उसमें प्रज्ञा ठाकुर का नाम देखकर देश फिर हक्का-बक्का रह गया क्योंकि इतनी महत्वपूर्ण समिति में नामांकन प्रधानमंत्री की मर्जी के खिलाफ होने का तो सवाल ही नहीं उठता है।
अब देश भर में भारी आलोचना हो जाने के बाद, चौबीस घंटे गुजरने पर भाजपा ने लोकसभा में प्रज्ञा ठाकुर के बयान की निंदा की है, और उन्हें प्रतिरक्षा मंत्रालय की संसदीय कमेटी से हटाने की घोषणा की है। यह भी कहा है कि भाजपा संसदीय दल की बैठक में उन्हें आने नहीं दिया जाएगा। लेकिन प्रज्ञा ठाकुर खुद शब्दों की कलाबाजी करते हुए अपने ही कैमरों पर कैद बयान को अब तोड़-मरोड़ रही हैं, बिना किसी अफसोस या मलाल के। ऐसे में सवाल यह उठता है कि प्रज्ञा ठाकुर को उम्मीदवार बनाकर भाजपा ने अपना जो रूख दिखाया था, क्या वही रूख आज की इस नौबत के लिए जिम्मेदार नहीं हैं कि जिस संसद भवन के बाहर गांधी को राष्ट्रपिता के रूप में स्थापित किया गया है, उसी संसद भवन की कार्रवाई में गोडसे को देशभक्त करार दिया जाए? इस नौबत से भाजपा किस तरह अपने को अलग कर सकती है, और तोहमत से बच सकती है?
यह सिलसिला देश में एक अकेली घटना नहीं है। सोशल मीडिया पर स्कूली बच्चों को पढ़ाने के लिए, उन्हें देश का इतिहास बताने के लिए जो पोस्टर फैले हुए हैं, उनमें ऐसे भी हैं जिनमें सावरकर की तस्वीर तो है, लेकिन न नेहरू की तस्वीर है, और न ही सरदार पटेल की। पूरे देश में हवा को जहरीला करने का काम कोई मासूम अनायास चूक नहीं है, यह पूरा सोच-समझकर किया जा रहा काम है, और इसी सोच के तहत प्रज्ञा ठाकुर को भाजपा उम्मीदवार बनाया गया, और संसद तक पहुंचाया गया। लगातार एक के बाद दूसरी ऐसी बयानबाजी कहीं न कहीं चलती है, और यह बात एकदम साफ दिखती है कि इनमें से कुछ भी अनायास नहीं है, बल्कि देश के असल मुद्दों की तरफ से लोगों का ध्यान भटकाने के लिए भी इन्हें कहा जाता है, और ऐसा कहकर देश के लोगों का बर्दाश्त भी तौला जाता है, और धीरे-धीरे करके ऐसे बयानों को सामान्य का दर्जा भी दिलाया जाता है। लोगों के मन में ऐसी सोच को किस्तों में बैठाया जा रहा है कि गांधी को मारना देशभक्ति का काम था। और गांधी से जो शिकायत गोडसे की थी, वह गोडसे की मुस्लिम विरोधी सोच से उपजी हुई थी, और इस बहाने मुस्लिम विरोधी सोच को भी बढ़ाया जा रहा है।
दैनिक 'छत्तीसगढ़' का संपादकीय, 28 नवंबर 
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