बर्थडे के नाम पर हुड़दंग, शराब के नशे में सड़क पर केक काटते पकड़े गए युवक-युवती


बिलासपुर।
   TODAY छत्तीसगढ़  / शहर में सार्वजनिक सड़क पर जन्मदिन मनाने का एक और मामला सामने आया है, जहाँ पुलिस ने देर रात कार्रवाई करते हुए तीन युवकों और एक युवती को हिरासत में लिया है। पुलिस के अनुसार यह घटना सकरी थाना क्षेत्र के समबलपुरी ओवरब्रिज की है, जहाँ सड़क के बीचों-बीच कार खड़ी कर जश्न मनाया जा रहा था, जिससे यातायात प्रभावित हो रहा था।

पुलिस ने बताया कि 22 मार्च की रात नियमित पेट्रोलिंग के दौरान उन्हें मुखबिर से सूचना मिली कि कुछ युवक-युवती ओवरब्रिज पर वाहन रोककर जन्मदिन मना रहे हैं। सूचना के आधार पर पुलिस टीम तुरंत मौके पर पहुँची। मौके पर पहुँचने पर पुलिस ने पाया कि एक काले रंग की हुंडई वरना कार (CG 07 BH 9996) सड़क के बीच खड़ी थी और उसके पास केक काटा जा रहा था। इस दौरान आसपास जश्न का माहौल था और यातायात बाधित हो रहा था।

जांच के दौरान पुलिस ने पाया कि मौके पर मौजूद सभी लोग शराब के नशे में थे। कार के भीतर कटा हुआ केक मिला और सड़क पर भी जश्न के संकेत दिखाई दिए। पूछताछ में आरोपियों ने अपने नाम निहाल सांडिल्य, अतुल वर्मा, प्रियांशु चौरसिया और अदिति भंडारी बताया है ।सभी की उम्र 19 से 22 वर्ष के बीच बताई गई है और वे बिलासपुर व कोरबा के निवासी हैं।

पुलिस ने चारों के खिलाफ सार्वजनिक स्थान पर अव्यवस्था फैलाने और यातायात बाधित करने के आरोप में कानूनी कार्रवाई की है। साथ ही मौके से वाहन को भी जब्त कर लिया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सार्वजनिक स्थानों पर इस तरह के आयोजनों से न केवल यातायात प्रभावित होता है, बल्कि कानून-व्यवस्था की स्थिति भी बिगड़ सकती है। ऐसे मामलों में आगे भी सख्ती बरती जाएगी। 

नवा रायपुर जंगल सफारी में बस संचालन को निजी हाथों में सौंपने के प्रस्ताव का विरोध तेज


रायपुर।
  TODAY छत्तीसगढ़  /  नवा रायपुर जंगल सफारी में बस संचालन को निजी एजेंसियों को सौंपने के प्रस्ताव के विरोध में आज छत्तीसगढ़ दैनिक वेतन भोगी वन कर्मचारी संघ के प्रतिनिधिमंडल ने पूर्व केबिनेट मंत्री और सांसद बृजमोहन अग्रवाल से मुलाकात कर अपनी गंभीर चिंताएं व्यक्त कीं।

वर्षों से अपनी सेवाएं दे रहे वाहन चालकों और गाइडों की आजीविका पर संकट मंडराना निश्चित तौर पर अत्यंत चिंताजनक है। यह केवल रोजगार का मुद्दा नहीं, बल्कि उनके सम्मान और अधिकारों से भी जुड़ा विषय है। सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने प्रतिनिधि मंडल की बाते सुनने के बाद कहा कि किसी भी परिस्थिति में छत्तीसगढ़ दैनिक वेतन भोगी वन कर्मचारी संघ के हक और सम्मान से समझौता स्वीकार्य नहीं होगा।

श्री अग्रवाल का मानना है कि यदि बस संचालन में कोई समस्या है, तो उसका समाधान विभागीय स्तर पर किया जाना चाहिए। पुरानी बसों की मरम्मत कर उन्हें पुनः संचालित करना एक व्यवहारिक और न्यायसंगत विकल्प हो सकता है। उन्होंने प्रतिनिधि मंडल को भरोसा दिलाया कि इस पूरे विषय को शासन के समक्ष प्रमुखता से रखा जाएगा, ताकि कर्मचारियों के हितों की रक्षा सुनिश्चित की जा सके।

जिले में ‘उल्लास’ साक्षरता आकलन परीक्षा: 40 हजार से अधिक प्रतिभागियों की ऐतिहासिक भागीदारी


बिलासपुर।
 TODAY छत्तीसगढ़  /  जिले में ‘उल्लास’ योजना के अंतर्गत आयोजित साक्षरता आकलन परीक्षा ने जनभागीदारी का एक नया कीर्तिमान स्थापित किया। जिले के चारों  विकासखंड सहित केंद्रीय जेल बिलासपुर में कुल 961 परीक्षा केंद्रों पर आयोजित इस परीक्षा में 40,777 से अधिक असाक्षर प्रशिक्षार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इनमें 10,943 पुरुष एवं 29,822 महिलाएं शामिल रहीं। महिलाओं की उल्लेखनीय भागीदारी इस अभियान की सबसे बड़ी विशेषता रही, जिसे राज्य स्तर पर एक ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।

      जिले के सभी केंद्रों में परीक्षा का आयोजन पूर्णतः शांतिपूर्ण, पारदर्शी एवं सुव्यवस्थित ढंग से किया गया। ‘उल्लास’ केंद्रों के माध्यम से प्रतिभागियों को स्थानीय भाषा में पढ़ना-लिखना, आधारभूत गणित, डिजिटल साक्षरता एवं जीवनोपयोगी ज्ञान प्रदान किया गया, जिससे वे आत्मनिर्भरता की दिशा में सशक्त कदम बढ़ा सकें।  कलेक्टर श्री संजय अग्रवाल ने कहा कि “उल्लास योजना के माध्यम से बिलासपुर को पूर्ण साक्षर जिला बनाने की दिशा में तेजी से प्रगति हो रही है। 40 हजार से अधिक लोगों की सक्रिय भागीदारी समाज में जागरूकता और परिवर्तन का प्रतीक है।”

   इस अभियान के तहत केंद्रीय जेल बिलासपुर में 100 पुरुष एवं 33 महिला बंदियों ने परीक्षा में सहभागिता कर साक्षरता की ओर कदम बढ़ाया। ग्रामीण क्षेत्रों, विशेषकर कोटा विकासखंड के आदिवासी अंचलों से बड़ी संख्या में सहभागिता दर्ज की गई। परीक्षा केंद्रों में सास-बहू, ननद-भौजाई, तीन पीढ़ियों के सदस्य, बुजुर्ग दंपति, नवविवाहित जोड़े, दिव्यांगजन एवं छोटे बच्चों के साथ परीक्षा देने आई माताएं विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं, जिसने इस अभियान को एक सामाजिक उत्सव का स्वरूप प्रदान किया। जिला शिक्षा अधिकारी के अनुसार, ‘उल्लास’ योजना के प्रभाव से जिले की साक्षरता दर में लगभग 20 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जिसकी राज्य सरकार द्वारा सराहना की गई है। यह पहल छत्तीसगढ़ को पूर्ण साक्षर राज्य बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो रही है। परीक्षा के सफल संचालन हेतु जिला प्रशासन द्वारा सभी केंद्रों पर आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई थीं। केंद्राध्यक्षों एवं पर्यवेक्षकों की नियुक्ति के साथ ही ब्लॉक एवं ग्राम स्तर पर समन्वय समितियां सक्रिय रहीं। संयुक्त संचालक शिक्षा द्वारा विशेष ऑब्जर्वर नियुक्त किए गए तथा जिला स्तर पर निरीक्षण दल गठित कर सतत मॉनिटरिंग की गई।

इसके अतिरिक्त ग्राम पंचायतों के सचिव, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, मितानिन, जनप्रतिनिधि, आजीविका मिशन की दीदियां एवं जागरूक नागरिकों के सहयोग से अधिक से अधिक परीक्षार्थियों की उपस्थिति सुनिश्चित की गई।

एक बार फिर अवैध अफीम: लैलूंगा में अफीम की खेती का खुलासा, एक ही गांव में तीन ठिकाने


रायगढ़।
 TODAY छत्तीसगढ़  /  छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के लैलूंगा क्षेत्र में एक बार फिर अवैध अफीम की खेती का मामला सामने आया है। चौंकाने वाली बात यह है कि एक ही गांव में तीन अलग-अलग स्थानों पर अफीम की फसल लहलहाती हुई पाई गई है। इसके साथ ही राज्य में इस तरह के मामलों की संख्या अब पांच तक पहुंच चुकी है, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था और निगरानी तंत्र पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी के अनुसार, जिन खेतों में अफीम की खेती हो रही थी, उन्हें सरकारी रिकॉर्ड में धान के रूप में सत्यापित किया गया था। ऐसे में यह सवाल उठता है कि जब हर रकबे का भौतिक सत्यापन किया गया था, तो फिर अफीम की खेती की जानकारी अधिकारियों को कैसे नहीं मिली।

विपक्ष और स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह केवल लापरवाही नहीं बल्कि संभावित मिलीभगत का मामला भी हो सकता है। वहीं, राज्य की भाजपा सरकार पर इस मुद्दे को लेकर दबाव बढ़ता जा रहा है, क्योंकि बार-बार ऐसे मामलों का उजागर होना शासन की साख पर असर डाल रहा है। 

विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि समय रहते निगरानी और सत्यापन प्रक्रिया को पारदर्शी नहीं बनाया गया, तो अवैध खेती का यह नेटवर्क और फैल सकता है। अब देखना यह होगा कि सरकार इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों पर क्या कार्रवाई करती है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं। 

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