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प्रेम प्रसंग के चलते युवती की गोली मारकर हत्या, महाराष्ट्र और झारखंड से शूटर गिरफ़्तार

सक्ती हत्याकांड: 9 अभियुक्त गिरफ़्तार, पुलिस बोली- खौफ़ पैदा करने के लिए ख़ुद को बताते थे 'बिश्नोई गैंग' का गुर्गा

TODAY छत्तीसगढ़  /  छत्तीसगढ़ के सक्ती ज़िले के जोंगरा गांव में दिनदहाड़े एक युवती की गोली मारकर की गई हत्या के मामले को पुलिस ने सुलझा लिया है. पुलिस जांच में यह बात सामने आई है कि यह एक 'सुपारी किलिंग' का मामला था, जिसकी साज़िश प्रेम प्रसंग और वैवाहिक विवाद के चलते रची गई थी.

इस मामले में पुलिस ने छत्तीसगढ़, झारखंड और महाराष्ट्र में छापेमारी कर कुल 9 अभियुक्तों को गिरफ़्तार किया है. अभियुक्तों के पास से हत्या में इस्तेमाल की गई पिस्टल, कारतूस और अन्य सामग्रियां बरामद की गई हैं.

प्रेम प्रसंग और 4 लाख रुपये की सुपारी

सक्ती ज़िले के पुलिस अधीक्षक (SP) प्रफुल्ल ठाकुर ने एक प्रेस वार्ता में इस हत्याकांड की विस्तृत जानकारी दी. पुलिस के अनुसार:

  • हत्या का कारण: मृतका पूर्णिमा चौहान और रायगढ़ (डेलारी) निवासी मुरलीशंकर चौहान के बीच लंबे समय से प्रेम संबंध था. दोनों आयुर्वेदिक दवाओं के प्रचार का काम करते थे. मुरलीशंकर की पत्नी चंपा चौहान को इसकी जानकारी थी.

  • साज़िश: पुलिस के मुताबिक़, मुरलीशंकर दूरी बनाना चाहता था, लेकिन पूर्णिमा शादी का दबाव बना रही थी. इससे परेशान होकर पति-पत्नी (मुरलीशंकर और चंपा) ने पूर्णिमा की हत्या की साज़िश रची.

  • सुपारी: हत्या के लिए राजेंद्र महंत नाम के व्यक्ति को 4 लाख रुपये की सुपारी दी गई. 2 लाख रुपये एडवांस में दिए गए, जिसे चंपा चौहान ने अपने डाकघर खाते से निकाला था. पुलिस ने बैंक पासबुक और लेन-देन के दस्तावेज़ ज़ब्त कर लिए हैं.

सुनियोजित तरीके से दिया गया वारदात को अंजाम

तय योजना के अनुसार, 26 जून को दो शूटर— गौरीशंकर सिदार और सुनील महंत— मोटरसाइकिल से जोंगरा गांव पहुंचे. पुलिस के अनुसार, जैसे ही पूर्णिमा घर से बाहर निकली, गौरीशंकर ने पिस्टल से तीन गोलियां चलाकर उसकी हत्या कर दी और दोनों वहां से फ़रार हो गए.

पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि हत्या के वक़्त मुरलीशंकर को जानबूझकर रायगढ़ के चक्रधर नगर भेज दिया गया था, ताकि पूछताछ होने पर वह मौक़े पर अपनी ग़ैर-मौजूदगी (Alibi) का हवाला देकर बच सके. 

तीन राज्यों में पुलिस की दबिश

हत्या के बाद सक्ती पुलिस ने एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया. मोबाइल टावर डंप, कॉल डिटेल (CDR) और सीसीटीवी फ़ुटेज खंगालने के बाद पुलिस ने अलग-अलग राज्यों में दबिश दी.

  • मुख्य अभियुक्त राजेंद्र महंत को झारखंड के जमशेदपुर से पकड़ा गया.

  • दोनों शूटरों (गौरीशंकर और सुनील) को महाराष्ट्र के पुणे से गिरफ़्तार किया गया.

  • गिरफ़्तार अभियुक्त: पुलिस ने इस मामले में चंपा चौहान, मुरलीशंकर चौहान, राजेंद्र महंत, गौरीशंकर सिदार, सुनील महंत, राकेश महंत, वेदप्रकाश महंत (उर्फ़ सोनू), सुमित गबेल और चंद्रशेखर महंत को गिरफ़्तार कर न्यायालय में पेश किया है.

'लॉरेंस बिश्नोई गैंग' के नाम पर फैलाते थे दहशत

पुलिस जांच में एक और अहम बात सामने आई है. मुख्य शूटर गौरीशंकर सिदार और उसके साथी इलाक़े में ख़ुद को 'लॉरेंस बिश्नोई गैंग' का सदस्य बताते थे. वे दहशत फैलाने के लिए सोशल मीडिया पर हथियारों के साथ अपनी तस्वीरें पोस्ट करते थे. हालांकि, पुलिस का कहना है कि इनका बिश्नोई गैंग से कोई वास्तविक संबंध नहीं मिला है, यह महज़ लोगों को डराने का एक तरीक़ा था.

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