Slider

LATEST NEWS
Loading Latest News...

मतगणना विवाद में हाईकोर्ट सख्त, कलेक्टर को 60 दिन में नया फैसला देने के निर्देश

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने लोरमी जनपद पंचायत चुनाव विवाद में मुंगेली कलेक्टर द्वारा चुनाव याचिका खारिज करने के आदेश को रद्द कर दिया है। अदालत ने कहा कि बिना विवाद के बिंदु तय किए और दोनों पक्षों को साक्ष्य प्रस्तुत करने का अवसर दिए फैसला देना कानून और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है।
बिलासपुर। TODAY छत्तीसगढ़  /  छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने मुंगेली जिले की लोरमी जनपद पंचायत के चुनाव विवाद में अहम फैसला सुनाते हुए कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी के आदेश को निरस्त कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि चुनाव याचिका को बिना विवाद के बिंदु तय किए और दोनों पक्षों को साक्ष्य प्रस्तुत करने का अवसर दिए खारिज करना विधि सम्मत नहीं है।

न्यायमूर्ति ए.के. प्रसाद की एकलपीठ ने मामले को दोबारा मुंगेली कलेक्टर के पास भेजते हुए निर्देश दिया है कि निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए 60 दिनों के भीतर नया निर्णय लिया जाए।

मामला लोरमी जनपद पंचायत के वार्ड क्रमांक-23 (राजपुर) के सदस्य पद के चुनाव से जुड़ा है। चुनाव में पंकज रात्रे और मूलचंद डाहिरे सहित अन्य प्रत्याशी मैदान में थे। मतगणना के बाद मूलचंद डाहिरे को विजयी घोषित किया गया।

चुनाव परिणाम के बाद पंकज रात्रे ने आरोप लगाया कि फॉर्म-18 (भाग-1) में दर्ज मतगणना के आंकड़ों में विसंगतियां हैं। उन्होंने छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम, 1993 की धारा-122 के तहत कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी के समक्ष चुनाव याचिका दायर कर मतों की पुनर्गणना की मांग की थी। हालांकि, 7 जनवरी 2026 को कलेक्टर ने न तो विवाद के मुद्दे तय किए और न ही गवाहों के बयान दर्ज किए, बल्कि सीधे याचिका खारिज कर दी।

इस आदेश को अधिवक्ता संदीप दुबे के माध्यम से हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि छत्तीसगढ़ पंचायत नियम, 1995 के नियम-11 के अनुसार चुनाव याचिका की सुनवाई दीवानी वाद की तरह की जानी चाहिए, जिसमें पहले विवाद के बिंदु तय किए जाते हैं और फिर दोनों पक्षों को साक्ष्य एवं गवाह प्रस्तुत करने का पूरा अवसर दिया जाता है।

दिलचस्प बात यह रही कि अन्य प्रत्याशियों की ओर से उपस्थित अधिवक्ताओं ने भी इस दलील का समर्थन करते हुए बताया कि मतगणना के दौरान उन्होंने भी मतों के अंतर को लेकर आपत्ति दर्ज कराई थी।

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि चुनाव याचिका कोई सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि दीवानी प्रकृति की न्यायिक कार्यवाही है। इसलिए विवाद के बिंदु तय करना, दोनों पक्षों को सुनना और साक्ष्य प्रस्तुत करने का अवसर देना अनिवार्य है। अदालत ने यह भी कहा कि प्रारंभिक स्तर पर ही याचिका को संक्षिप्त रूप से खारिज करना प्राकृतिक न्याय और विधिक प्रक्रिया के सिद्धांतों के विपरीत है।

अदालत ने मुंगेली कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी के 7 जनवरी 2026 के आदेश को निरस्त करते हुए निर्देश दिया है कि विधिसम्मत प्रक्रिया अपनाते हुए दोनों पक्षों के साक्ष्य और गवाहों की जांच कर 60 दिनों के भीतर नया निर्णय सुनाया जाए। 

© all rights reserved TODAY छत्तीसगढ़ 2018
todaychhattisgarhtcg@gmail.com
TODAY छत्तीसगढ़
लाइव मार्केट & सराफा