TODAY छत्तीसगढ़ / छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने सहमति से बने लंबे रिलेशनशिप के बाद शादी नहीं होने पर दर्ज दुष्कर्म के एक मामले में महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश दिया है। अदालत ने एफआईआर के आधार पर चल रही ट्रायल कोर्ट की आगे की कार्यवाही पर फिलहाल रोक लगा दी है और राज्य सरकार तथा शिकायतकर्ता को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने मामले की सुनवाई के बाद यह आदेश पारित किया।
Instagram पर हुई थी दोस्ती
याचिका के अनुसार, पामगढ़ क्षेत्र के ग्राम ससहा निवासी सुरेश कुमार साहू वर्ष 2020 में बैंक में नौकरी करते हुए बिलासपुर के सरकंडा क्षेत्र में किराये के मकान में रहते थे। इसी दौरान उनकी सारंगढ़ क्षेत्र की एक युवती से इंस्टाग्राम के माध्यम से पहचान हुई। दोनों के बीच मुलाकातें बढ़ीं और वे आपसी सहमति से लंबे समय तक रिलेशनशिप में रहे।
शादी नहीं होने पर दर्ज हुई FIR
याचिका के मुताबिक, युवती ने सरकंडा थाने में शिकायत दर्ज कर आरोप लगाया कि युवक ने शादी का झांसा देकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर चार्जशीट न्यायालय में पेश की। इसके बाद ट्रायल कोर्ट ने मामले का संज्ञान लेकर सुनवाई शुरू कर दी।
याचिका में क्या कहा गया?
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता रितेश शर्मा ने दलील दी कि दोनों पक्ष बालिग थे और वर्ष 2020 से एक-दूसरे को जानते थे। दोनों कई वर्षों तक आपसी सहमति से संबंध में रहे।
याचिका में कहा गया कि शिकायत कथित घटनाओं के काफी समय बाद दर्ज कराई गई। इसमें ऐसा कोई प्रथमदृष्टया साक्ष्य नहीं है जिससे यह साबित हो कि शुरुआत से ही याचिकाकर्ता की शादी करने की मंशा नहीं थी या उसने धोखा देने के उद्देश्य से झूठा वादा किया था। केवल बाद में रिश्ता समाप्त होना या शादी से इनकार करना अपने आप में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 69 के तहत दंडनीय अपराध नहीं माना जा सकता।
याचिकाकर्ता ने एफआईआर, चार्जशीट, ट्रायल कोर्ट के संज्ञान आदेश और उससे आगे की पूरी आपराधिक कार्यवाही को निरस्त करने की मांग की।
राज्य सरकार ने किया विरोध
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने याचिका का विरोध किया। हालांकि, हाई कोर्ट ने इस चरण में मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम टिप्पणी नहीं की।
हाई कोर्ट का अंतरिम आदेश
डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार और शिकायतकर्ता को नोटिस जारी कर हलफनामे के माध्यम से जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि शिकायतकर्ता के जवाब के बाद याचिकाकर्ता को प्रत्युत्तर दाखिल करने का अवसर दिया जाएगा।
साथ ही, हाई कोर्ट ने अगली सुनवाई तक बिलासपुर के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश की अदालत में लंबित आपराधिक प्रकरण की आगे की कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगा दी है।
नोट: यह हाई कोर्ट का अंतरिम आदेश है। अदालत ने एफआईआर या आरोपों को निरस्त नहीं किया है, बल्कि अगली सुनवाई तक ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर रोक लगाई है। मामले का अंतिम निर्णय विस्तृत सुनवाई के बाद होगा।
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