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बाघ की मौत या कुछ और? बांधवगढ़ में कंकाल मिलने से मचा हड़कंप

डॉग स्क्वाड और मेटल डिटेक्टर से जांच, बाघ के कंकाल की पुष्टि के लिए भेजे गए सैंपल

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के ताला परिक्षेत्र में मानसूनी गश्ती के दौरान एक संदिग्ध बाघ का कंकाल मिला है। वन विभाग ने एनटीसीए के दिशा-निर्देशों के अनुसार जांच कर सैंपल एकत्र किए हैं, जिनसे वन्यप्राणी की प्रजाति और लिंग की पुष्टि की जाएगी।
उमरिया।  TODAY छत्तीसगढ़  / मध्य प्रदेश के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के ताला परिक्षेत्र अंतर्गत मझखेता बीट में मानसूनी गश्ती के दौरान एक मांसाहारी वन्यप्राणी का कंकाल मिलने से वन विभाग में हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही क्षेत्र संचालक, उप संचालक, वन्यप्राणी स्वास्थ्य अधिकारी सहित अन्य अधिकारी और कर्मचारी मौके पर पहुंचे।

घटनास्थल पर डॉग स्क्वाड की सहायता से सर्च अभियान चलाया गया तथा मेटल डिटेक्टर से भी क्षेत्र की जांच की गई, ताकि किसी अन्य साक्ष्य का पता लगाया जा सके।

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक अनुपम सहाय ने TODAY छत्तीसगढ़ से मोबाईल पर हुई बातचीत में बताया कि वन्यजीव स्वास्थ्य अधिकारी के प्रारंभिक निरीक्षण में कंकाल बाघ का होने की संभावना व्यक्त की गई है। इसके बाद राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के निर्धारित दिशा-निर्देशों और मानक प्रोटोकॉल के अनुसार वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में कंकाल का परीक्षण कराया गया।

जांच के दौरान वन्यप्राणी की प्रजाति और लिंग की पुष्टि के लिए आवश्यक जैविक सैंपल एकत्र किए गए। दस्तावेजीकरण और साक्ष्य संकलन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद कंकाल का विधिवत दाह संस्कार कर दिया गया।

गौरतलब है कि 1 जुलाई से 30 सितंबर तक मानसून के कारण बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के कोर जोन में पर्यटन पूरी तरह बंद रहता है। इस अवधि में वन एवं वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए विशेष मानसूनी गश्ती अभियान संचालित किया जाता है।

वन विभाग के अनुसार इस वर्ष रिजर्व के 9 रेंज (6 कोर और 3 बफर) में लगभग 900 से अधिक सुरक्षाकर्मी, 175 कैंपों में रुककर 300 संवेदनशील स्थलों पर निगरानी कर रहे हैं। गश्ती के लिए 600 निर्धारित रूट बनाए गए हैं। दुर्गम क्षेत्रों में निगरानी के लिए हाथियों और ड्रोन का भी उपयोग किया जा रहा है।

वन विभाग ने बताया कि कंकाल की अंतिम पहचान और मौत के कारणों का पता जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। 


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