बिलासपुर। TODAY छत्तीसगढ़ / हिंदवी स्वराज के संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज के अद्वितीय जीवन, शौर्य, दूरदर्शी नेतृत्व और प्रजावत्सल शासन पर आधारित विश्व-प्रसिद्ध ऐतिहासिक महानाट्य ‘जाणता राजा’ का तीन दिवसीय भव्य मंचन बिलासपुर में सांस्कृतिक इतिहास रचते हुए संपन्न हुआ। अंतिम दिन उमड़े हजारों दर्शकों ने यह प्रमाणित कर दिया कि शिवाजी महाराज का व्यक्तित्व और उनका स्वराज दर्शन आज भी जनमानस में उतना ही प्रेरक और प्रासंगिक है।
पुलिस ग्राउंड में आयोजित इस विराट मंचन की शुरुआत महागणपति एवं माँ भवानी की आरती से हुई, जिसके पश्चात संपूर्ण वातावरण राष्ट्रभावना और श्रद्धा से ओतप्रोत हो उठा। लोकगीतों, ओजपूर्ण भजनों, प्रभावशाली संवादों, जीवंत अभिनय, आकर्षक प्रकाश व्यवस्था और भव्य मंच सज्जा के माध्यम से प्रस्तुत इस महानाट्य ने लगभग तीन घंटे तक दर्शकों को भावविभोर बनाए रखा। प्रत्येक दृश्य पर तालियों की गूंज और कई प्रसंगों में भावनात्मक माहौल ने आयोजन को अविस्मरणीय बना दिया।
तीन दिनों तक बिलासपुर बना शिवाजी के स्वराज का साक्षी, उमड़ा अभूतपूर्व जनसैलाब
यह आयोजन केवल एक नाट्य प्रस्तुति नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने वाला सशक्त सांस्कृतिक जनआंदोलन बनकर उभरा। तीनों दिनों में बड़ी संख्या में नागरिक, परिवार, युवा, महिलाएं और वरिष्ठजन उपस्थित रहे। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि जब समाज अपने इतिहास और आदर्शों से जुड़ता है, तब उसकी सांस्कृतिक चेतना और अधिक सुदृढ़ होती है।
मुख्य अतिथि धर्मजीत सिंह, विधायक तखतपुर ने कहा कि यह भव्य मंचन सिद्ध करता है कि छत्तीसगढ़ राज्य युवा आयोग सार्थक दिशा में कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन युवाओं को सकारात्मक दिशा देते हैं और समाज में एकता की भावना को सुदृढ़ करते हैं। विशिष्ट अतिथि सुशांत शुक्ला, विधायक बेलतरा ने अपने उद्बोधन में कहा कि हिंदवी स्वराज के संस्थापक शिवाजी महाराज का जीवन आज भी भारत को विश्व नेतृत्व की ओर अग्रसर होने की प्रेरणा देता है। उन्होंने आयोजन को इतिहास को जीवंत रूप में देखने का सशक्त माध्यम बताया।छत्तीसगढ़ राज्य युवा आयोग के अध्यक्ष विश्वविजय सिंह तोमर ने कहा कि शिवाजी महाराज का जीवन हमें सिखाता है कि राजनीति का मूल उद्देश्य सत्ता नहीं, सेवा है।
महानाट्य के माध्यम से शिवाजी महाराज के न्यायप्रिय शासन, नारी सम्मान, सामाजिक समरसता, धार्मिक सहिष्णुता और स्वराज की अवधारणा को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। दर्शकों ने इसे केवल ऐतिहासिक प्रस्तुति नहीं, बल्कि वर्तमान समय के लिए मार्गदर्शक संदेश बताया। समापन अवसर पर ‘जय भवानी, जय शिवाजी’ के जयघोष से पूरा परिसर गूंज उठा और राष्ट्रगौरव का वातावरण निर्मित हुआ। मराठा समाज, सर्व हिंदू समाज बिलासपुर तथा अन्य सामाजिक संगठनों ने आयोजन समिति को स्मृति चिन्ह भेंट कर आभार प्रकट किया।
महानाट्य ‘जाणता राजा’ का मंचन भले ही संपन्न हो गया हो, किंतु हिंदवी स्वराज, सेवा, न्याय और स्वाभिमान का संदेश जन-जन के हृदय में स्थायी रूप से अंकित हो गया। बिलासपुर ने अनुभव किया कि शिवाजी केवल इतिहास का गौरव नहीं—वे आज भी भारत की चेतना, प्रेरणा और आत्मबल के प्रतीक हैं।

