TODAY छत्तीसगढ़ / बिलासपुर, 24 सितम्बर। छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (CIMS) बिलासपुर के मेडिसिन विभाग में पहली बार प्लाज़्माफ़ेरेसिस तकनीक का सफल उपयोग कर गंभीर रूप से बीमार 19 वर्षीय युवती का इलाज किया गया। यह प्रक्रिया मरीज को निःशुल्क उपलब्ध कराई गई, जबकि निजी अस्पतालों में इसकी लागत 40 से 50 हजार रुपये तक होती है।
युवती लंबे समय से कमजोरी और खून की कमी से जूझ रही थी। जांच में पाया गया कि उसके रक्त में हानिकारक प्रोटीन अधिक मात्रा में जमा हो गए थे और आवश्यक प्रोटीन का स्तर असामान्य रूप से घट गया था, जो जानलेवा साबित हो सकता था।
क्या है प्लाज़्माफ़ेरेसिस ?
यह एक उन्नत चिकित्सीय तकनीक है, जिसमें मशीन की सहायता से रक्त से प्लाज़्मा अलग कर उसमें मौजूद हानिकारक एंटीबॉडी, प्रोटीन और टॉक्सिन हटाए जाते हैं और शुद्ध रक्त वापस शरीर में पहुँचाया जाता है। यह उपचार न्यूरोलॉजिकल, रक्त संबंधी, किडनी, लीवर, ऑटोइम्यून बीमारियों और कोविड-19 जैसे गंभीर रोगों में कारगर साबित होता है।
डॉक्टरों की टीम की मेहनत -
मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. अमित ठाकुर के नेतृत्व में डॉ. आशुतोष कोरी, डॉ. सुयश सिंह, डॉ. किशले देवांगन और डॉ. अर्पणा पांडेय की टीम ने युवती को भर्ती कर विस्तृत जाँच के बाद सफल उपचार किया। वर्तमान में मरीज की हालत सामान्य है और वह स्वास्थ्य लाभ कर रही है।
सिम्स अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने बताया कि यह तकनीक भविष्य में और भी ज़रूरतमंद मरीजों को उपलब्ध कराई जाएगी। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने जानकारी दी कि संस्थान इस तरह की जटिल चिकित्सा प्रक्रियाएँ आम जनता के लिए सुलभ कराने को प्रतिबद्ध है।
