कोरबा। TODAY छत्तीसगढ़ / जिंदगी की पहली सांस लेते ही एक मासूम ने शायद यह नहीं सोचा होगा कि कुछ ही घंटों में उसकी दुनिया उजड़ जाएगी। मेडिकल कॉलेज अस्पताल में जन्मे उस नवजात की आंखें अभी ठीक से खुली भी नहीं थीं कि मां की ममता हमेशा के लिए उससे दूर हो गई।
करतला थाना क्षेत्र के ग्राम तुर्रीकटरा निवासी सरजू प्रसाद राठिया अपनी पत्नी रमशीला राठिया को प्रसव पीड़ा होने पर अस्पताल लेकर पहुंचा था। परिवार खुश था कि घर में नई किलकारी गूंजने वाली है। कुछ ही देर बाद रमशीला ने एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया। लेकिन किस्मत को शायद कुछ और ही मंजूर था। प्रसव के तुरंत बाद उसकी तबीयत बिगड़ने लगी और डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद वह जिंदगी की जंग हार गई।
अस्पताल के उस वार्ड में जहां कुछ देर पहले खुशियों की उम्मीद थी, वहां अचानक सन्नाटा पसर गया। एक तरफ मां की निर्जीव देह थी, तो दूसरी तरफ गोद में सिमटा वह मासूम, जिसे शायद अभी यह भी नहीं पता कि उसकी मां अब कभी उसे सीने से नहीं लगाएगी। सबसे दर्दनाक मोड़ तब आया, जब आरोप लगा कि पिता ने भी नवजात को अपने साथ रखने से इंकार कर दिया। वह बार-बार यह कहता रहा कि पहली पत्नी से उसके पहले ही दो बच्चे हैं और अब वह इस बच्चे की जिम्मेदारी नहीं उठा सकता। हालांकि नवजात के दादा ने बच्चे को साथ ले जाने और उसकी परवरिश की बात कही है।
इसके बाद अस्पताल परिसर में जो हुआ, उसने हर किसी को सोचने पर मजबूर कर दिया। नवजात को एक संजीवनी एक्सप्रेस चालक के हवाले कर दिया गया। बताया जा रहा है कि चालक नि:संतान है और उसने बच्चे को अपनाने की इच्छा जताई थी। लेकिन इसी बीच तीन लाख रुपये के कथित लेनदेन और एक इकरारनामे की चर्चा ने पूरे मामले को बेहद संवेदनशील बना दिया। लोग सवाल पूछ रहे हैं—क्या एक नवजात की जिंदगी का फैसला इस तरह हो सकता है? क्या मां की मौत के बाद उस मासूम को सिर्फ एक जिम्मेदारी समझ लिया गया?
संजीवनी चालक का कहना है कि उसने इंसानियत के नाते बच्चे को अपनाने की इच्छा जताई थी, ताकि उसे बेहतर जिंदगी मिल सके। लेकिन अब इस पूरे मामले ने समाज, संवेदनाओं और इंसानियत पर कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
फिलहाल यह मासूम शहरभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। हर किसी की जुबान पर एक ही सवाल है—जिस बच्चे ने दुनिया में कदम रखते ही मां को खो दिया, क्या उसे अब सच में एक सुरक्षित और प्यार भरा भविष्य मिल पाएगा?



