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चीन को निर्यात बंद, चरोटा के दाम दबाव में... जानिए वनोपज बाजार का ताजा हाल

वनोपज बाजार में सुस्ती, चरोटा, बबूल बीज और नीम गुठली की मांग घटी, डोरी सीड के भाव मजबूत

TODAY छत्तीसगढ़  /  छत्तीसगढ़ के प्रमुख लघु वनोपजों के बाजार में इन दिनों सुस्ती का माहौल है। चरोटा, बबूल बीज, नीम गुठली और डोरी सीड की खरीद अपेक्षा से कम बनी हुई है। हालांकि सीमित कारोबार के बावजूद कीमतों में बड़ी गिरावट नहीं आई है। व्यापारी और संग्राहक दोनों ही बाजार में मांग बढ़ने और खरीदारों की वापसी का इंतजार कर रहे हैं।

वनोपज कारोबार से जुड़े जानकारों का कहना है कि खरीफ सीजन की शुरुआत और अच्छी बारिश की संभावना के चलते कई संग्राहक फिलहाल अपनी उपज रोककर बैठे हैं। उन्हें उम्मीद है कि आने वाले समय में बेहतर दाम मिल सकते हैं।

निर्यात बंद होने से चरोटा पर सबसे ज्यादा असर

चरोटा के प्रमुख खरीदार चीन, ताइवान, मलेशिया और जापान रहे हैं, लेकिन इन देशों को निर्यात फिलहाल बंद होने से बाजार पर सीधा असर पड़ा है। स्थानीय स्तर पर भी मांग कमजोर बनी हुई है। यही वजह है कि चरोटा के भाव 2,200 से 2,400 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हैं, जो पिछले दो वर्षों के सबसे निचले स्तरों में माने जा रहे हैं।

डोरी सीड के भाव बने हुए हैं मजबूत

महुआ की कमजोर फसल का असर डोरी सीड की उपलब्धता पर भी पड़ा है। इसके बावजूद इसके दाम 5,000 से 5,100 रुपये प्रति क्विंटल पर टिके हुए हैं। कारोबारियों का मानना है कि खाद्य तेल उद्योग की मांग फिलहाल सामान्य है, लेकिन नए सीजन के साथ खरीद बढ़ने की संभावना है।

बबूल बीज और नीम गुठली की मांग भी कमजोर

पशु आहार उद्योग में उपयोग होने वाले बबूल बीज की खरीद भी धीमी है। विभिन्न राज्यों में हरे चारे की उपलब्धता बढ़ने से इसकी मांग कम हुई है। इसके भाव फिलहाल 2,000 से 2,200 रुपये प्रति क्विंटल के बीच हैं।

वहीं, नीम गुठली, जिसका उपयोग जैविक कीटनाशक और खाद बनाने वाली कंपनियां करती हैं, उसकी शुरुआती खरीद लगभग पूरी हो चुकी है। कंपनियां फिलहाल नए स्टॉक की बजाय मौजूदा भंडारण पर ध्यान दे रही हैं। इसके चलते इसके दाम 1,600 से 1,700 रुपये प्रति क्विंटल पर बने हुए हैं।

विशेषज्ञ बोले—यह अस्थायी स्थिति

वनोपज विशेषज्ञ अजीत विलियम्स, साइंटिस्ट (फॉरेस्ट्री), बीटीसी कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर एंड रिसर्च स्टेशन, बिलासपुर का कहना है कि मौजूदा कीमतें मांग और आपूर्ति की अस्थायी स्थिति को दर्शाती हैं। उनके अनुसार चरोटा, डोरी सीड, बबूल बीज और नीम गुठली का औद्योगिक महत्व बना हुआ है और मांग में सुधार के साथ इनकी खरीद फिर तेज हो सकती है।

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