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पुलिस की कार्यप्रणाली पर हाई कोर्ट की नजर, लंबित क्लोजर रिपोर्ट पर मांगी अपडेट

1.47 लाख मामलों की क्लोजर रिपोर्ट कोर्ट तक नहीं पहुंची, हाई कोर्ट सख्त... DGP को 22 जुलाई तक स्टेटस रिपोर्ट देने का आदेश

बिलासपुर:  TODAY छत्तीसगढ़  /  छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने राज्य में पुलिस जांच पूरी होने के बावजूद अदालतों में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल नहीं किए जाने के मामलों को गंभीरता से लिया है। अदालत में पेश आंकड़ों के अनुसार, राज्यभर में 1 लाख 47 हजार 714 ऐसे मामले लंबित हैं, जिनमें पुलिस जांच पूरी हो चुकी है, लेकिन अब तक सक्षम न्यायालयों के समक्ष अंतिम रिपोर्ट (क्लोजर रिपोर्ट) पेश नहीं की गई है।

मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने सुनवाई के दौरान पुलिस महानिदेशक (DGP) को 22 जुलाई 2026 तक अद्यतन (अपडेटेड) स्टेटस रिपोर्ट शपथपत्र के साथ प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।

हाई कोर्ट के आदेश के बाद DGP ने दाखिल किया हलफनामा

हाई कोर्ट के 10 अप्रैल और 6 मई 2026 के आदेशों के अनुपालन में डीजीपी ने व्यक्तिगत शपथपत्र दाखिल किया। इसमें बताया गया कि वर्षों से लंबित मामलों के निपटारे के लिए राज्यभर में विशेष अभियान और कार्ययोजना शुरू की गई है।

डीजीपी के अनुसार, इस अभियान की निगरानी पुलिस कमिश्नर, रेंज आईजी और जिला पुलिस अधीक्षक (SP) स्तर पर की जा रही है।

IG और SP को दिए गए सख्त निर्देश

हलफनामे में यह भी बताया गया कि 7 मई 2026 को डीजीपी ने सभी रेंज आईजी और जिला एसपी के साथ वर्चुअल बैठक कर लंबित क्लोजर रिपोर्ट और चार्जशीट समय पर अदालतों में पेश करने के निर्देश दिए थे।

पुलिस विभाग ने अदालत को यह भी बताया कि लंबित मामलों का रिकॉर्ड अत्यधिक बड़ा है। इसलिए विस्तृत जानकारी पेन ड्राइव के माध्यम से सीलबंद लिफाफे में प्रस्तुत करने की अनुमति मांगी गई है।

महाधिवक्ता ने दी कार्रवाई की जानकारी

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता विवेक शर्मा ने अदालत को पुलिस विभाग द्वारा उठाए जा रहे कदमों की जानकारी दी।

दोनों पक्षों को सुनने के बाद हाई कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 22 जुलाई को निर्धारित की है।

DGP को बताना होगा कितना हुआ निपटारा

हाई कोर्ट ने निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई से पहले डीजीपी शपथपत्र के साथ यह जानकारी दें कि विशेष अभियान शुरू होने के बाद 1.47 लाख से अधिक लंबित मामलों में से कितने मामलों का निपटारा हो चुका है और वर्तमान में कितने मामले अभी भी लंबित हैं।

यह मामला राज्य की आपराधिक न्याय व्यवस्था में लंबित जांचों और न्यायालयों में अंतिम रिपोर्ट दाखिल करने की प्रक्रिया को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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