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'सरकारी ज़मीन, जनता का पैसा, फिर 'पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप' मॉडल क्यों ?'

कांग्रेस का राज्य सरकार पर हमला: पूर्व कांग्रेस जिलाध्यक्ष विजय केशरवानी ने जारी किए चिकित्सा शिक्षा विभाग के दस्तावेज़, KPMG को कंसल्टेंट बनाने पर उठ

TODAY छत्तीसगढ़  / छत्तीसगढ़ के बिलासपुर (कोनी) में नवनिर्मित 240 बिस्तरों वाले स्व. दिलीप सिंह जूदेव मरोरियल सुपर मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल और 100 बिस्तरों वाले कैंसर केयर अस्पताल के संचालन को लेकर विवाद शुरू हो गया है. कांग्रेस पार्टी ने राज्य सरकार द्वारा इस अस्पताल को 'पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप' मॉडल पर चलाने की प्रक्रिया शुरू करने पर कड़े सवाल उठाए हैं.

कांग्रेस के पूर्व ज़िला अध्यक्ष और बेलतरा से विधानसभा प्रत्याशी रहे विजय केशरवानी ने बुधवार को एक प्रेस वार्ता कर राज्य सरकार से पूछा कि जब अस्पताल सरकारी ज़मीन पर, जनता के पैसे और सरकारी संसाधनों से बना है, तो इसे निजी हाथों में सौंपने की ज़रूरत क्यों पड़ रही है.

'सरकारी ज़मीन और पैसे, फिर निजी भागीदारी क्यों?'

प्रेस वार्ता के दौरान विजय केशरवानी ने कहा कि इस अस्पताल के निर्माण में क़रीब 200 करोड़ रुपये की लागत आई है, जो जनता के टैक्स का पैसा है.

उन्होंने सवाल उठाया, "जब अस्पताल बनाने से लेकर मशीनें उपलब्ध कराने तक सब कुछ सरकार ने किया है, तो अब संचालन के लिए 'पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप'  मॉडल क्यों लाया जा रहा है? सरकार यह बताए कि इस मॉडल से आम मरीज़ों को ऐसा कौन-सा अतिरिक्त लाभ मिलेगा, जो सरकारी व्यवस्था में नहीं मिल सकता था?"

उन्होंने यह भी पूछा कि निजी भागीदारी आने के बाद ग़रीब, मज़दूर और मध्यम वर्ग के मरीज़ों के लिए मुफ़्त और सुलभ इलाज की गारंटी क्या होगी. 

सरकारी दस्तावेज़ों और KPMG का दिया हवाला

कांग्रेस नेता ने अपने दावों के समर्थन में छत्तीसगढ़ शासन के चिकित्सा शिक्षा विभाग के दो हालिया पत्रों (10 जून 2026 और 26 जून 2026) का ज़िक्र किया.

  • दस्तावेज़ों में क्या है: इन पत्रों में पीपीपी मॉडल के तहत 'रिवाइज़्ड आरएफ़पी' (Revised RFP), 'रिवाइज़्ड लाइसेंस एग्रीमेंट' और टेंडर प्रक्रिया (TPC) का उल्लेख है.

  • कंसल्टेंट की नियुक्ति: केशरवानी ने बताया कि इस प्रक्रिया के लिए 'केपीएमजी' (KPMG) को कंसल्टेंट नियुक्त किया गया है. उन्होंने मांग की है कि पीपीपी समझौते की सभी अहम शर्तों को जनता के सामने सार्वजनिक किया जाए.

उद्घाटन के डेढ़ साल बाद भी सुविधाएं अधूरी

कांग्रेस ने याद दिलाया कि इस अस्पताल का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 29 अक्टूबर 2024 को किया था और बाद में मुख्यमंत्री ने भी इसका निरीक्षण किया था.

केशरवानी ने कहा, "डेढ़ साल बीत जाने के बाद भी अस्पताल पूरी क्षमता से काम नहीं कर रहा है. विशेषज्ञ डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ़ और तकनीकी कर्मचारियों की कमी के कारण गंभीर मरीज़ों को आज भी दूसरे बड़े अस्पतालों में रेफ़र किया जा रहा है. क्या सरकार ने सिर्फ़ भवन का उद्घाटन किया था?"

बीजेपी विधायक पर पलटवार और कांग्रेस की मांगें

बेलतरा के बीजेपी विधायक सुशांत शुक्ला के बयानों पर पलटवार करते हुए केशरवानी ने कहा कि जनता पुराने राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप नहीं, बल्कि वर्तमान व्यवस्था पर जवाब चाहती है.

कांग्रेस ने राज्य सरकार के सामने प्रमुख रूप से 5 मांगें रखी हैं:

  1. 200 करोड़ रुपये की लागत से बने इस अस्पताल को तत्काल पूरी क्षमता से संचालित किया जाए.

  2. डॉक्टरों, नर्सिंग और तकनीकी स्टाफ़ के पदों को स्वीकृति देकर तुरंत भर्ती शुरू हो.

  3. आईसीयू, कैथलैब और एंबुलेंस जैसी जीवन रक्षक सुविधाएं बिना देरी के शुरू की जाएं.

  4. पीपीपी मॉडल लागू करने से पहले ग़रीबों के मुफ़्त इलाज के अधिकार की लिखित गारंटी दी जाए.

  5. पीपीपी मॉडल से जुड़े सभी दस्तावेज़ और शर्तें सार्वजनिक की जाएं, ताकि पता चले कि इलाज की दरें कौन तय करेगा.

स्वर्गीय दिलीप सिंह जूदेव के नाम पर बने इस अस्पताल के हवाले से कांग्रेस ने कहा कि केवल नाम रखना काफ़ी नहीं है, बल्कि उस नाम के अनुरूप ग़रीबों की सेवा भी सुनिश्चित होनी चाहिए.  


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