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| डीजीसीए द्वारा जारी लाइसेंस और कमल दुबे की याचिका |
[TODAY छत्तीसगढ़] / देश की हवाई सेवाओं के नक्शें अब छत्तीसगढ़ के बिलासपुर का नाम भी नज़र आएगा, गुरुवार को डायरेक्टर जनरल आफ सिविल एविएशन ने छत्तीसगढ़ सरकार और एयरपोर्ट आथरिटी को इस आशय का पत्र जारी कर दिया है। भारत सरकार ने कार्मिशियल फ्लाइट के लिए बिलासपुर [चकरभाटा] एयरपोर्ट को लाइसेंस दे दिया है। बिलासपुर को हवाई सेवाओं से जोड़ने के लिए वरिष्ठ पत्रकार कमल दुबे ने एक जनहित याचिका छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में लगाई थी। इस मामले में 10 दिसंबर को सुनवाई होनी है।
सामाजिक और जनहित के मामलों पर अक्सर बेबाक राय रखने वाले बिलासपुर शहर के नागरिक एवं वरिष्ठ पत्रकार कमल दुबे ने फरवरी 2017 में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका लगाई जिसमें बिलासपुर को हवाई सेवाओं से जोड़ने का उल्लेख है । हाईकोर्ट ने कमल दुबे की याचिका को स्वीकार करते हुए मार्च 2017 से सुनवाई शुरू की। याचिकाकर्ता कमल दुबे के पक्ष से अधिवक्ता आशीष श्रीवास्तव उच्च न्यायालय में पैरवी कर रहें हैं। बिलासपुर को हवाई सेवाओं से जोड़ने संबंधी इस याचिका पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने जिला प्रशासन की उदासीनता और काम में लेट-लतीफी के लिए कई बार फटकार भी लगाई। नवम्बर माह में इस मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने जिम्मेदार अधिकारीयों से हवाई सेवा जल्द शुरू किये जाने की लाइसेंस सहित तारीख मांगी थी, अधिकारीयों ने जवाब में 30 नवम्बर तक हवाई पट्टी का काम पूरा कर लिए जाने और 7 दिसम्बर तक लाइसेंस जारी करने के लिए माँगा था। 10 दिसंबर 2018 को इस मामले में अगली सुनवाई होनी हैं उससे पहले ही आज डायरेक्टर जनरल आफ सिविल एविएशन ने लाइसेंस बाबत छत्तीसगढ़ सरकार और एयरपोर्ट आथरिटी को पत्र जारी कर दिया है।
रायपुर और जगदलपुर के बाद छत्तीसगढ़ का तीसरा एयरपोर्ट बिलासपुर में होगा। आपको बता दें कि बिलासपुर के चकरभाठा में हवाई पट्टी का काम पूरा कर लिया गया है। बिलासपुर से हवाई सेवा शुरू किये जाने को लेकर चल रही तैयारियों के संबंध में डीजीसीए अधिकारियों ने अक्टूबर के आखिरी सप्ताह में बिलासपुर के चकरभाठा स्थित एयरपोर्ट का निरीक्षण किया था और जरूरी सुधार के दिशा निर्देश दिया थे। देश की हवाई सेवा के नक्शे में अब बिलासपुर का नाम जुड़ गया है लेकिन सवाल ये खड़ा हो रहा है की उड़ान और अन्य सुविधाएँ कब से शुरू होंगी।
.[TODAY छत्तीसगढ़] / छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भूपेश बघेल ये मानते है कि भारतीय जनता पार्टी को सत्ता से बाहर होने का अहसास हो चला है यकीनन इसलिए वह सत्ता में बने रहने के लिए किसी भी स्तर तक जा सकती है, ऐसे आरोप पीसीसी अध्यक्ष ने लगाए हैं। बिलासपुर में संवाददाताओं से बातचीत करते हुए भूपेश बघेल ने कहा प्रदेश में चुनाव के बाद मतगणना को प्रभावित करने की कोशिश डाक्टर रमन सिंह की सरकार कर रही है। इतना ही नहीं नतीजे आने के बाद खरीद-फरेख्त के लिए भी बीजेपी के धनपशु सक्रिय हो गए हैं। उन्होंने कहा पार्टी ने इसे लेकर चुनाव आयोग में शिकायतें कीं हैं। इन शिकायतों के बाद कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर कांग्रेस कमेटी ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में एक याचिका लगाई है जिसे कोर्ट ने इसे स्वीकार लिया है। उच्च न्यायालय इस याचिका पर 10 दिसंबर को सुनवाई करेगा।
भूपेश बघेल ने कहा कि कांग्रेस ने लगातार राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर चुनाव आयोग को शिकायत की है कि छत्तीसगढ़ में मतगणना के दौरान गड़बड़ी की पूरी संभावना है। यहां स्ट्रांग रूम की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं और ईवीएम में छेड़खानी की शिकायतें लगातार आ रहीं हैं। धमतरी और बेमेतरा में इस तरह के मामले सामने पहले ही सामने आ चुके हैं। स्ट्रांग रूम में लाइट और सीसीटीवी कैमरे को लेकर भी शिकायतें हैं। स्ट्रांग रूम में सील किए गए और बिना सील किए गए ईवीएम एक साथ रखे गए हैं। अब तक एआरओ नियुक्त नहीं किया गया है।
भूपेश बघेल ने कहा कि छत्तीसगढ़ में भाजपा की ओर से खरीद-फरोख्त के लिए धनपशु भी सक्रिय हो गए हैं। पहले जिस तरह गोवा में खरीद-फरोख्त की गई थी, उसी तरह छत्तीसगढ़ मेँ भी करने के लिए कांग्रेस उम्मीदवारों और नेताओँ के मोबाइल निगरानी में रखे जा रहे हैं। सरकारी मशीनरी का खुलेआम दुरूपयोग कर नक्सली उन्मूलन के लिए लाए गए निगरानी सिस्टम का सरकार दूसरी जगहों पर इस्तेमाल कर रही है। इसकी भी शिकायत चुनाव आयोग को भेजी गई है। उन्होने कहा कि 36 हजार करोड़ के नान घोटाले का चालान सरकार ने मतगणना के सिर्फ पाँच दिन पहले पेश किया । आनन-फानन में यह कार्रवाई मामले में जिम्मेदार लोगों को बचाने के लिए की गई है। इससे यह जाहिर होता है कि बीजेपी यह जान चुकी है कि अब सरकार जाने वाली है लेकिन कांग्रेस की सरकार आई तो मामले की जाँच एसआईटी से कराई जाएगी और दोषी लोगों को बख्शा नहीं जाएगा।



