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 [TODAY छत्तीसगढ़] / छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग के आईजी विवेकानंद सिन्हा ने एक जनवरी 2018 से 30 नवम्बर 2018 के आंकड़ों का जिक्र करते हुए बताया कि इस वर्ष पुलिस-नक्सलियों के बीच हुई 159 मुठभेड़ में 111 नक्सली ढेर हो गए। इनके पास से 209 हथियार बरामद हुए हैं। साथ ही 1079 नक्सली गिरफ्तार किए गए हैं, जबकि 451 नक्सल आरोपितों ने आत्मसमर्पण किया है। वहीं 69 बारूदी विस्फोटों एवं नक्सली हमलों में 50 जवान अब तक शहीद हो चुके हैं। इसके अलावा नक्सलियों ने इस दौरान 67 आम नागरिकों की हत्या कर दी और 121 जवान घायल हुए हैं। आईजी सिन्हा का कहना है कि देश में सबसे अधिक नक्सल हिंसाग्रस्त छत्तीसगढ़ राज्य के बस्तर संभाग में पिछले साल के मुकाबले इस वर्ष घटनाओं में कमी आई है। हालांकि नक्सलियों ने वर्ष 2018 में अपने हमले कम नहीं किये, लेकिन उनके संगठन को भारी नुकसान पहुंचा है।
आंकड़े बताते हैं कि कई बड़े हमले को पैरामिलिट्री फोर्स ने नाकाम कर दिया है । ऐसे में हम यह कहा जा सकता  हैं कि राज्य में नक्सलियों ने साल भर उत्पात तो मचाया पर उन पर अंकुश लगाने में पुलिस को काफी सफलता मिली है। उल्लेखनीय है कि नक्सल उन्मूलन के तहत बस्तर के सभी सात जिलों में अलग-अलग नाम से पुलिस ने अभियान चलाया है। इसका असर यह हुआ कि कई नक्सली संगठन अपराध की राह छोड़कर मुख्य धारा में लौट आए हैं। इसके अलावा पिछले वर्षों के मुकाबले इस वर्ष बस्तर जोन में घटनाओं में कमी आई है। एक जनवरी से 30 नवंबर तक बस्तर जोन के दंतेवाड़ा, कांकेर बीजापुर, नारायणपुर, कोंडागांव, सुकमा और बस्तर जिले में कुल 436 नक्सली अपराध पंजीकृत किये गये हैं। इनमें 157 मुठभेड़, मारे गये नक्सलियों की संख्या 111, गिरफ्तार नक्सलियों की संख्या 1079, समर्पित नक्सली 451, नक्सली कैम्प पर रेड 4, नक्सलियों से विभिन्न प्रकार के 209 हथियार बरामद किये गये हैं। अधिकृत आकड़ों के मुताबिक नक्सलियों ने वर्ष 2018 में कुल 69 विस्फोट किये।
सुरक्षा बलों के जवानों ने 276 आईईडी बरामद की है, जबकि 1075 डेटोनेटर और 661 जिंदा कारतूस नक्सलियों से जब्त किये गये हैं। विभिन्न जिलों में मुठभेड़ और विस्फोट से पैरामिलिट्री फोर्सेस, जिला पुलिस बल, डीआरजी सहित बस्तर में तैनात अन्य सुरक्षा बलों के 50 जवान शहीद हुए हैं। जबकि मुखबिरी व अन्य कारणों से 67 आम नागरिकों को जान गवानी पड़ी है। सुरक्षा बलों के 121 जवान घायल हुये हैैं, जबकि 30 आम नागरिकों को नक्सलवाद का दर्द सहना पड़ा है।
[TODAY छत्तीसगढ़] / छत्तीसगढ़ राज्य पुलिस अकादमी, चंदखुरी में साल 2018 में हुए बड़े सड़क हादसों पर किए गए अध्ययन की जानकारी सामने रखी गई। यातायात दबाव और बढ़ते सड़क हादसों के नियंत्रण को लेकर चार दिनों की कार्यशाला के दौरान अलग-अलग जिलों से अफसरों ने बड़े सड़क हादसों पर केस स्टडी प्रेजेंटेशन दिया।
पुलिस अकादमी में 3 से 6 दिसंबर तक सड़क सुरक्षा एवं यातायात प्रबंधन विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। कार्यक्रम के दूसरे दिन  2018 में अलग-अलग जिलों में बड़े सड़क हादसों पर तैयार केस स्टडी को प्रस्तुत किया गया। इसमें बड़े सड़क हादसों की वजहें सामने आईं। भविष्य में बड़े सड़क हादसों को रोकने के उपायों पर भी चर्चा की गई। बड़े अफसरों ने इस मौके पर अपने अनुभव साझा किए। 
इस मौके पर एआईजी यातायात जितेन्द्र सिंह मीणा ने पेश किए गए केस स्टडी पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने भविष्य में होने वाले हादसों को रोकने के उपायों के बारे में बताया। इस दौरान बड़ी संख्या में अफसर मौजूद थे, जिन्होंने अपनी जानकारी और अनुभव साझा किए। बढ़ते यातायात दबाव और बढ़ते सड़क हादसों की संख्या पर विचार किया गया। नए साल के कार्यक्रम के दौरान भी पटाखे फोडऩे से मना किया गया है।
पुलिस अकादमी की एएसपी संगीता पीट्र्स, मिर्जा जियारत बैग व जिलों से आए राजपत्रित अधिकारी यातायात प्रभारी रक्षित निरीक्षक सूबेदार, निरीक्षक उप निरीक्षक स्तर के 72 अफसरों के अलावा अकादमी के 26 प्रशिक्षु डीएसपी समेत 98 अफसर कार्यक्रम में मौजूद थे।
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