[TODAY छत्तीसगढ़] / छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का आदेश होते ही मुख्यमंत्री सुशासन फेलोशिप योजना के तहत नियुक्त किए गए 41 कंसलटेंट की सेवाएं 31 जनवरी 2019 की शाम 5.30 से समाप्त करने का फैसला ले लिया गया है। बघेल सरकार इस नियुक्ति को फिजूलखर्ची मान रही है।
आपको बता दें कि भाजपा सरकार ने आईआईटी समेत कई प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों से पढ़कर निकले और मल्टीनेशनल कंपनियों में काम कर चुके युवाओं को फेलोशिप योजना के तहत अलग-अलग जगह नियुक्तियां दे रखीं थी। तत्कालीन भाजपा सरकार में मुख्य सचिव कार्यालय से लेकर सचिवों और सभी 27 जिलो में कलेक्टरों के साथ इन्हें अटैच किया गया था। मुख्यमंत्री सुशासन फेलोशिप योजना के तहत नियुक्त अफसरों को शासकीय योजनाओं की मानटिरिंग का जिम्मा सौंपा गया था. इन्हें सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय को फीडबैक देने का भी अधिकार दिया गया था। इन नियुक्तियों को लेकर तत्कालीन रमन सरकार पर यह आरोप भी लगा था कि वह खास सिडिंकेट के अधिकारियों की सिफारिशों और उनके चहेतों को नौकरी दे रही है। मुख्यमंत्री सुशासन फेलोशिप योजना के तहत नियुक्त किये गए अफसरों में पूर्व मुख्य सचिव का साला भी शामिल था।
सरकार के आदेश से प्रभावित कंसलटेंट -
अभिजीत सिंह, अदीब वहाब, अजेश ए नायर, अक्षत शुक्ला, अक्षय रात्रे, अमन सहगल, अमित अशोक शिंगे, अमित शरण सिंह, अनास रहमान सी, अंकित गोयल, अंशुल अग्रवाल, अयाज अहमद सिद्दकी, आय़ुष, भूपिंदर जीत, चाहत सुरेंद्र शाह, चिंतन राज, धरणीकांध कोंगटि, दिव्या रामास्वामी, डा भार्गव देशपांडे, हिमांशु अग्रवाल, कुमार देवाशीष, मृत्युजंय शर्मा, पलाश पांडेय, पियुष मिश्रा, प्रशांत एस चिन्नापनावर, प्रेरणा वाडिकर, प्रियंका सेठी, आर रमेश रेड्डी, राहुल टिक्कू, राजू सागी, रवि कुमार, रोहित वाधवा, संकल्प अभिशेष, सत्यराज, सौम्या चक्रवर्ती, अनंत प्रकाश कल्याणी, स्नेहा प्रिया, सोम्याकमर वैल्यू और सुपर्णा वर्मा शामिल है। बताया जा रहा है की फेलोशिप योजना में नियुक्ति पाए इन कंसलटेंट्स को प्रतिमाह 1 लाख से 2.5 लाख रूपए तक की तनख्वाह दी जा रही थी।
