[TODAY छत्तीसगढ़] / छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज अन्नदान के महापर्व छेरछेरा पर्व की बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए राज्य के अवाम को बताया कि ग्रामीण जनजीवन से जुड़ा यह लोकपर्व हमारी दानशीलता की गौरवशाली परंपरा की याद दिलाता है, साथ ही साथ इस लोक पर्व के माध्यम से राज्य संस्कृति को भी बचाकर रखा गया है।
मुख्यमंत्री बघेल ने अपने अनुभवों को शेयर करते हुए कहा कि कृषि प्रधान छत्तीसगढ़ में यह पर्व नई फसल के खलिहान से घर आने पर किसान उत्साह और उमंग के साथ मनाता है। गांवों और शहरों की गलियों में बच्चों की टोलियां द्वार-द्वार जाकर छेरछेरा माई कोठी के धान ल हेरहेरा की पुकार लगाकर अन्नदान का आग्रह करते हैं। दानशीलता के इस महापर्व में बड़े-बुजुर्ग स्नेह के साथ बच्चों को धान, चावल सहित नगद राशि भी देते हैं। उन्होंने इस पर्व पर एक बार फिर से कहा कि मेहनतकश किसानों के इस पर्व में कर्ज माफी और ढाई हजार रुपए प्रति क्विंटल पर धान खरीदी का सरकार का फैसला उनकी खुशियों में नए रंग भर देगा।
मुख्यमंत्री बघेल ने अपने अनुभवों को शेयर करते हुए कहा कि कृषि प्रधान छत्तीसगढ़ में यह पर्व नई फसल के खलिहान से घर आने पर किसान उत्साह और उमंग के साथ मनाता है। गांवों और शहरों की गलियों में बच्चों की टोलियां द्वार-द्वार जाकर छेरछेरा माई कोठी के धान ल हेरहेरा की पुकार लगाकर अन्नदान का आग्रह करते हैं। दानशीलता के इस महापर्व में बड़े-बुजुर्ग स्नेह के साथ बच्चों को धान, चावल सहित नगद राशि भी देते हैं। उन्होंने इस पर्व पर एक बार फिर से कहा कि मेहनतकश किसानों के इस पर्व में कर्ज माफी और ढाई हजार रुपए प्रति क्विंटल पर धान खरीदी का सरकार का फैसला उनकी खुशियों में नए रंग भर देगा।
